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अरुणाचल प्रदेश में हो सकती है डोकलाम की पुनरावृत्ति







  • भाजपा सांसद ने किया केंद्र सरकार को सावधान
  • चीन का 60 किलोमीटर अंदर तक हुआ कब्जा
  • शिकायत के बाद भी विदेश मंत्रालय की चुप्पी
  • सांसद तापिर गाओ ने लोकसभा में उठाया मुद्दा
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ के बारे में भाजपा

सांसद ने केंद्र सरकार को सतर्क किया है। उन्होंने कहा है कि डोकलाम

जैसी घटना फिर से अरुणाचल प्रदेश में घटित होने के हालात बन गये

हैं। चीन ने इस राज्य  में करीब 60 किलोमीटर अंदर तक के

इलाके पर कब्जा कर रखा है। भाजपा सदस्य तापिर गाओ ने

लोकसभा में दावा किया। उनके इस बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने

इस बारे में टिप्पणी करन से इंकार कर दिया है।

इस संबंध में आज विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र के

अतिक्रमण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विदेश मंत्रालय के

प्रवक्ता रवीश कुमार ने राष्ट्रीय ख़बर के हवाले से कहा कि वह संसद

में चर्चा पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि यह रक्षा

मंत्रालय और गृह मंत्रालय की चिंता है । इसका उल्लेख है कि

अरुणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तापिर गाव ने कहा है कि चीन ने

राज्य की 50-60 किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। लोकसभा में

इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह इस मुद्दे को संसद के

अंदर नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़िया उन्हें माफ नहीं करेगी।

उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि कोई डोकलाम

होगा, तो वह अरुणाचल प्रदेश में होगा।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए अरुणाचल

प्रदेश से जुड़े मुद्दों को विभिन्न पार्टियों के नेता और मीडिया ज्यादा

तरजीह नहीं देता, जबकि पाकिस्तान के कराची में सामान का भाव भी

अखबारों में छपता है। उन्होंने कहा कि चीन भारतीय क्षेत्र में कब्जा

करता है, पर किसी मीडिया में कोई खबर नहीं आती।

अरुणाचल प्रदेश के इस बयान पर कोई राय नहीं

इस सदन और राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से भी कोई

प्रतिक्रिया नहीं आती। तापिर गाव ने कहा कि इस सदन के जरिए वह

सरकार को बताना चाहते हैं कि दूसरा डोकाला होगा, तो वह अरुणाचल

प्रदेश में होगा। वह दिन कभी नहीं आए, इसके लिए सरकार को फौरन

कदम उठाने चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तवांग यात्रा का जिक्र

करते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पर आपत्ति

जताई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने पर भी चीन ने विरोध

जताया था, पर हमारी सरकार और इस सदन की तरफ से चीन की

आपत्ति पर कुछ नहीं कहा गया।हालांकि, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

ने बाद में जोर देकर कहा था कि उनके गृह राज्य अरुणाचल प्रदेश के

साथ-साथ भारत-चीन सीमा पर पूर्ण शांति थी। “कोई समस्या नहीं

है। सीमा पर शांति है,” उन्होंने कहा था। , रिजिजू ने कहा था, “जब

सीमा का कोई सीमांकन नहीं होता है, इसलिए यदि उनकी (चीनी)

सेना आती है, तो हम कहते हैं कि घुसपैठ। जब हमारी सेना उस तरफ

जाती है, तो वे इसे घुसपैठ कहते हैं।” भारत और चीन लगभग की

सीमा काफी फैली हुई है। यह सीमा हजारों किलोमीटर की है। इसमें

अनेक स्थानों पर स्पष्ट तौर पर सीमा का निर्धारण भी नहीं है। कड़ाके

की ठंड के मौसम में हिमालय के इलाकों में बर्फ से इलाका ढक जाने के

बाद भी कई बार चीनी सैनिकों द्वारा अपनी अग्रिम चौकियों को आगे

ले आने की घटनाएं पहले भी घटित होती रही है।



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