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बहराइच में बाघ ने वन रक्षक को ही मारकर खा लिया

बहराइचः बहराइच में संरक्षित वन क्षेत्र कतर्नियाघाट में गुरुवार को गश्त कर रहे एक वन

रक्षक को बाघ ने अपना निवाला बना लिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कतर्निया रेंज में

तैनात वनवाचर बाधू (65) बुधवार को कटियारा बीट के 5 ए में गश्त के लिये गये हुए थे।

शाम चार बजे तक घर वापस नहीं आने पर परिजनों ने अपने पड़ोसी ग्रामीणो को लेकर

उनकी तलाश शुरू की। रात भर सघन तलाशी के बाद गुरूवार सुबह वनवाचर बाधू का क्षत

विक्षत शव बेंत के घने जंगलों में पड़ी दिखाई दी। ग्रामीण शव के करीब जाने लगे तभी

उन्हें शव से लगभग करीब 50 मीटर की दूरी पर बाघ बैठा दिखायी दिया। बाघ को देखकर

सबके होश उड़ गये। सभी लाठी-डंडा पीटने के साथ चिल्लाने लगे। कुछ देर बाघ वन वाचर

के शव के करीब बैठा रहा, फिर घने जंगलों में चला गया । ग्रामीणों ने घटना की सूचना

वन विभाग को दी। कर्तनिया रेंज के डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल वन दरोगा अनिल कुमार,

वाचर रवींद्र थाना सुजौली पुलिस दरोगा जितेंद्र राय, दरोगा अशोक जायसवाल एस एस बी

के ,बी के कुमार एएसआई, घनाजी कचड़े, उग्रसेन के साथ मौके पर पहुंच कर शव को

अपने कब्जे में लिया है। डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल ने कहा कि वनवाचर बाधु कल वन क्षेत्र

में गश्त के लिए गया था। आज सुबह इस का शव घने जंगलों में बरामद हुआ है। प्रथम

दृष्टि में यह बाघ का हमला लगता है लेकिन किस हिंसक जीव ने हत्या की है।

बहराइच में आदमखोर बाघों की गतिविधियां बढ़ी

उत्तर प्रदेश के इल बहराइच एवं आस पास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से वैसे बाघों की

शिकायत लगातार मिल रही है जो आदमखोर हैं। आम तौर पर बाघ ऐसा जंगली जानवर

है जो इंसान का शिकार नहीं करता। शिकार की कमी अथवा शारीरिक तौर पर कमजोर

होने के बाद ही बाघ इंसान पर हमला करते हैं। लेकिन इसके ठीक विपरीत पश्चिम बंगाल

और बांग्लादेश के बीच फैले सुंदरवन के इलाके में औसतन बाघ ही आदमखोर हैं। वे

कठिन परिस्थितियों में जीने की वजह से शारीरिक तौर पर अधिक सक्षम हैं। इसके बाद

भी उनके आदमखोर होने की मुख्य वजह शायद समुद्री पानी का खारापन है।


 

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