असम का माहौल अब भी गरम डॉ धीरेन पर राजद्रोह का मामला दर्ज

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  • असम विधानसभा का बजट सत्र 28 से प्रारंभ होगा

  • तीन मंत्रियों के त्यागपत्र की प्रतीक्षा में मुख्यमंत्री

सव्यसाची शर्मा

गुवाहाटीः असम विधानसभा का बजट सत्र भी हंगामेदार होने के पूरे आसार बने हुए हैं।

नागरिकता बिल पर राज्य में बने माहौल के बीच अभी मुख्यमंत्री को

असम गण परिषद के तीन मंत्रियों के त्यागपत्र की प्रतीक्षा है।

राजग गठबंधन से बाहर आने की घोषणा असम गण परिषद पहले ही कर चुका है।

28 से प्रारंभ होने वाले इस बजट सत्र के आगामी 26 फरवरी तक चलने की उम्मीद है।

जाहिर है कि असम गण परिषद के सरकार से हट जाने के बाद की परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न होंगी।

इस वजह से भी राजनीति के जानकार इस बजट सत्र के घटनाक्रमों को लेकर अपना अपना अंदाजा लगा रहे हैं।

इस बार बजट सत्र का समय थोड़ी कम किया गया है।

राज्य के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा बजट पेश करने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

उम्मीद है कि वह 6 फरवरी को बजट पेश करेंगे।

समझा जाता है कि राज्य मंत्रिमंडल में शामिल अगप के तीन मंत्रियों के अलावा

अन्य बोर्डों और निगमों में शामिल असम गण परिषद के अन्य नेता भी पद छोड़ने वाले हैं।

इनलोगों ने अभी से ही तमाम सरकारी सुविधाओं को त्याग दिया है।

खबर है कि तीनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है।

समय तय होते ही शिष्टाचार भेंट में इस्तीफा भी सौंप दिया जाएगा।

असम में राजद्रोह के मामले पर भी हुआ जोरदार विरोध

दूसरी तरफ नागरिकता बिल पर जारी आंदोलन के बीच नया बवाल

राज्य के प्रमुख बुद्धिजीवी डॉ हीरेन गोहाई के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किये जाने का है।

दूसरी तरफ उल्फा के सुप्रीम कमांडर परेश बरूआ ने भी इस मामला के दायर होने का विरोध करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

इससे माहौल और गरमा गया है।

परेश बरुआ ने चेतावनी दी है कि अगर बुद्धिजीवियों के खिलाफ सरकार के ऐसे रवैये में बदलाव नहीं आया

तो इसके खतरनाक परिणाम के लिए भी सरकार को तैयार रहना चाहिए।

लताशील थाना में दर्ज हुआ है राजद्रोह का यह मामला

पुलिस की त रफ से लताशील थाना में डॉ गोहाई पर राजद्रोह का यह मामला दायर किया गया है।

उनके खिलाफ आरोप है कि एक समारोह में उन्होंने आजाद असम की बात कही है।

इस समारोह में मौजूद कृषक मुक्ति संग्राम समिति के अखिल गोगोई एवं एक अन्य बुद्धिजीवी मनजीत महंत के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

मामला दायर होने के बाद अनेक संगठनों ने इसके लिए राज्य सरकार की आलोचना की है।

राज्य के अनेक इलाकों में नागरिकता बिल के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।

अधिकांश इलाकों में छात्र संगठन ही इसका विरोध कर रहे हैं।

अनेक कॉलेजों में इसी वजह से पढ़ाई बंद है क्योंकि छात्र सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

वैसे राज्यसभा में यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किये जाने के बाद

यहां के कटन कॉलेज के छात्रों ने अपना प्रस्तावित आमरण अनशन का कार्यक्रम भी वापस ले लिया है।

दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई के

उस बयान की निंदा की गयी है, जिसमें उन्होंन कहा है कि

इस बिल के लागू होने के बाद बांग्लादेश से लाखों लोग यहां घुस आयेंगे।

भाजपा का आरोप है कि दरअसल अखिल गोगोई बांग्लादेशी समर्थक हैं

और वह पूरे मामले में अफवाह फैलाने का काम कर रहे हैं।

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