fbpx Press "Enter" to skip to content

फुरकान अंसारी की फूंक से दूर तलक आग लगी भाजपा कांग्रेस दोनो बेहाल

  • गुटबाजी से हलाकान है प्रदेश भाजपा भी
  • एक दूसरे को लंघी मारने में कोई कम नहीं
  • पार्टी नहीं अलग अलग खेमा का बोलबाला
राष्ट्रीय खबर

रांचीः फुरकान अंसारी की फूंक से सिर्फ झारखंड के प्रभारी आरपीएन सिंह ही नहीं जले हैं

बल्कि कांग्रेस में यह आग दिल्ली तक जा पहुंची है। आनन फानन में झारखंड के प्रभारी

आरपीएन सिंह का रांची आना और सब कुछ ठीक होने का एहसास देना इसे साबित कर

गया है। वैसे फुरकान अंसारी के प्रसारित बयान पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने

वनभोज के दिन ही सफाई दी थी। लेकिन बाद के घटनाक्रम यही बता रहे हैं कि उनके

बयान ने घाव करे गंभीर जैसी स्थिति पैदा कर दी है। चर्चा है कि फुरकान अंसारी ने

झारखंड के प्रभारी श्री सिंह पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगा दिया था। कांग्रेस

कार्यालय में उनकी दुकानदारी में शामिल नेताओं की गतिविधियों को दूसरे लोग बड़ी गौर

से देख रहे हैं।

दूसरी तरफ कांग्रेस के जैसी ही हालत भाजपा की भी है, जहां साजिश दर साजिशों के खेल

में पार्टी धराशायी है। दरअसल सत्ता की निरंतर नजदीकी ने इस पार्टी का भी वही हाल

कर दिया है, जो कभी कांग्रेस का हुआ करता था। नेताओं के बयान और उपस्थिति में बॉडी

लैंग्वेज देखकर आम कार्यकर्ता भी कौन किधर हैं, इसे बखूबी समझ पा रहा है। इसी वजह

से पार्टी के ग्रास रुट के कार्यकर्ता भी भ्रम की स्थिति में हैं और पार्टी की धार लगातार कूंद

पड़ रही है। पार्टी की इस कमजोर स्थिति में कोई बाहरी बल नहीं लगा है बल्कि पार्टी के

अंदर के लोग भी पार्टी की खाट खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

फुरकान अंसारी की बात का डॉ उरांव ने खंडन किया है

इन दो प्रमुख दलों की खींचतान के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी फूंक फूंक कर कदम

रखना पड़ रहा है। झामुमो की यह मजबूरी है कि राजनीतिक आने वाले कल को कौन सी

करवट लेगी, इसे भांपना मुश्किल है। लिहाजा पार्टी के दूसरे नेता अभी आनन फानन में

किसी दूसरी पार्टी के खिलाफ आक्रामक होने से बच रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के

दिल्ली दौरा को कैबिनेट के विस्तार और बोर्ड निगम में पदाधिकारियों के चयन से जोड़कर

देखा जा रहा है। लेकिन कांग्रेस के अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि फुरकान अंसारी की फूंक

से जो आग लगी है, उसे बूझाने में भी कांग्रेस के एक गुट को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़

रहा है। वैसे यह तय नहीं है कि इतनी कोशिशों के बाद भी कांग्रेस का यह खेमा अपनी पूंजी

बचा पायेगा अथवा नहीं।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from रांचीMore posts in रांची »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

One Comment

... ... ...
%d bloggers like this: