एशिया का सबसे बड़ा भेड़ व बकरा प्रजनन केंद्र अब पहचान को मोहताज

एशिया का सबसे बड़ा भेड़ व बकरा प्रजनन केंद्र अब पहचान को मोहताज
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सत्येंद्र कुमार

चतरा : एशिया का सबसे बड़ा भेड़ और बकरा प्रजनन केंद्र अब अपनी पहचान को मोहताज है।

इसे बनाने में कभी करोड़ों की लागत आयी थी।

कभी शुद्ध मुनाफा में चलने वाला यह प्रक्षेत्र अब प्रतिवर्ष आठ से दस लाख का घाटा देता है।

सदर प्रखंड के लक्षणपुर गांव में स्थित इस प्रोजेक्ट को देखने वाला कोई नहीं है।

आश्चर्य तो यह है कि देश में उन्नत नस्ल के भेड़ व बकरा पालन को प्रोत्साहन करने के उद्देश्य से स्थापित इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने के प्रति न तो स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने कभी गंभीरता दिखाई और नहीं अधिकारियों ने।

एशिया का सबसे बड़ा केंद्र था यह

अब हालत यह है कि वृहत भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र में न तो उन्नत भेड़ है और नहीं बकरा।

राष्ट्रपति शासन के दौरान 25 जून 2013 को राज्यपाल के सलाहकार मधुकर गुप्ता भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया था।

उसके बाद हेमंत सोरेन सरकार के पशुपालन मंत्री मन्नान मलिक यहां आए थे।

राज्यपाल के सलाहकार एवं मंत्री दोनों ने डूबते प्रोजेक्ट को उबारने का आश्वासन दिया था।

लेकिन उनका यह आश्वासन निर्रथक साबित हुआ। वृहत भेड़ व बकरा प्रजनन प्रक्षेत्र की स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी।

1585 एकड़ क्षेत्र में फैला यह प्रोजेक्ट अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

स्थापना काल के बाद यहां उन्नत भेड़ों के बालों को निर्यात किया जाता था।

उस समय हजारों की संख्या में विदेशी नस्ल के भेड़ और बकरे होते थे। लेकिन आज स्थिति विपरीत है।

एशिया के सबसे बड़े इस केंद्र में अब गिने चुने पशुधन बचा है

कभी हजारों की संख्या में रहने भेड़ आज मात्र गिनते के 301 रह गए हैं।

वही बकरी और बकरा की संख्या मात्र 440 है, वह भी विदेशी नस्ल के नहीं हैं।

एक समय था कि यहां पर सैकड़ों की संख्या में कर्मी कार्यरत थे। लेकिन कर्मचारियों की संख्या भी सीमित हो गई है।

प्रक्षेत्र के अंतर्गत एक वृहत डैम है। डैम का क्षेत्रफल 80 एकड़ है। डैम के समीप चारा उत्पादन किया जाता था।

उत्पादित चारा भेड़ व बकरों को खिलाया जाता है। आज चार प्रक्षेत्र की स्थिति भी जर्जर है।

ऐसे में पूरी तरह से डूबने के कगार पर पहुंच चुका इस पूरे प्रोजेक्ट को उबारने के लिए

संसदीय चुनाव में किस्तम आजमाने वाले उम्मीदवार आश्वासन भी देने से कतरा रहे हैं।

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