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असम की 49 लाख बीघा जमीन पर अवैध कब्जा




पाकिस्तान के आरोप पर भारत ने पलटवार किया
भारत ने कहा पाकिस्तान को कहने का अधिकार नहीं
मौलाना मदनी ने सीएम और गृह मंत्री शाह को पत्र लिखा
अदालत को स्वत: संज्ञान लेने की आवश्यकता है : कपिल सिब्बल
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम की 49 लाख बीघा मतलब 6,652 वर्ग किमी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। यह आंकड़े 2017 में तत्कालीन कनिष्ठ राजस्व मंत्री पल्लब लोचन दास ने विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में दिए थे।




असम की जितने जमीन पर कब्जा हो चुका है, उतना क्षेत्रफल गोवा के कुल क्षेत्रफल का लगभग दोगुना है और सिक्किम के क्षेत्रफल से थोड़ा ही कम है। अतिक्रमण किए गए कुल क्षेत्रफल में 3,172 वर्ग किमी वन भूमि शामिल है।

वैष्णव क्षत्रपों और प्राचीन मंदिरों से संबंधित भूमि के बड़े हिस्से भी हैं जिन पर अतिक्रमण किया गया है। दरांग जिले में गुरुवार को झड़प हुई। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में दो नागरिक मारे गए।

यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस 7000 बीघा (केवल 9 वर्ग किमी) से अधिक सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारियों को हटाने की कोशिश कर रही थी। इससे पहले सोमवार को पुलिस ने आसपास की करीब 4000 बीघा जमीन बिना किसी घटना के खाली करा ली थी।

अतिक्रमणकारियों से असम की जमीन मुक्त कराना भी भाजपा के 2021 के चुनावी वादे में शामिल था। पिछली भाजपा सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से और 15वीं-16वीं सदी के एक पोलीमैथ श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान बटाद्रबा थान की भूमि से अवैध लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया था।

ज्यादातर बांग्लादेश मूल के बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों ने सरकारी और धार्मिक स्थानों से संबंधित जमीन पर कब्जा कर रखा है।

इन लोगों को असम के लोगों की पहचान के खतरे के रूप में देखा जाता है। 2016 में, सरकार ने स्वदेशी लोगों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनों और नीति में संशोधन का सुझाव देने के लिए एक पैनल का गठन किया था। यह पैनल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा की अध्यक्षता बना था।

असम की 49 लाख बीघा में से अधिकांश पर बांग्लादेशी

उधर पाकिस्तान ने असम में कथित निष्कासन अभियान को लेकर भारतीय राजनयिक को बुलाकर उस पर चिंता जताई। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि असम में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने कहा कि भारतीय राजनयिक को असम में अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा की जांच कराने और दोषियों को सजा दिलाने को कहा गया है।




भारत सरकार ने गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में आज कहा है कि पाकिस्तान सरकार को असम दरांग जिले के गुरूखुटी गांव में हुई घटना के बारे में टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है ।

भारत ने दी चेतावनी और आज कहा कि यह देश के भीतर एक आंतरिक मामला है। असम भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि असम के दरांग जिले के गुरूखुटी गांव में हुई अवांछित घटना कांग्रेस और पाकिस्तान द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए प्रेरणा थी ।

हालांकि, आज जमीयत उलेमा ए हिन्द ने असम के दारांग जिले में हुयी इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना की सख्त अल्फाज में निंदा करते हुये देश के गृहमंत्री और असम के मुख्यमंत्री से इस घटना के मुजरिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इस तरह की दुखद घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुये अपने अधिकारों के लिये संघर्ष कर रहे निहत्थे लोगों पर पुलिस फायरिंग निंदा की है।

इस घटना को लेकर मौलाना मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत कुमार बिस्वासर्मा और देश के गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और ह्यूमन राइट्स वॉच को खत लिखकर उनसे अपने ही देश में प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक व्यवहार न करने का आग्रह किया है।

अल्पसंख्यकों के साथ हिंसक व्यवहार का विरोध

मौलाना मदनी ने कहा कि सभ्य समाज के लिये इस तरह की घटनायें असहनीय है और यह अत्यधिक पागलपन और कट्टरता का प्रदर्शन है, जो मानवता को शर्मसार करता है।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने आज कहा कि अदालतों को असम में ‘क्रूरता’ पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। सिब्बल ने यह भी कहा कि इसपर सरकार की चुप्पी दिल दुखाने वाली है।

असम- निकाले जाने का विरोध करने वालों के खिलाफ क्रूरता की सोशल मीडिया पर उपलब्ध बर्बर तस्वीरों ने मुझे हिला कर रख दिया है। हमारी सरकार की चुप्पी ने मेरा दिल तोड़ दिया है। सिब्बल ने मांग की, ‘‘जांच कोई जवाब नहीं है। अदालत को स्वत: संज्ञान लेने की आवश्यकता है।



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