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लॉंचिंग पर मुकेश अंबानी ने ह्यह्यडेटा इज न्यू आयलह्णह्ण का नारा दिया

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लॉंचिंग पर मुकेश अंबानी ने ह्यह्यडेटा इज न्यू आयलह्णह्ण का नारा दिया और इस सेक्टर

की तस्वीर ही बदल गई। अक्टूबर से दिसंबर 2016 की ट्राई की परफॉरमेंस इंडीकेटर रिपोर्ट के

आंकड़े बताते हैं कि प्रति यूजर डेटा की खपत मात्र 878.63 एमबी थी। सितंबर 2016 में जियो

लॉन्च के बाद डेटा खपत में जबर्दस्त विस्फोट हुआ और अब डेटा की खपत 1303 प्रतिशत

बढ़कर 12.33 जीबी हो गई। पांच साल पहले जब उद्योगपति मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो

के लॉन्च की घोषणा की तो किसी को भी गुमान नहीं था कि जियो, देश की डिजिटल

अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगा। भारत में इंटरनेट की शुरूआत हुए 26 वर्ष बीत गए हैं। कई

टेलीकॉम कंपनियों ने इस सेक्टर में हाथ अजमाया, पर कमोबेश सभी कंपनियों का फोकस

वॉयस कॉंलग पर ही था। जियो के मार्केट में उतरने के बाद केवल डेटा की खपत ही नही बढ़ी

डेटा यूजर्स की संख्या में भी भारी इजाफा देखने को मिला। ट्राई की ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर रिपोर्ट

के मुताबिक पांच साल पहले के मुकाबले ब्रॉडबैंड ग्राहकों की तादाद चार गुना बढ़ चुकी है। जहां

सितंबर 2016 में 19.23 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहक थे वहीं जून 2021 में यह 79.27 करोड़ हो गए

हैं। विशेषज्ञों का मानना हैं कि डेटा की खपत में बढ़ोतरी और इंटरनेट यूजर्स की तादाद में भारी

इजाफे की वजह डेटा की कीमतों में हुई कमी है।

 लॉंचिंग पर  दरअसल जियो की लॉंंचग से पूर्व तक डेटा की कीमत करीब 160 रुपए

लॉंचिंग पर  दरअसल जियो की लॉंंचग से पूर्व तक डेटा की कीमत करीब 160 रुपए प्रति जीबी

थी जो 2021 में घटकर 10 रुपए प्रति जीबी से भी नीचे आ गईं। यानी पिछले पांच वर्षों में देश

में डेटा की कीमतें 93 प्रतिशत कम हुई। डेटा की कम हुई कीमतों के कारण ही आज देश

दुनिया में सबसे किफायती इंटरनेट उपलब्ध कराने वाले देशों की सूची में शामिल है। डेटा की

कीमतें कम हुई तो डेटा खपत बढ़ी। डेटा खपत बढ़ी तो डेटा की पीठ पर सवार काम धंधों के

पंख निकल आए। आज देश में 53 यूनीकॉर्न कंपनियां हैं जो जियो की डेटा क्रांति से पहले तक

10 हुआ करती थी। ई-कॉमर्स, आनलाइन् आर्डर प्लेसमेंट, आनलाइन एंटरटेनमेंट,

आनलाइन क्लासेस जैसे शब्दों से भारत का अमीर तबका ही परिचित था। आज रेलवे बुकिंग

खिलड़कियों पर लाइने नहीं लगती। खाना आर्डर करने के लिए फोन पर इंतजार नही करना

पड़ता। किस सिनेमा हॉल में कितनी सीटें किस रो में खाली हैं बस एक क्लिक में पता चल

जाता है। यहां तक कि घर की रसोई की खरीददारी भी आनलाइन माल देख परख कर और

डिस्काउंट पर खरीदा जा रहा है। आनलाइन धंधे चल निकले तो उनकी डिलिवरी के लिए भी

एक पूरा जाल खड़ा करना पड़ा। मोटरसाइकिल पर किसी खास कंपनी का समान डिलिवर

करने वाले कर्मचारी का सड़क पर दिखाई देना अब बेहद आम बात है।



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