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खगोल वैज्ञानिकों को नजर आयी हमारे सौर मंडल की अजीब घटना







  • ब्लैक होल के करीब अचानक से चमकती है रोशनी
  • इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने नये 30 सौर मंडल खोजे
  • बीस वर्षों में पहली बार नजर आयी घटना
  • तेज रोशनी इंफ्रा रेड किरणें थीं
प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः खगोल वैज्ञानिकों को इस नई घटना ने हैरान कर दिया है।

दरअसल यह घटना हमारे ही सौर मंडल की है।

हमारे सौर मंडल के बीच में स्थित ब्लैक होल के पास से तेज रोशनी निकल रही है।

आम तौर पर ब्लैक होल की संरचना और उसके क्रियाकलापों को जानने की वजह से ही

खगोल वैज्ञानिकों को नजर आने वाली यह घटना अजीब नजर आ रही है।

ब्लैक होल के बारे में यह प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य है कि यह अपने प्रचंड गुरुत्वाकर्षण की वजह से नजदीक आने वाले हर कुछ को अपने अंदर सोख लेता है।

पहले इसके बारे में धारण थी कि यह अंदर की तरफ गहरा एक काला ऐसा धब्बा है,

जिसके अंदर से रोशनी भी वापस नहीं आती है।

बाद में पता चला कि यह दरअसल अंदर की तरफ गड्डावाला नहीं बल्कि चपटे आकार का तश्तरीनूमा है।


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इस बार अंतरिक्ष पर नजर रखने के दौरान वहां से रोशनी निकलते देखकर वैज्ञानिक हैरान हुए हैं।

इसकी खास वजह यह है कि ब्लैक होल के पास से रोशनी का निकलना पहले के प्रमाणित सिद्धांतों के खिलाफ है।

खगोल विज्ञान में इसी ब्लैक होल को अब तक का सबसे अनसुलझा मसला माना जाता है।

अब पहली बार जब इससे रोशनी निकली तो वैज्ञानिकों ने इसका पूर्ण विश्लेषण भी किया है।

यह बताया गया है कि यह इंफ्रा रेड किरणों की बौछार थी।

जो अनुसंधान कर्ता इसके लिए काम कर रहे हैं वे पिछले बीस वर्षों से लगातार इसका अध्ययन करते आ रहे हैं।

इन बीस वर्षों में इससे पहले कभी भी ऐसा होता हुआ नहीं देखा गया था।

इस बारे में शोध दल से जुड़े वैज्ञानिक टुआन डो ने कहा है कि उनलोगों ने इसे घटित होते हुए देखा है।

लेकिन इसके कारणों की व्याख्या कर पाना अभी संभव नहीं है।

खगोल वैज्ञानिकों को आकाश में झांकने की नई तकनीक मिली 




उल्लेखनीय है कि हाल ही में खगोल वैज्ञानिकों ने हब्बल टेलीस्कोप की मदद से

एक और ब्लैक होल सैजेटेरियस ए स्टार को देखा था।

यह आकार में सूर्य से करीब चालीस लाख गुणा बड़ा आंका गया है।

अब पृथ्वी के अपने मध्य स्थित ब्लैक होल की इस घटना से वैज्ञानिक हैरान हो गये हैं।

दूसरी तरफ अंतरिक्ष को समझने की दिशा में चल रहे अनुसंधान के बीच

काफी दूर पर 39 नये सौर जगतों का भी वैज्ञानिकों ने पता लगाया है।

दरअसल ब्लैक होल का पता लगाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था,

उसी तरकीब से अब अनुसंधान कर्ता सुदूर महाकाश में बेहतर तरीके से झांक पा रहे हैं।

अलग अलग टेलीस्कोप से एक ही स्थान पर अनुसंधान करने की वजह से इन्हें देख पाना वैज्ञानिकों के लिए संभव हो पाया है।

यह सारे इतनी दूरी पर हैं कि तारों की रोशनी के बीच शक्तिशाली दूरबीन भी उन्हें आसानी से देख नहीं पाता है।

छोटे से छोटे तरंग को पकड़ सकता है आल्मा टेलीस्कोप




दरअसल आल्मा टेलीस्कोप के अत्याधुनिक उपकरणों की वदौलत छोटे से छोटे तरंग को भी

दर्ज कर पाना अब संभव हो गया है।

इसी वजह से तारों के बीच से झांकते हुए भी इन नये सौर मंडलों की पहचान हो पा रही है।

इस नई खोज से यह भी माना जा रहा है कि दरअसल इस ब्रह्मांड के आकार के बारे में

जो कल्पना की गयी है, वह ब्रह्मांड शायद उस अनुमान से भी काफी बड़ा है।

इनमें से अनेक के बीच में ब्लैक होल एक अथवा एक से अधिक विद्यमान हैं।

पहले भी यह देखा गया था कि लगातार तारों को निगलने के बाद कई बार ब्लैक होल नये तारों को उगल भी देते हैं।

इससे कई अवसरों पर नये सौर मंडल के निर्माण का अनुमान भी लगाया गया है।

लेकिन ऐसा पहली बार हो रही है कि पृथ्वी के सौर मंडल के बीच स्थित ब्लैक होल से

तेज इंफ्रा रेड किरणें बाहर निकल रही हैं।

अब इसकी पुष्टि होने के बाद वैज्ञानिक इसके कारणों को समझने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि इसका संबंध शायद उस डार्क मैटर से हो,

जिसके बारे में पता होने के बाद भी उसे अब तक सही तरीके से न तो देखा गया है

और न ही उसे परिभाषित किया जा सका है।


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