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एशियाई शेरों की आबादी में 28 प्रतिशत से अधिक का इजाफा

जूनागढ़ : एशियाई शेरों के एकमात्र प्राकृतिक आवास गुजरात के गिर वन में ऐसे शेरों की

संख्या वर्ष 2015 की पिछली सिंह गणना की तुलना में 28 प्रतिशत से भी अधिक की

बढ़ोत्तरी के साथ 674 पर पहुंच गयी है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज

यूएनआई को यह जानकारी देते हुए बताया कि हर पांच साल पर होने वाली सिंह गणना

का 15 वां संस्करण इस साल पांच -छह जून को होने वाला था पर कोरोना वायरस संकट के

कारण इसकी जगह पूनम अवलोकन पद्धति के जरिये सिंहों की गणना की गयी। इस बार

यह संख्या 674 है जो पिछली बार की तुलना में 28.87 प्रतिशत अधिक है। जूनागढ़ के

मुख्य वन संरक्षक डी टी वसावड़ा ने बताया कि इनमें से 412 व्यस्क सिंह (161 नर, 260

मादा) है। अल्पव्यस्क सिंहों की संख्या 94 (45 नर ओर 49 मादा) है जबकि शावकों की

संख्या 137 और अचिन्हित लिंग वाले 22 शेर हैं। ज्ञातव्य है कि पिछली सिंह गणना के

दौरान कुल संख्या 532 थी जो उससे पहले की वर्ष 2010 की गणना के 411 की तुलना में

27 प्रतिशत अधिक थी। वर्ष 2015 की पिछली गणना में 109 नर, 201 मादा तथा 213

शावक थे। श्री वसावड़ा ने बताया कि गिर वन तथा आसपास में पहले शेरों के पाये जाने का

कुल क्षेत्र पांच जिलों में 22000 वर्ग किमी का था जो इस बार 36 प्रतिशत की वृद्धि के साथ

नौ जिले तथा 30000 वर्ग किमी हो गया है।

एशियाई शेरों पर लगातार रखी जा रही है नजर

हाल के दिनों में संक्रमण की वजह से अनेक शेरों की मौत के बाद विभाग इस बारे में

सतर्कता बरत रहा है। इन शेरों को संक्रमण से दूर रखने के तमाम उपाय किये जा रहे हैं।

वैसे इस बीच एशियाई शेरों में से कुछ की मौत उम्र की वजह से अथवा आपसी लड़ाई से भी

हुई है। इसके बाद भी उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी से विभागीय अफसर प्रसन्न हैं क्योंकि यह

उनके प्रयासों का सकारात्मक नतीजा है।


 

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