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बदरुद्दीन अजमल के फाउंडेशन ने आतंकवादी समूहों से धन प्राप्त किया

  • बीजेपी ने केंद्रीय सरकार से जांच की मांग की

  • आरएसएस से जुड़े संगठन ने इसका राज खोला

  • पैसे देने वाला संगठन हमास से सीधे तौर पर जुड़ा

  • असम के सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: बदरुद्दीन अजमल इस बार नये किस्म के और गंभीर विवादों में घिर गये हैं। वैसे

अब तक आरोप की पुष्टि नहीं हो पायी है और कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह चुनावी

शिगूफा भी हो सकता है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ ) प्रमुख

बदरुद्दीन अजमल के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) अजमल फाउंडेशन पर कथित रूप

से विभिन्न विदेशी संगठनों से धन प्राप्त करने का आरोप है, इसके अलावा आतंकवादी

समूहों के साथ लिंक है। चौंकाने वाला यह रहस्योद्घाटन लीगल राइट ऑबजरवेटरी

(एलआरओ) द्वारा किया गया था, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध एक

कानूनी अधिकार से जुड़ा संगठन है। मौलाना बदरुद्दीन अजमल के संगठन को कथित रूप

से आतंकवादी समूहों से जुड़े विदेशी एजेंसियों से धन प्राप्त होता है, दक्षिणपंथी नेता की

शिकायत है। असम के सांसद मौलाना बदरुद्दीन ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के

प्रमुख हैं, जो 2021 विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन के लिए कांग्रेस के साथ बातचीत

कर रहे हैं। दक्षिणपंथी नेता सत्या रंजन बोरा ने गुवाहाटी के एक पुलिस स्टेशन में

अजमल फाउंडेशन के खिलाफ अपनी शिकायत में कानूनी अधिकार वेधशाला नामक एक

गैर सरकारी संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। श्री बोरा ने एफआईआर में कहा,

“रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए, हम गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत

इस संबंध में उचित जांच चाहते हैं … अजमल फाउंडेशन ने उन विदेशी निधियों का

दुरुपयोग किया है।” बुक करने के लिए। एनजीओ ने एक ट्वीट में कहा था कि फाउंडेशन

को “तुर्की और यूके के आतंकी समूहों” से शिक्षा के लिए 69.55 करोड़ मिले, लेकिन उन्होंने

केवल 2.05 करोड़ का इस्तेमाल किया।

बदरुद्दीन अजमल के मामले में हिमंत बिस्मा सरमा का बयान

असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उम्मीद जताई कि केंद्र फाउंडेशन द्वारा संभावित

विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) उल्लंघन की जांच करेगा। “एक

धारणा है कि बदरुद्दीन अजमल मानवीय कार्यों के लिए अपनी जेब से खर्च करते हैं,

लेकिन वास्तविकता अलग है,” उन्होंने कहा। एलआरओ ने उन एनजीओ के नाम भी

सूचीबद्ध किए जो अजमल फाउंडेशन को फंडिंग कर रहे हैं। उनमें से एक यूके स्थित अल

इमदाद फाउंडेशन है, जो कथित तौर पर फिलिस्तीनी प्रतिरोध फैलाने वाले आतंकवादी

समूह हमास से सीधे जुड़ा हुआ था, जिसे इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीन में कई

आत्मघाती बम विस्फोटों के लिए जाना जाता है। सूची में एक और समूह उम्माह वेलफेयर

ट्रस्ट यूके शामिल है, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण का आरोप है।इसी

तरह, अजमल फाउंडेशन का एक और दाता तुर्की स्थित इन्सानी यदीम वक्फी (फाउंडेशन

फॉर ह्यूमन राइट्स एंड फ्रीडम एन ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ) है, जिसे अल-कायदा आतंकी

समूह के साथ सीधे संबंध रखने के लिए दुनिया भर की कई सरकारी एजेंसियों ने खुलासा

किया है। एक अन्य दाता मुस्लिम एंड यूके है, जो कश्मीरी आतंकवादी समूह हिजबुल

मुजाहिदीन के साथ सीधे संपर्क के लिए जाना जता है। इस खुलासे के बाद, राज्य के वित्त

एवं स्वास्थ्य मंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने तुरंत मामले की जांच के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की

मांग की।

आतंकी संगठन से जुड़े संगठन होने का आरोप गंभीर

उन्होंने कहा, अब तक असम के लोग जानते थे कि अजमल फाउंडेशन अजमल के स्वयं के

पैसे से चेरिंटी का काम कर रहा है। लेकिन खुलासों से पता चला है कि आतंकी गतिविधियों

से जुड़े संगठन अजमल फाउंडेशन को फंडिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा इस बारे में अजमल

फाउंडेशन खुद बताए कि आखिर सालाना 70 करोड़ की राशि कहां से आ रही है और उसका

उपयोग कहां हो रहा है अन्यथा केंद्र सरकार निश्चित रूप से इस पर ध्यान देगी। असम के

मंत्री सह भाजपा उत्तर पूर्व नेता हिमंत बिस्वा शर्मा ने इस मामले के बारे में कहा कि यह

एक दंडनीय अपराध है, हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार एक जांच करेगी। इस बीच,

अजमल फाउंडेशन ने उन पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है।

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