आजाद अंसारी ने खुद को एनएसयूआइ का सदस्य बताया

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रांचीः आजाद अंसारी ने अपनी तरफ से एक विज्ञप्ति जारी कर आजसू के उस दावे का खंडन किया है,

जिसमें आजसू ने छात्र संघ चुनाव में उसकी जीत को संगठन की जीत बताया है।

अंसारी ने स्पष्ट किया है कि बीएन जालान कॉलेज, सिसई छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुनाव में

एनएसयूआई समर्थित उम्मीदवार थे और अब भी वे एनएसयूआई में ही है।

आजाद ने वीडियो में भी अपना बयान जारी किया है

उन्होंने आजसू के दावे को ठुकराते हुए कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए आजसूने उन्हें अपना सदस्य बताया है।

वे कभी आजसू या किसी अन्य दल के सदस्य नहीं रहे हैं, वे शुरू से एनएसयूआई के ही सदस्य रहे हैं

और आगे भी एनएसयूआई में ही रहेंगे।

उन्होंने बताया कि वे छात्र हित में संघर्ष करने वाली एनएसयूआई की विचारधारा के साथ हैं

और आगे भी एनएसयूआई के कार्यकर्ता के तौर पर ही छात्र हित के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

आजाद अंसारी के अलावा अभिनव भगत ने भी बयान दिया

एनएसयूआई के छात्र संघ चुनाव प्रबंध समिति के प्रभारी अभिनव भगत ने कहा कि

छात्रों द्वारा मिले जनादेश का एनएसयूआई सम्मान करती है

और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को रोकने के लिए अगर आदिवासी छात्र संघ अपने नेतृत्व में

यूनियन बनाने की संख्या बल प्राप्त करती है तो एनएसयूआई उसे समर्थन देगी,

लेकिन आजसू विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में बनने वाली सरकार को उनकी संगठन समर्थन नहीं देगी।

भगत ने आगे कहा कि जिस तरह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता द्वारा छात्र संघ चुनाव पर

दूसरे छात्र संगठनों व राजनीतिक दलों के ऊपर बयानबाज़ी किया जा रहा है

उससे यह प्रतीत हो रहा है कि सरकार किस तरह राँची विवि में अभाविप की सरकार बनाने को उत्सुक है।

छात्रों के चुनाव में राजनीतिक दलों का परदे के पीछे से किया जा रहा हस्तक्षेप पूर्णतः अनुचित है।

एनएसयूआई भाजपा द्वारा छात्र राजनीति में दखलअंदाजी करने के इस प्रयास की कड़ी निंदा करती है।

उन्होंने आगे कहा कि छात्र संघ चुनाव पर भाजपा द्वारा किए जा रहे दख़ल से यह लग रहा है कि

अभाविप के पास सरकार बनाने की पर्याप्त आँकड़े नहीं है, अगर उनके पास वाक़ई जादुई आँकड़े हैं

तो इस तरह के बयान देने की आख़िर क्या ज़रूरत आन पड़ी है।

वे अपनी ताक़त के बल पर भय का माहौल बनाकर विवि स्तरीय चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं।

एनएसयूआई विवि प्रशासन से अपील करती है कि वे राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप

व भयादोहन की राजनीति पर अंकुश लगायें ताकि छात्र संघ चुनाव पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।

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