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महिला के बिस्तर पर गिरा उल्कापिंड बाल बाल मची




कुत्ता भौंकने से जाग कर उठी बैठी थी
छत तोड़कर नीचे आ गिरा काला पत्थर
बाद में पता चला कि यह उल्कापिंड है
लोगों ने तेज रोशनी देखी और विस्फोट सुना

ब्रिटिश कोलंबियाः महिला के बिस्तर पर आसमान से गिरा था उल्कापिंड। इस महिला का नाम रूथ हैमिलटन है। वह खुद को सौभाग्यशाली मानती है। दरअसल रात को सोने के बाद अचानक करीब रात साढ़े ग्यारह बजे अपने कुत्ता के भौंकने की आवाज से वह जाग गयी थी।




जाग जाने के बाद वह बिस्तर पर उठ कर बैठी थी। इसी बीच बहुत देर शोर के साथ कोई चीज उनके बिस्तर पर सर के पास ही आ गिरी। यानी अगर वह नींद में सोयी होती तो यह तेज गति से आने वाला पत्थर उनके सर पर भी गिर सकता था।

वैसे महिला को इस पत्थर के गिरने और बहुत तेज शोर होने का कोई रिश्ता समझ में नहीं आया था। 66 वर्षीया रूथ बताती हैं कि उन्हें खुद पता नहीं चला था कि हुआ क्या है। लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने आपात सेवा को फोन किया।

वहां से जब एक टीम आयी और पूरा मुआयना किया तब जाकर भेद खुला कि उनके बिस्तर पर एक छोटे आकार का उल्कापिंड आ गिरा है। आपात सेवा का नंबर 911 डायल करने के बीच वह सोच रही थी कि आखिर हुआ क्या है।

उनकी सोच थी कि किसी वजह से पास का कोई पेड़ उनकी छत पर आ गिरा है, उसी वजह से छत पर यह छेद हो गया है। लेकिन इसके बीच ही उन्हें बिस्तर पर पड़ा काले रंग का पत्थर भी नजर आ गया था। जो वजन में 2.8 पौंड का है।

उनके मुताबिक यह पत्थर जब गिरा तो उन्हें कुछ समझ में नहीं आया था लेकिन बाद में महसूस हुआ कि दीवार और छत के छोटे कण उनके अपने चेहरे पर हैं। इसके अलावा उन्हें कुछ भी नहीं हुआ था। वह सकुशल और पूरे होशोहवास में थीं।

महिला के बिस्तर पर छत तोड़कर गिरा

दूसरी तरफ आसमान की गतिविधियों पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के अलावा आम लोगों ने भी आसमान पर एक तेज रोशनी को जाते देखा था। इस रोशनी को देखकर भी वैज्ञानिक समझ गये थे कि उल्कापिंड का कोई छोटा टुकड़ा धरती पर आ रहा है।

लेकिन वैज्ञानिक यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर यह कहां गिरने वाला है। रूथ के आस पास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरा में भी यह तेज रोशनी कैद हुई थी जबकि लोगों ने उल्कापिंड गिरने के दौरान हुए शोर को भी अपनी कानों से सुना था।




लेकिन आस पास के लोग भी यह नहीं समझ पाये थे कि यह दरअसल उल्कापिंड गिरने की घटना है। कनाडा की इस महिला के बिल्कुल बिस्तर के ऊपर गिरे इस उल्कापिंड के टकराने से रूथ गंभीर रुप से घायल भी हो सकती थी क्योंकि उसके गिरने की गति बहुत तेज थी।

अपने बिस्तर पर पड़े इस पत्थर को देखकर भी वह नहीं समझ पायी थी कि दरअसल यह क्या है। वहां सबसे पहले पहुंचने वाली पुलिस टीम ने भी पत्थर देखकर पास के एक निर्माण कार्य स्थल के लोगों से बात कर यह समझने की कोशिश की कि कहीं उनके द्वारा किये गये विस्फोट की वजह से कोई पत्थर तो नहीं आ गिरा है।

वहां से ऐसे किसी विस्फोट से इंकार किये जाने के बाद वहां के कर्मचारियों ने ही पहली बार पुलिस को बताया कि उनलोगों ने आसमान से एक तेज रोशनी को नीचे उतरते देखा था। जिसके बाद विस्फोट की आवाज सुनायी पड़ी थी।

दूसरों ने रोशनी और विस्फोट के आवाज की जानकारी दी

इस सूचना के बाद पुलिस ने वैज्ञानिकों से संपर्क साधा तो वहां जांच करने वाली टीम पहुंची। इस पत्थर की जांच कर लेने के बाद वेस्टर्न ओंटारियो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया कि दरअसल यह पत्थर एक उल्कापिंड ही है।

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते वक्त इसका आकार बड़ा रहा होगा। वायुमंडल के घर्षण से जब इसमें आग लगी तो उसका अधिकांश हिस्सा हवा में ही जलकर राख हो गया था।

अत्यंत तेज गति से नीचे गिरने के बाद भी यह टुकड़ा जलने से बच गया और रूथ के मकान की छत को तोड़ते हुए उनके बिस्तर पर आ गिरा। रूथ उस घटना को याद कर बताती हैं कि उन्हें तो लगा कि उनके घर में कोई घुस आया है और बाहर से गोली दाग रहा है।

बाद में सिर्फ पत्थर पाने और पुलिस के तुरंत आ जाने की वजह से वह राहत महसूस कर रही थी। अब जब पता चला है कि यह दरअसल एक उल्कापिंड है तो उन्हें अजीब सा महसूस हो रहा है। वह मजाक में कहती हैं कि उनकी तीसरी पीढ़ी की बच्चियां अब यह कह सकती हैं कि उनकी दादी एक उल्कापिंड के गिरने से मरते मरते बच गयी हैं।



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