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प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए नया इतिहास गढ़ने की ओर भागलपुर

  • पंडित नेहरु ने रखी थी इस जमीन की नींव

  • लोकनायक ने किया था औपचारिक उदघाटन

  • अब इसे वृहद केंद्र बनाने की योजना पर काम शुरु

दीपक नौरंगी

भागलपुरः प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से भी भागलपुर पूरी दुनिया के मानचित्र पर

अलग पहचान बनाने की तरफ अग्रसर है। इस पर काम चल रहा है। इस प्रस्तावित

प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के बारे में जानकारी दी है डॉ जेता सिंह ने।

वीडियो में जानिये उन्होंने इस बारे में क्या कहा

उन्होंने इस केंद्र और जमीन से जुड़े इतिहास को भी संजोकर रखने की बात कही है। जान

लें कि भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र में हैं यह तपोवर्धन। यह एक ऐतिहासिक महत्व का

स्थान भी है क्योंकि इसकी नींव रखने में खुद प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु का हाथ

रहा है। आज भी वहां पंडित नेहरु द्वारा लगाये गये ईंटे लोगो को श्रद्धा के साथ दिखायी

जाती है।

18 दिसंबर 1954 को उस वक्त के स्वतंत्रता सेनानी डॉ सदानंद सिंह ने किया था। बाद में

इसका औपचारिक शुभारंभ अपने ही कर्मभूमि पर खुद लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने

14 मार्च 1955 को किया था। इस लिहाज से हम यह मान सकते हैं कि यह एक ऐतिहासक

स्थल है। इसी स्थल को उन पूर्वजों को याद करते हुए उनकी यादों को संजोकर रखने के

क्रम में 15 जून 2016 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी प्रतिमा का

अनावरण किया था। इस समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री और संस्था के प्रधान संरक्षक यशवंत

सिन्हा भी मौजूद थे। ऐसे ऐतिहासिक महत्व के स्थल पर ही ख्यातिप्राप्त प्राकृतिक

चिकित्सक डॉ जेता सिंह अपनी इस पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके मुताबिक इसके

बनकर तैयार होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र बनेगा।

प्राकृतिक चिकित्सा के सामान्य गुणों में घरेलु नुस्खे भी हैं

डॉ सिंह ने इस प्रस्तावित योजना और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के सामान्य गुणों का

उल्लेख करने के क्रम में कई महत्वपूर्ण बातों की जानकारी दी। जो कभी हमारी दिनचर्या

में ही शामिल रही हैं। यह सब कुछ हमारी प्रतिरोधक शक्तियों को बढ़ाने के सामान्य गुण

थे। जिसकी नींव की पांच ईंटे खुद पंडित जवाहर लाल नेहरु ने लगायी हो, वहां पर अगर

प्राकृतिक चिकित्सा का सर्वसुविधा युक्त केंद्र खुलने जा रहा है, तो यह अपने आप में

महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोगियों के साथ साथ यह पूरे भागलपुर के लिए भी एक गर्व का

विषय है। साथ ही इस प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जैसे जैसे विदेशियों का आकर्षण बढ़

रहा है, वैसे वैसे अब भारत में भी फिर से इसे आजमाने और उससे फायदा पाने वालों की

संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

इस प्रस्तावित चिकित्सा केंद्र की जानकारी हासिल करने के दौरान ही वहां रांची की मूल

निवासी और केंद्र की काउंसिलर से भी मुलाकात हुई। वह वर्तमान कोरोना महामारी के

प्रति भी काफी विश्वास से भरी हुई हैं। लेकिन इस बात चीत के दौरान उन्होंने निजी

अनुभव का जो उल्लेख किया, वह आज के युग में एक काफी महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने

कहा कि अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वजन कम करने के लिए इस विधि

को आजमाना प्रारंभ किया है। महज दस दिनों के भीतर उन्होंने अपना ढाई किलो वजन

कम करने में सफलता पायी है।

कोरोना के मरीजों के संपर्क में आने के बाद भी कोई दुष्प्रभाव नहीं

डॉ जेता सिंह ने कहा कि कोरोना के वैश्विक दुष्काल के दौरान वह कई कोरोना मरीजों के

संपर्क में आये। लेकिन उन्हें कभी यह गलतफहमी भी नहीं हुई कि इससे उनका कुछ बड़ा

नुकसान हो सकता है। इस क्रम  उन्होंने अपने ऊपर एकाध घंटे के कोरोना के प्रभाव का

उल्लेख करते हुए कहा कि अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो कोरोना आपको

ज्यादा कुछ नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। लेकिन इसके लिए प्राचीन भारत की जीवन

पद्धति में जो कुछ आपको बताया गया है, उसका आपको पालन करना चाहिए। कोरोना से

बचाव ही सबसे कारगर तरीका होने के साथ साथ उन्होंने कहा कि लोगों को इधर उधऱ

परेशान होने से बेहतर है कि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में उन सारे घरेलू नुस्खों का

उल्लेख है, जो आपके शरीर की जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इसे जीवन में

शामिल कर अगर कोई भी व्यक्ति अपनी प्रतिरोधक शक्ति को सही कर लेता है तो उस

पर कोरोना का असर उतना ज्यादा नहीं होगा।

मुख्यमंत्री इसके उदघाटन पर अंतिम फैसला लेंगे

डॉ जेता सिंह ने बताया कि उनकी निजी इच्छा है कि इस प्रतिमा को बनाने वाले का भी

अगले समारोह में सम्मान हो। इस प्रतिमा का निर्माण बोलपुर के कलाकार के द्वारा की

गयी थी। उदघाटन समारोह में जल्दबाजी की वजह से उक्त कलाकार को नहीं आमंत्रित

किया जा सका था। इसलिए भविष्य में इस कमी को पूरा करने की योजना है। प्राकृतिक

चिकित्सा केंद्र के बन जाने के बाद वह इसके औपचारिक उदघाटन की जिम्मेदारी भी

मुख्यमंत्री पर ही छोड़ देंगे। मुख्यमंत्री अपनी सुविधा और समय के मुताबिक ही समय

निकालकर इसका विधिवत उदघाटन करें अथवा वह उस उदघाटन के लिए किसी और का

चयन करें, यह मुख्यमंत्री को ही तय करना है। क्योंकि यह जो कुछ यहां खड़ा हो पा रहा है,

उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ही सबसे बड़ा योगदान है। लेकिन इस बीच सारी

व्यवस्थाओं को अंतिम रुप प्रदान कर लिया जाएगा। इसके बन जाने से दक्षिण भारत के

प्राकृतिक चिकित्सा केंद्रों के जैसा ही विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाने में

कामयाब होगा।


 

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