fbpx Press "Enter" to skip to content

झारखंड की राजनीति की चर्चा के केंद्र में फिर से बाबूलाल मरांडी




झारखंड की राजनीति की चर्चा के केंद्र में फिर से बाबूलाल मरांडी हैं।

इस बार की सूचना है कि वह वेलेंटाइन डे के दिन भाजपा में शामिल

होने जा रहे हैं। खुद श्री मरांडी ने हाल के दिनों में कई बार यह सफाई दी

है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। इसके बाद भी अगर फिर से ऐसी

चर्चा हो रही है तो यह समझा जाना चाहिए कि एक पुरानी कहावत है

कि बिना आग के धुआं नहीं होता। हाल के दिनों में झारखंड विकास

मोर्चा के पुनर्गठन के दौरान भी इसी चर्चा को हवा मिली है। प्रदीप

यादव और बंधु तिर्की को केंद्रीय कमेटी से हटाये जाने के बाद इस सोच

को बल मिला है। यह दोनों विधायक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि

उनके लिए भाजपा में जाना कतई संभव नहीं है। स्थानीय और

राजनीतिक कारणों से इन दोनों को भाजपा में जाने का नुकसान

उठाना पड़ेगा, इस बात को हर कोई समझ सकता है। लेकिन भाजपा

के अंदर से अगर बार बार बाबूलाल मरांडी के शामिल होने की सूचना

प्रसारित हो रही है तो अब इस स्थिति को भाजपा के अंदर से भी तौला

जाना चाहिए। आखिर भाजपा के वे कौन से लोग हैं, जिन्हें श्री मरांडी

के भाजपा में आने से नफा अथवा नुकसान होने वाला है। जाहिर है कि

अगर वाकई झारखंड की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले श्री

मरांडी भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें पार्टी में कोई महत्वपूर्ण पद

अवश्य दिया जाएगा। इसके बाद झारखंड की राजनीति में भाजपा की

गाड़ी किस दिशा में चलेगी, यह देखना रोचक होगा।

झारखंड की राजनीति का फैसला दिल्ली चुनाव के बाद

वैसे इस पर किसी फैसले के पहले ही दिल्ली के विधानसभा का चुनाव

भी भाजपा का भविष्य तय करने वाला साबित होने जा रहा है। अगर

देश की राजधानी के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन फिर से

खराब रहता है तो पार्टी के वर्तमान नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठेंगे।

ऐसे ही कई विधानसभा चुनावों में पराजय की वजह से ऐसे सवाल

पहले से ही उठने लगे हैं। लेकिन लोकसभा की सभी सात सीटों पर

जीत दर्ज करने के बाद दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार जाना

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल खड़े करेगा। शायद इसी वजह से

भाजपा की तरफ से तमाम बड़े और प्रभावशाली नेताओं को वहां चुनाव

प्रचार के लिए झोंक दिया गया है। झारखंड की राजनीति में बाबूलाल

मरांडी का भाजपा में आने शायद अर्जुन मुंडा के कद को नियंत्रित करने

का एक प्रयास हो सकता है। लेकिन वर्तमान समीकरण तो यही है कि

केंद्र में मंत्री होने के बाद भी श्री मुंडा अपने आचरण और सांगठनिक

क्षमता की वजह से सबसे अधिक लोकप्रिय नेता हैं। 25 विधायकों वाले

भाजपा विधायक दल में भी उन्हें चाहने वालों की संख्या घोषित तौर

पर अधिक है। ऐसे में विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर श्री

मरांडी का लाने की कवायद से जिनलोगों की इच्छाओं पर कुठाराघात

होगा, उनमें सीपी सिंह, रामचंद्र चंद्रवंशी और नीलकंठ सिंह मुंडा ही

प्रमुख हैं। इनमें से कुछ तो अंदर ही अंदर अब भी इस पद को हासिल

करने की जुगत भिड़ा रहे हैं।

दूसरा खेमा भी वेट एंड वाच की स्थिति में

झारखंड की राजनीति में अब दूसरे खेमे की बात करें तो हेमंत सोरेन

मंत्रिमंडल में भी एक सीट अब भी रिक्त है। चूंकि स्टीफन मरांडी को

मंत्री नहीं बनाया गया है इसलिए यह माना जा सकता है कि यह सीट

किसी ईसाई नेता के लिए सुरक्षित है। तब इस सीट पर झाविमो से

निष्कासित विधायक बंधु तिर्की का दावा सबसे मजबूत बनता है। खुद

श्री तिर्की भी कांग्रेस के संपर्क में होने के बाद भी फिलहाल

झाविमो अध्यक्ष यानी बाबूलाल मरांडी का अंतिम फैसला देखने की

प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रदीप यादव के साथ उनके कांग्रेस

नेतृत्व से मिलने की तस्वीरें सार्वजनिक हो चुकी हैं। इसलिए यह माना

जा सकता है कि अगर श्री मरांडी वाकई भाजपा में शामिल हो रहे हैं तो

इन दो विधायकों का अगला पड़ाव कांग्रेस ही होगा। बंधु तिर्की पर

झाविमो की तरफ से जो कार्रवाई की गयी है उसमें आरोप यही है कि

उन्होंने हटिया विधानसभा के चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशी के

बदले कांग्रेस के प्रत्याशी अजयनाथ शाहदेव के पक्ष में काम किया था।

इन तमाम तथ्यों में से किसी एक को अलग कर झारखंड की राजनीति

को फिलहाल समझा नहीं जा सकता। यह सारे सवाल एक दूसरे

से इतनी बुरी तरह उलझे हुए हैं कि किसी एक सिरा को सुलझाये बिना

इनका हल नहीं निकलने वाला। अब देखना है कि इस उलझन को

समाप्त करने की प्रक्रिया किस ओर से प्रारंभ होती है और उसके

अंतिम छोर पर कौन खड़ा नजर आता है।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from नेताMore posts in नेता »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

4 Comments

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: