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आयुर्वेदिक अस्पताल वर्षों से बंद अब वहां मुर्गी पालन चल रहा है

कुंडहितः आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण यहां कराया था लेकिन उचित देखरेख के

कारण तथा बंद रहने के कारण आयुर्वेदिक अस्पताल भुत बंगला बन गया। भवन की

खिड़की, दरवाजा पानी की टंकी, बिजली लाईन आदि सामान गायव हो गया। अभी

ग्रामीणों द्वारा उक्त भवन में मुर्गी पालन का कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा

आदिवासी बहुल लोगो को चिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु पुतुलबोना मे लाखो रुपया की

लागत से आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण किया गया था। अस्पताल का निर्माण के बाद

नाला विधान सभा का विधायक रबिन्द्रनाथ महतो 2008 मे अस्पताल का उद्घाटन

किया था। उद्वघाटन के उपरांत एक साल अस्पताल किसी तरह का चला। एक साल के

बाद से विभागीय उदासीनता कहे या सरकार की लापरवाही , अस्पताल भूत बंगला मे

तब्दील हो गया। ग्रामीण निर्मल हासंदा, विमल वास्की, बाबुराम बास्की, सुनिल सोरेन,

श्रर्मिला सोरेन, अलोकी बास्की आदि ने बताया वर्षो से डॉक्टर एवं कर्मचारी के अभाब मे

बंद पड़ी है। सरकार ने जिस उद्वेश्य पर आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण किया गया था

उसका लाभ हम ग्रामीणो को नही मिला। इस क्षेत्र के लोगो को अस्पताल के अभाव मे छोटे

छोटे बीमारी होने पर 10 किलोमिटर दुर कुंडहित सीएचसी अस्पताल जाना पड़ता हैं। या

20 किलों दूर पश्चिम बंगाल के राजनगर तथा नाकड़ाकोदा जाना पड़ता है। जहां चिकित्सा

मे आर्थिक एव मानसिक शिकार होना पड़ता है।

आर्युवैदिक अस्पताल में महिला समिति का मुर्गी पालन

पुतुलबोनो आदिवासी गांव के महिला स्वंय समिति के दो सदस्यों द्वारा बंद पड़े

आयुर्वेदिक अस्पताल मे मुर्गी पालन का काम कर रही है। इस दौरान गांव सिद्धु कान्हु

महिला स्वंय सहायता समुह एवं सरा सरणा महिला स्वंय सहायता समुह द्वारा 200 मुर्गी

का बच्चा का पालन का कार्य कर रही है। इस दौरान समिति के महिलाओं ने बतायी

अस्पताल बंद हो गया और भवन पड़ा हुआ है। इस लिये हम लोग इस भवन मे समूह से

मुर्गी पालन का कार्य कर रहे है। जब सरकार हम लोगो को उठने को कहेगें तो उस समय

उठ जायेगें। 

क्या कहते है जिला परिषद सदस्य भजहरी मंडल एवं सुभद्रा वाउरी ने बताया यह

आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सक एवं कर्मचारी के अभाव मे वर्षो से बंद पड़ी है। जिसका

लाभ गरीब आदिवासी हरिजन लोगो को नही मिल रहा है। सरकार गरीबो की ईलाज के

लिये विभिन्न तरह का खाका तैयार कर देेते है लेकिन सरजमीन पर संचालित करने के

लिये पहल नही करते है। जिसका खमियाजा इस क्षेत्र के गरीब असहाय लाचार आदिवासी

हरिजन लोगो को झलने पड़ रही है। जिप सदस्यो ने उपायुक्त महोदय से इस पर पहल

करने तथा बंद पड़े आयुर्वेदिक अस्पताल को चालू करने की मांग की।

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