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असम भाजपा में संकट के बादल नौ विधायकों का इस्तीफा

  • विधानसभा अध्यक्ष के बदले मुख्यमंत्री को सौंपा इस्तीफा
  • नागरिकता कानून के मुद्दे पर दूसरे विधायक भी दबाव में
  • पांच हजार लोगों की गिरफ्तारी से उपजा था तनाव
  • तमाम चर्चाओं का प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा खंडन
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम भाजपा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पार्टी के नौ विधायकों ने

नागरिकता संशोधन विधेयक से उत्पन्न परिस्थिति के बाद अपना इस्तीफा दे दिया है।

वैसे यह इस्तीफा अभी सिर्फ मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सौंपा गया है। इससे माना

जा रहा है कि अभी सुलह का रास्ता खुला हुआ है। लेकिन नौ लोगों के त्यागपत्र के फैसले

की जानकारी सार्वजनिक होते ही पार्टी के अन्य विधायक भी दबाव की स्थिति में आ गये

हैं। जिनलोगों ने इस्तीफा सौंपा है, उनमें अशोक शर्मा, अतुल बोरा, भाष्कर शर्मा, विनंद

कुमार सैकिया, शक्रधर गोगोई, देवानंद हजारिका, युगेन मोहन, रुपक शर्मा, पद्म हजारिका

है। पद्म हजारिका आसू छोड़कर भाजपा में शामिल होकर विधायक बने हैं।

इनलोगों की तरफ से बताया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्र गोस्वामी के मौजूद

नहीं होने की वजह से उनलोगों ने मुख्यमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। इनलोगों

को साथ लेकर भाजपा नेता राम माधव दिल्ली चले गये हैं।

दूसरी तरफ खुद विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्र गोस्वामी ने सीएए के खिलाफ होने की बात

कही है। वह खुद भी अमित शाह से मिलने दिल्ली जा चुके हैं। लेकिन पार्टी के प्रदेश

अध्यक्ष रंजीत दास ने इन मुद्दों पर कहा कि पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है और किसी ने

भी इस्तीफा नहीं सौंपा है। खुद गृह मंत्री ने इनलोगों से मिलकर स्थिति की जानकारी लेने

की इच्छा जाहिर की थी। इसीलिए सभी दिल्ली गये हैं।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मोदी और शाह से मिलेंगे सोनोवालअसम भाजपा की तरफ से रंजीत दास ने किया खंडन

वैसे कल ही पार्टी विधायक दल की बैठक में यह पहले से ही तय हो चुका था कि मुख्यमंत्री

सोनोवाल खुद दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे।

उनकी इस यात्रा का मकसद असम की स्थिति के बारे में दोनों नेताओं को अवगत कराना

था। राज्य में पूरी तरह शांति होने के बाद भी विभिन्न इलाकों में सीएए के विरोध में

प्रदर्शन करते करीब पांच हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पांच हजार लोगों को गिरफ्तार किये जाने की सूचना सार्वजनिक होने पर फिर से सभी

इलाकों से भीड़ दोबारा गुवाहाटी की तरफ बढ़ने लगी थी। इन्हें रास्ते में ही रोका गया और

इस बीच हिरासत में लिये गये सभी पांच हजार लोगों को छोड़ दिया गया। प्रशासन की

तरफ से गुवाहाटी की तरफ आती भीड़ को यह सूचना दी गयी कि कहीं भी किसी को

गिरफ्तार नहीं किया गया है। उसके बाद विभिन्न इलाकों से आते लोग वापस लौटे।

पड़ोसी राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन का दौर जारी होने की सूचना है। इंटरनेट सेवा बाधित

होने की वजह से इनके बारे में पक्की जानकारी नहीं मिल पायी है।

वैसे नौ विधायकों के त्यागपत्र से सुलह की स्थिति इसलिए बनी हुई नजर आती है क्योंकि

यह त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को नहीं सौंपे गये हैं। आम तौर पर किसी भी विधायक

का इस्तीफा स्वीकार होने के लिए उसे विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने की प्रक्रिया है।

इन विधायकों ने मुख्यमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंपा है। लेकिन खबर के बाहर आते ही

सभी को दिल्ली ले जाया गया है। जहां आगे की रणनीति पर चर्चा होने की सूचना है।

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