ग्लोबल वार्मिंग का सबसे अधिक खतरा असम और मिजोरम पर

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  • केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर दी चेतावनी

भूपेन गोस्वामी

नईदिल्लीः ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संबंधी बदलाव का सबसे अधिक बुरा असर

भारत में अगर कहीं होगा तो वह असम और मिजोरम का इलाका होगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने यह चेतावनी दी है। दरअसल यह उनके निजी विचार नहीं है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार की थी।

इस रिपोर्ट को एक वैश्विक सम्मेलन में प्रस्तुत भी किया गया था।

पोलैंड के काटोविस में आयोजित दुनिया भर के वैज्ञानिकों के इस सम्मेलन में

बताया गया है कि भारतीय भूभाग में हिमालय का जो इलाका

इसकी सर्वाधिक चपेट में है वह असम और मिजोरम का इलाका ही है।

रिपोर्ट तैयार करने के पूर्व भारतीय वैज्ञानिकों ने देश भर में दर्ज किये गये

तमाम बदलावों के आंकड़ों का संकलन किया था।

इसमें वेस्टर्न घाट से लेकर पूर्वी हिमालय तक के इलाके शामिल थे।

रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में उत्तराखंड और सिक्किम पर इसका सबसे कम अब तक असर देखा गया है।

ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में अन्य हिमालय के राज्य भी आ चुके हैं

लेकिन हिमालय के ये इलाके भी वैश्विक बदलाव की चपेट में आ गये हैं।

इस काम में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (बेंगलुरु), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ

टेक्नोलॉजी (मंडी) और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑऱ टेक्नोलॉजी (गुवाहाटी) के

वैज्ञानिकों का दल शामिल हुआ था।

वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए यहां के बारिश के आंकड़ों

के लेकर फसल के उत्पादन तक के सारे आंकड़े शामिल किये थे।

साथ ही वन क्षेत्र के घटते इलाके को भी सर्वेक्षण के दायरे में रखा गया था।

इसका निष्कर्ष है कि असम में प्रति हजार व्यक्तियों के आंकड़ों में सबसे कम सिंचाई सुविधा और वन क्षेत्र आया है।

इसके अलावा कृषि आधारित आमदनी के आंकड़ो में भी असम पीछे पाया गया है।

जहां फसल बीमा का काम भी दूसरे इलाकों से बहुत पीछे है।

मिजोरम के बारे में वैज्ञानिकों ने यह खास  तौर पर चेतावनी दी है कि

इस राज्य का करीब तीस प्रतिशत इलाका ढलान पर बसा हुआ है।

इन इलाकों में भूस्खलन का खतरा दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है।

इस कड़ी में तीसरे नंबर पर जम्मू कश्मीर का नाम है।

इस राज्य में फसल बीमा, रोड संपर्क, वैकल्पिक खेती और मवेशियों की संख्या भी बहुत कम है।

वैसे कश्मीर की इस बुरी स्थिति के बारे में वैज्ञानिक रिपोर्ट में यह उल्लेख भी किया गया है कि

कृषि संबंधी आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की बहुत कम भागीदारी की वजह से भी इस राज्य की उत्पादकता प्रभावित हुई है।

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