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उल्कापिंड बेन्नू पर उतरकर अनुसंधान करने का काम पूरा कर लिया यान ने

  • ओसिरिक्स रेक्स अब पृथ्वी की तरफ वापस लौटने लगा है

  • धरती तक की वापसी में 18 करोड़ मील का सफर तय करेगा

  • हर दिन चार से छह घंटे भेजता है अपने सारे आंकड़े

  • 24 सितंबर 2023 धरती पर लौट आयेगा यान

राष्ट्रीय खबर

रांचीः उल्कापिंड बेन्नू तक की सफर करने वाला नासा का अंतरिक्ष यान अब वापस लौटने

लगा है। नासा के इस यान ओसिरिक्स रेक्स को अब वापसी में 18 करोड़ मील की दूरी तय

करना है। सात अप्रैल को अपना अंतिम अनुसंधान पूरा करने के बाद यह यान अपनी

वापसी की यात्रा प्रारंभ कर चुका है। वह अपने साथ इस उल्कापिंड बेन्नू की मिट्टी के नमूने

भी लेकर आ रहा है।

नासा के इस वीडियो में समझ लीजिए पूरी बात को

इस यान की वापसी प्रारंभ होने के बाद भी नासा के वैज्ञानिक इस उल्कापिंड पर ध्यान

लगाये हुए हैं। उनका मकसद यह देखना है कि कहीं नमूना खरोंचने की वजह से उल्कापिंड

बेन्नू की स्थिति में कोई बदलाव तो नहीं हुआ है। वैसे ओसिरिक्स रेक्स धीरे धीरे अपनी

तय कक्षा से धीरे धीरे उल्कापिंड से दूर हट रहा है। पृथ्वी तक लौटने में उसे 18 करोड़ मील

की दूरी तय करना है। दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी रहने के बीच ही इस

अंतरिक्ष यान ने 20 अक्टूबर 2020 को उल्कापिंड प उतरन के बाद अपने प्रयोग किये थे।

इस दौरान कोरोना महामारी की वजह से नासा के नियंत्रण कक्ष का काम भी कई बार

प्रभावित हुआ था। लेकिन इस अंतरिक्ष यान में यह सुविधा पहले से ही विद्यमान है कि

वह अपने सारे आंकड़े थोड़े थोड़े समय के अंतराल के बाद नियंत्रण कक्ष को भेजता रहता

है। वहां से जो मिट्टी के नमूने इस अंतरिक्ष यान से लाये जा रहे हैं, उसके अध्ययन से

उल्कापिंडों की संरचना के साथ साथ सौरमंडल के विकास के बारे में भी जानकारी मिलने

की उम्मीद वैज्ञानिकों को है। इस शोध से जुड़े एरिजोना विश्वविद्यालय के ओसिरिक्स

रेक्स अध्ययन दल के नेता डॉ दांते लाउरेटा ने कहा कि आंख के सामने होने के बाद उसकी

संरचना के बारे में और बेहतर जानकारी मिल पायेगी।

उल्कापिंड बेन्नू की अनेक तस्वीरें ली हैं और नमूना जुटाया

इस बीच यह भी बताया गया है कि इस अंतरिक्ष यान ने उल्कापिंड बेन्नू की सतह से करीब

साढ़े तीन किलोमीटर की ऊंचाई से उड़ान भरते हुए अनेक तस्वीरें ली है। लेकिन यह सारा

आंकड़ा नासा को नियंत्रण कक्ष तक पहुंचने में वक्त लगेगा। उम्मीद है कि आगामी 13

अप्रैल तक यह सारा आंकड़ा वह यान डाउनलोड कर देगा। यान को इस अभियान पर

रवाना करने के पहले ही यह इंतजाम किया गया था कि जब कभी भी यान के साथ

नियंत्रण कक्ष का संपर्क बेहतर हो, वह अपने आंकड़े भेजता रहता है। किसी कारण से जब

वह यह आंकड़े नहीं भेजता तो उन्हें अगली बार भेजने के लिए अपने पास सुरक्षित रख

लेता है। हर दिन आंकड़ा डाउनलोड करने के लिए चार से छह घंटे का समय मिलता है।

अब तक इस यान से उल्कापिंड बेन्नू के बारे में करीब चार हजार मेगावाइट आंकड़े प्राप्त

हो चुके हैं। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर माइक मारियू ने

कहा कि यह आंकड़े मेरीलैंड के ग्रीनबेल्ट केंद्र तक पहुंच रहे हैं।

24 सितंबर 2023 को धरती पर लौट आयेगा

अभी जो स्थिति है उससे प्रति सेकंड सिर्फ 412 किलोबाइट डाटा ही डाउनलोड हो पाता है।

लिहाजा सारा आंकड़ा प्राप्त करने के लिए कई दिनों का समय लगना तय है। उल्कापिंड

बेन्नू की तरफ रवाना होते वक्त से ही यह यान नियमित तौर पर अपनी नजरों में आने

वाले सारे घटनाक्रमों से नियंत्रण कक्ष को अवगत कराता रहता है। यह बता दें कि जब

उल्कापिंड पर यह यान उतरा था तो उसने अपने करीब डेढ़ फीट लंबे नाखुन से उसकी

सतह को खरोंचा था। इसके अलावा उस यान ने उल्कापिंड पर तेज नाइट्रोजन गैस की

बौछार भी की थी। इसी वजह से उल्कापिंड का ढेर सारे नमूना इस यान में एकत्रित हुआ है।

अभी उल्कापिंड के बाहरी इलाके में चक्कर लगाते हुए यह उल्कापिंड की परिस्थितियों पर

गौर कर रहा है। उसके बाद आगामी 10 मई को वह पृथ्वी के लिए चल पड़ेगा। उसमें

वापसी के लिए लगे थ्रस्टर रॉकेट फिर से सक्रिय किये जाएंगे। एक बार वहां से चलने के

बाद उसे पृथ्वी तक वापस आने में दो साल का समय लगेगा। वैज्ञानिकों का आकलन है

कि यह 24 सितंबर 2023 को धरती पर लौट आयेगा।

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