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उल्कापिंड बेन्नू पर सफलतापूर्वक उतर गया अंतरिक्ष यान ओसिरिज रेक्स

  • ठीक ठाक उतरने के बाद फायरिंग भी की है

  • वहां की मिट्टी के नमूने लेकर वापस आ रहा है

  • 2023 तक पृथ्वी पर लौट आयेगा यह अंतरिक्ष यान

  • उल्कापिंड पर सौरमंडल की रचना के संकेत तलाशता विज्ञान

राष्ट्रीय खबर

रांचीः उल्कापिंड बेन्नू पर सफलतापूर्वक उतरने केबाद अंतरिक्ष यान ओसिरिज रेक्स

अपने काम में जुटा हुआ है। भले ही इस अंतरिक्ष अभियान पर अधिक चर्चा नहीं हुई हो

लेकिन अब उसका महत्व अधिक आंका जाने लगा है। नासा के निजी अंतरिक्ष रॉकेट सेवा

स्पेस एक्स अथवा भारत के चंद्रयान 2 के मुकाबले इसकी चर्चा निश्चित तौर पर बहुत

कम हुई है। लेकिन अब यह चुपचाप अपने लक्ष्य पर पहुंच गया है। पृथ्वी से करीब 330

मिलियन किलोमीटर की दूरी पर तेज गति से चलते उल्कापिंड पर इस यान को उतारना

भी एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। प्रारंभिक तौर पर यह पहले से ही घोषित है कि

उल्कापिंड के नमूनों का संग्रह कर लाना इस यान की बड़ी जिम्मेदारी है। इन नमूनों की

जांच से वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि आखिर हमारे सौर जगत की सृष्टि कैसे हुई

थी। वैसे इस यान तो कुछ इस तरीके से डिजाइन भी किया गया है कि यह अंतरिक्ष से

किसी बाहरी इलाके से सबसे अधिक नमूना लेकर लौटने वाला पहला यान होगा। इसके

पहले चंद्रमा मिशन पर अपोलो यान भी चांद की मिट्टी अपने साथ ले आये थे।

उल्कापिंड बेन्नू पर इस यान ने गोली चलायी और नमूना लिया

बीते कल बिना किसी शोर शराबे के यह अंतरिक्ष यान उल्कापिंड बेन्नू पर सफलतापूर्वक

उतर गया है। उसे अपना काम पहले ही निर्देशित कर दिया गया था। इसके तहत उसने

उल्कापिंड की सतह पर एक गोली भी दागी है। इस गोली चालन से वहां की सतह के जो

टुकड़े इधर उधर बिखरे हैं, उन्हें वह एकत्रित कर अपने साथ ले आने वाला है। वैसे बता दूं

कि रिपोर्ट लिखे जाने तक यह अंतरिक्ष यान अपना काम पूरा कर वापस लौट चला है। उसे

किस रास्ते से पृथ्वी तक लौटना है, यह भी पहले से ही तय है। इसके बीच इस यान में जो

कुछ आंकड़े दर्ज किये गये हैं, उन्हें पृथ्वी तक भेजने का काम जारी है। बीच बीच में अपनी

कक्षा की वजह से यह यान आंकड़ा भेजने का काम रोक देता है। समझा जाता है कि सारा

आंकड़ा पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष तक आने के बाद उनके विश्लेषण का काम भी जारी हो

जाएगा। यानी जब तक यह यान धरती पर वापस लौटेगा, तब तक उसके माध्यम से

हासिल किये गये अनेक आंकड़ों का विश्लेषण यहां के वैज्ञानिक पूरा कर चुके होंगे। वैसे

इन आंकड़ों का विश्लेषण कर लेने के बाद भी वैज्ञानिक काफी उत्साह के साथ यान के

वापस लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि इस यान में लगे अन्य उपकरण और

अत्याधुनिक कैमरों में क्या कुछ दर्ज हुआ है, उसे देखने में लोगों की रूचि है।

अब इस अंतरिक्ष अभियान का महत्व और बढ़ गया है

यह सवाल पहले ही उठा था कि आखिर इसी उल्कापिंड पर यान क्यों भेजा गया था। इसके

बारे में भी पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि अंतरिक्ष के लिहाज से यही उल्कापिंड

पृथ्वी के काफी करीब है और समझा जाता है कि इसकी उत्पत्ति भी सौर जगत के निर्माण

के पहले दस मिलियन वर्षो के अंदर ही हुई है। इसलिए उसकी सतह पर इस सौर मंडल की

रचना और परिवर्तन के अनेक सबूत उपलब्ध हो सकेत हैं। इसकी सतह पर वे वैज्ञानिक

निशान हो सकते हैं, जो पृथ्वी के बनने के समकालीन ही होंगे। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों

ने यह स्पष्ट किया है कि इस उल्कापिंड यानी बेन्नू को उस टाईम कैप्सूल की तरह समझा

जाना चाहिए, जिसके अंदर प्राचीन सौर जगत की सृष्टि के साक्ष्य रखे हुए हैं।

नासा के वीडियो में देखिये कैसे उतरा यह यान

ओसिरिज रेक्स के कोलाराडो स्थित नियंत्रण कक्ष के मुताबिक यान के उस पर उतरने

और सारा काम करने का पूरा कार्यक्रम पूर्व निर्धारित निर्देशों के मुताबिक ही हुआ है। वहां

से अपनी वापसी की यात्रा प्रारंभ कर चुका यह यान वर्ष 2023 में पृथ्वी पर वापस लौटने

वाला है। इसके अंदर उल्कापिंड के साठ ग्राम का सतह का अंश है। वैज्ञानिकों को यह

उम्मीद है कि इस नमूने के विश्लेषण के जरिए वे सौर मंडल की रचना के बारे में नया

काफी कुछ जान पायेंगे। इससे पहले भी जब अपोलो यान के माध्यम से चंद्रमा की मिट्टी

यहां लायी गयी थी तो उसका अध्ययन और विश्लेषण तब से लेकर आज तक चल रहा है।


 

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