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अरुणाचल में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की तैनाती

  • पाकिस्तान और चीन की साजिश को नाकाम करने की रणनीति

  • जनरल मनोज मुकुंद नरवाने की तीन दिवसीय यात्रा समाप्त

  • थलसेना और वायुसेना के अधिकारियों के साथ बैठक की

  • साढ़े तीन हजार किलोमीटर पर भारतीय सेना सतर्क

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: अरुणाचल में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से तनातनी के बीच भारत

लगातार अपनी सुरक्षा को चुस्त-दुरूस्त कर रहा है। मैकमोहन रेखा पर स्थित नाचो

अंतिम प्रशासनिक क्षेत्र में चीन और भारत के बीच गंभीर सैन्य तनाव चल रहा है। ऐसे में

देश के भीतरी इलाकों में किसी देश विरोधी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सेना लगातार

अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ गंभीर

सैन्य विवाद के बीच देश की तीनों सेनाएं अपने आपको मजबूत करने में लगी हैं। पूर्वोत्तर

राज्यों में उग्रवादी गुटों की सक्रियता को देखते हुए आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद

नरवणे तीन दिवसीय पूर्वोत्तर राज्यों के यात्रा पर थे। सेना प्रमुख का पूर्वोत्तर राज्यों का

तीन दिवसीय दौरा भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बुधवार और गुरुवार को

वे मणिपुर और नागालैंड का दौरा कर रहे हैं। तेजपुर के भारतीय सेना अधिकारी ने बताया

है कि सोमवार को सुबह वायु सेना के तेजपुर एयरबेस पर उतरे आर्मी चीफ को पूर्वी कमान

प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान और एयरफोर्स के अधिकारियों ने रिसीव किया।

इसके बाद वे अधिकारियों के साथ तेजपुर में बनी आर्मी के गजराज कॉर्प्स हेडक्वार्टर

पहुंचे, जहां पर उन्हें पूर्वोत्तर के सुरक्षा हालातों से अवगत कराया गया। बता दें कि देश के

पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले 73 सालों से कई उग्रवादी गुट लगातार सक्रिय हैं। इनमें से कई

संगठनों के साथ वार्ता करके सरकार उन्हें देश की मुख्यधारा में शामिल करने में कामयाब

रही है। इसके बावजूद मणिपुर, नागालैंड, असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में अब भी

कई उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इन संगठनों को चीन की

ओर से पैसा और हथियार मिलते हैं।

अरुणाचल में सेना की तैनाती और रणनीति पर बैठक

तेजपुर स्थित चौथी कोर मुख्यालय का मुख्य प्रवक्ता अधिकारी ने बताया कि चीन

लगातार भारतीय सीमा अरुणाचल प्रदेश के वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की

कोशिश कर रहा है। ऐस में भारत ने सीमा की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है। पूर्वोत्तर

उग्रवादी संगठन चीन की मदद से भारत में अशांति फैलाने के लिए कुछ कर रहा है, सेना

प्रमुख इसका जायजा लेने के लिए पूर्वोत्तर का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने

अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की सैन्य

तैयारियों की व्यापक स्तर पर समीक्षा की। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना प्रमुख को

एलएसी के पास सैनिकों और हथियारों की तैनाती के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

सीमा पर चीन के साथ हुई झड़प के मद्देनजर भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश और

सिक्किम में लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी पर मौजूद सभी संवेदनशील क्षेत्रों में

सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। अधिकारी ने बताया कि आर्मी की पूर्वी कमान के पास

अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ-साथ सिक्किम के सेक्टरों

के अलावा समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। यह कमान चीन, म्यांमार,

भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से सटी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। अपने

दौरे में जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने नागालैंड के राज्यपाल आर एन रवि और मुख्यमंत्री

नीफियू रियो से भी मुलाकात कर राज्य में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री से भी थलसेनाध्यक्ष ने विस्तार से चर्चा की

उसके अलावा बुधवार को मुकुंद नरवणे ने नागालैंड के कोहिमा में अनाथालय और

निराश्रित गृह में एक नई आवासीय सुविधा का उद्घाटन किया। सेना प्रमुख द्वारा

उद्घाटन किए गए अनाथालय को असम राइफल्स द्वारा संचालित किया जाएगा।

नागालैंड के दीमापुर पहुंचे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को पूर्वी कमान प्रमुख

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान और स्पीयर कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरपी

कालिता ने असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में चल रहे अभियानों के बारे

में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने देश की पूर्वोत्तर सीमाओं की सुरक्षा के लिए किए

गए इंतजामों और चल रहे अभियानों के बारे में जानकारी ली। उत्तर पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा

स्थिति की समीक्षा के लिए थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाने 3 दिन की यात्रा

पर नागालैंड के डिंपल पहुंचे।

चीन और पाक के स्पष्ट संदर्भ में, भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवाने ने कहा कि

सियाचिन और शक्सगाम घाटी में मिलीभगत का खतरा सबसे अधिक है, जबकि यह

कहते हुए कि सेना पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर अपनी तैनाती और संसाधनों को फिर से

संतुलित कर रही है। आज भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवाने पूर्वोत्तर राज्यों की

तीन दिवसीय यात्रा समाप्त करके लौटे हैं।

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