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असम विधानसभा चुनाव के बाद सीएम के चयन पर गाड़ी अटकी

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलाई संसदीय बोर्ड की बैठक

  • दो केंद्रीय पर्यवेक्षक असम में बैठक कर रहे हैं

भूपेन गोस्वामी

रांची: असम विधानसभा चुनाव में 60 सीटें जीतने वाली भाजपा के मुख्यमंत्री पद को

लेकर विधायक के बीच मतभेद शुरू हो गए हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल

कुछ विधायकों द्वारा फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने का सपना देख रहे हैं तो दूसरी ओर

कुछ विधायकों ने घोषणा की है कि वर्तमान शिक्षा मंत्री हेमंत विश्व शर्मा को मुख्यमंत्री

बनाया जाएगा। इसको लेकर दोनों पक्षों के अंदर झगड़ा शुरू हो गया है। दिन भर में और

कल आधी रात दो बजे तक सभी विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन

किसी तरह समाधान का फार्मूला सामने नहीं आ रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी

नाडा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को लेकर चिंतित हो

गए हैं।एक धड़ा वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का समर्थन कर रहा है जबकि दूसरा

धड़ा हिमंता बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में है। प्रधानमंत्री के निर्देश पर

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने आज असम का

दौरा किया। उन्होंने सभी विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री

नरेन् मोदी ने कल भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है। खबरों के अनुसार भाजपा

संसदीय बोर्ड की बैठक में यह तय किया जाएगा कि असम के अगले मुख्यमंत्री का पदभार

कौन संभालेगा। दरअसल, ऊहापोह की यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि पिछली बार

की तरह भाजपा ने इस बार चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया

था। जबकि वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री का

चेहरा घोषित करके लड़ा था।असम भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने बताया कि

मुख्यमंत्री का फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड करेगा। पार्टी एक पर्यवेक्षक को भेज रही है।

असम विधानसभा में जीते विधायकों से राय मशविरा जारी

भाजपा सूत्रों ने बताया कि इस बारे में पार्टी में आंतरिक मंथन आरंभ जारी है और जल्द ही

संसदीय बोर्ड नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए केंद्रीय

पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकता है।भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्र की ओर से

नियुक्त पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में विधायक दल का नेता चुना जाता है। वह सभी पक्षों

से बात करेंगे और उनकी रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा।दरअसल, प्रदेश इकाई

पहले ही बता चुकी है कि परिणाम आने के बाद केंद्रीय नेतृत्व नए मुख्यमंत्री का फैसला

करेगा। हेमंत बिस्वा सरमा ने भी यह साफ कर दिया था कि संसदीय बोर्ड नए मुख्यमंत्री

का चुनाव करेगा। इससे साफ जाहिर होता है कि उनकी दावेदारी काफी मजबूत है। हेमंत

बिस्वा सरमा का पूर्वोत्तर में मजबूत भूमिका को देखते हुए पार्टी को अनदेखी करना भारी

पड़ेगा। विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देने के

लिए मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को राज्य के सभी वर्गो के लोगों को

धन्यवाद दिया। बराक व ब्रह्मपुत्र घाटी और राज्य के अन्य हिस्सों के लोगों के प्रति

आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि चार प्रमुख क्षेत्रों में उनकी सरकार के प्रदर्शन की वजह

से लोगों ने राजग में फिर विश्वास जताया है। ये चार क्षेत्र हैं- राज्य का विकास, भ्रष्टाचार

के खिलाफ लड़ाई, शांति और सद्भाव को मजबूती और असमी लोगों की पहचान व

अस्तित्व की सुरक्षा।असम में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन

(एनडीए) ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 75 सीटें हासिल करके बहुमत हासिल किया है।

इसमें अकेले भाजपा ने 33.21 फीसद मत पाकर 60 सीटें हासिल की हैं।

भाजपा ने अकेले साठ सीटें हासिल की है

पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को इतनी ही सीटें मिली थीं।भाजपा की सहयोगी

असम गण परिषद (एजीपी) ने नौ सीटें हासिल की हैं जो पिछले चुनाव में हासिल सीटों से

पांच कम है। इसी तरह अन्य सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने छह

सीटें हासिल की हैं और उसने यह सभी सीटें बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) से छीनी हैं।

असम विधानसभा चुनाव में बीपीएफ ने इस बार एनडीए से नाता तोड़कर कांग्रेस के

नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था।इस चुनाव में भाजपा ने 49 सीटों पर अपनी

पकड़ बरकरार रखी है और 11 नई सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस ने 15 सीटों पर

अपनी पकड़ बरकरार रखी है।

आठ विधानसभा क्षेत्र ऐसे रहे जहां जीत का अंतर एक लाख से अधिक मतों का रहा। इनमें

तीन-तीन सीटें आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) और भाजपा के

खाते में गईं जबकि दो सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। राज्य में एआइयूडीएफ के

रफीकुल इस्लाम (जानिया सीट) ने सबसे अधिक अंतर (1,44,775 मत) से जीत हासिल

की। जबकि कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया (नाजिरा सीट) को सबसे कम

अंतर (683 मत) से जीत मिली।हालांकि, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय

महासचिव जितेंद्र सिंह ने सोमवार को बताया राज्य में विपक्षी गठबंधन की हार का

विश्लेषण करने के लिए कांग्रेस एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी जो कमियों को

दूर करने के लिए सुझाव भी देगी। असम विधानसभा चुनाव के बाद एक संयुक्त

संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन ने कहा कि क्षेत्रीय मोर्चे असम जातीय परिषद (एजेपी)

और रायजोर दल ने ऊपरी असम में उन्हें करीब 10 सीटों पर नुकसान पहुंचाया जिसकी

वजह से राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया।

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