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पृथ्वी के विकल्प जैसा ग्रह मिला खगोल वैज्ञानिकों को

  • धरती से करीब तीन सौ प्रकाश वर्ष दूर

  • रोशनी और तापमान लगभग एक जैसा

  • पत्थरों पर पानी भी एकत्रित हो सकता है

  • इस ग्रह में की तरह पथरीली होने का अनुमान

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी के विकल्प तलाशने का काम तो काफी समय से चल रहा है। इस प्रयास

में अब सफलता मिलती नजर आ रही है। एक ऐसा ग्रह नजर आया है, जिसके पृथ्वी के

जैसा ही होने का अनुमान लगाया जा रहा है। नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप ने इसे

पकड़ है। इसकी संरचना को देखकर प्रारंभिक अनुमान यही है कि इसकी पथरीली सतह

पानी को रोक सकती है। वैसे जिस स्थान पर यह ग्रह है, वह पृथ्वी से करीब तीन सौ प्रकाश

वर्ष की दूरी पर है। काफी दूरी पर होने के बाद भी इस ग्रह की संरचना को समझकर

वैज्ञानिक उत्साहित हुए हैं। दरअसल पृथ्वी का विकल्प तलाशने का काम काफी पहले से

ही प्रारंभ किया गया था। इस काम की शुरुआत वैज्ञानिकों ने इस सोच के साथ की थी कि

पृथ्वी पर प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होने की स्थिति में जीवन को अन्यत्र स्थानांतरित

किया जा सके। इस दिशा में अत्यंत तेज गति के अंतरिक्ष वाहन विकसित करने का भी

काम चल रहा है ताकि हम सूर्य से आगे के इलाकों तक भी बहुत कम समय में पहुंच सकें।

इस विधि के कारगर होने पर ही हम उन इलाकों तक पहुंचने की सोच सकते हैं जो पृथ्वी से

प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं।

केपलर 1649 सी है इस ग्रह का नाम

जिस ग्रह को इस टेलीस्कोप से देखा गया है, वह खोजे जाने के बाद अब केपलर 1649 सी

के नाम से जाना जाएगा। वैसे इस ग्रह पर वैज्ञानिकों की नजर तो पहले ही पड़ गयी थी

लेकिन इन तमाम आंकड़ों का अब अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से नये सिरे से

विश्लेषण किया जा रहा है। इससे पहले इस ग्रह की गणना में कुछ गड़बड़ी हो गयी थी,

इसलिए उसके बारे में पहले अधिक शोध नहीं हो पाया था। अब नये सिरे से हुई जांच की

उपलब्धियों के बारे में एक वैज्ञानिक पत्रिका में जानकारी दी गयी है। केपलर ने उस क्षेत्र के

अनेक ग्रहों की पहचान की थी। अब दोबारा विश्लेषण होने के बाद इस ग्रह को लगभग

पृथ्वी के जैसा ही समझा गया है। इस एक ग्रह के बारे में पहले हुई गणना की गलती पकड़

में आने के बाद उस इलाके के अन्य ग्रहों के आंकड़ों का भी नये सिरे से विश्लेषण किया जा

रहा है ।

पृथ्वी के विकल्प ग्रह आकार में पृथ्वी से 0.6 फीसद बढ़ा

इसे अपने आस पास के इलाकों में मौजूद तारों से रोशनी मिलती है। अनुमान है कि पृथ्वी

को सूर्य से जितनी रोशनी मिली है, इस ग्रह पर उसकी 75 प्रतिशत तक रोशनी मिलती है।

इस वजह से यह भी स्पष्ट है कि इसका तापमान भी पृथ्वी के जितनी ही होगा। पृथ्वी और

इस ग्रह में एक बड़ा अंतर यह है कि पृथ्वी एक जीवंत तारा यानी सूर्य की परिक्रमा कर रहा

है। दूसरी तरफ पृथ्वी का विकल्प समझा गया ग्रह एक मृत तारे के चारों तरफ चक्कर

लगा रहा है। इस किस्म के लाल रंग के मृत तारों के साथ एक खतरा यह भी होता है कि

यह कभी भी जलने लगते हैं और उसकी लपटें आस पास के इलाकों के जीवन को समाप्त

कर सकती हैं। लेकिन प्रारंभिक दौर में ही वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला है है कि उस ग्रह

का एक साल पृथ्व के 19.5 दिन के बराबर ही होता है।

यहां का एक साल पृथ्वी के 19 दिन जितना

पृथ्वी का विकल्प तलाशने के अनुसंधान से जुड़े नासा के साइंस मिशन के निदेशक थॉमस

जुर्बुचेन ने कहा कि पृथ्वी का विकल्प बनने लायक कोई इलाका इस सौर मंडल में है, यह

जानना भी प्रसन्नता की बात है। केपलर से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के साथ साथ इन

तमाम तारों को टेस्स सैटेलाइट के आंकड़ों से भी मिलाया जा रहा है। ताकि कोई सर्वमान्य

निष्कर्ष निकाला जा के। इस वजह से केपलर 1694 सी पर और नजर रखी जा रही है।

इसका मकसद उसके बारे में और अधिक जानकारी हासिल करना ही है। वैसे वैज्ञानिकों ने

यह साफ कर दिया है कि यह सारे प्रारंभिक निष्कर्ष ही हैं और इस पर अभी और शोध के

बाद ही कोई ठोस नतीजा निकलकर सामने आ पायेगा। लेकिन वहां जीवन के पनपने

लायक स्थिति होने की जानकारी मिलने के साथ साथ वहां जीवन है अथवा नहीं इसकी भी

जांच प्रारंभ हो चुकी है। इसके अलावा भी ट्रापिस्ट 1 एफ और टीगार्डेन सी जैसे ग्रह भी पाये

गये हैं, जो पृथ्वी से केपलर 1649 सी के मुकाबले नजदीक हैं। इन सभी में पृथ्वी का

विकल्प बनने की कितनी संभावना है, इसकी भी जांच एक साथ चल रही है।


 

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