कानूनी नहीं जनता की समझ में आने वाली सफाई दें अरुण जेटली

राहुल गांधी का सीबीआइ के बहाने मोदी पर हमला

कानूनी जानकार हैं हमारे देश के वित्त मंत्री। बहुत बड़े वकील है।



इसलिए कानून की भाषा में विजय माल्या से अपनी मुलाकात को अनौपचारिक भेंट

और राज्यसभा सांसद के विशेषाधिकार का गलत उपयोग बता रहे हैं।

लेकिन जनता के सामने असली सवाल यह है कि फिर इतने दिनों तक अरुण जेटली चुप क्यों थे।

उनकी इसी चुप्पी ने उनपर संदेह की ऊंगली उठा दी है।

पहले की राजनीति होती तो अब तक इस्तीफा हो चुका होता।

अब तो अंतिम  समय तक कुर्सी से चिपके रहने की बीमारी है।

इसलिए जब तक किसी को धकियाकर कुर्सी से नहीं हटाया जाता,

उसे हमेशा यह गलतफहमी बनी रहती है कि यह कुर्सी सिर्फ उसी के लिए बनायी गयी है।

शायद देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली भी इस किस्म की गलतफहमी के शिकार हैं।

देश का करोड़ों रुपए लेकर फरार चल रहे शराब कारोबारी विजय माल्या के द्वारा

वित्त मंत्री अरुण जेटली को लेकर दिए गए बयान पर हंगामा जारी है।

विजय माल्या ने कहा है कि वह लंदन जाने से पहले अरुण जेटली से मिले थे।

अब बीजेपी के ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मसले पर ट्वीट किया है

जो कई तरह के सवाल खड़े करता है।

कानूनी सवाल तो डॉ स्वामी ने भी उठाये हैं

डॉ स्वामी ने जो सवाल पूछे हैं, वह दरअसल देश की आम जनता के जेहन में कौंधने वाले सवाल ही हैं।

स्वामी ने गुरुवार को ट्वीट किया कि विजय माल्या के देश से भागने से जुड़े अब दो तथ्य हमारे सामने हैं,

जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता है।

डॉ स्वामी ने लिखा है  24 अक्टूबर, 2015 को माल्या के खिलाफ जारी लुकआउट नोटिस को

‘ब्लॉक’ से ‘रिपोर्ट’ में शिफ्ट किया गया।

जिसकी मदद से विजय माल्या 54 लगेज आइटम लेकर भागने में फरार हुआ।

विजय माल्या ने संसद के सेंट्रल हॉल में वित्त मंत्री अरुण जेटली को बताया था कि

वह लंदन के लिए रवाना हो रहा है।

डॉ स्वामी की इस टिप्पणी के पूर्व यह जान लेना जरूरी है कि दरअसल विजय माल्या ने क्या बयान दिया है।

विजय माल्या ने बुधवार को कहा कि वह भारत से रवाना होने से पहले वित्त मंत्री से मिला था।

लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होने के लिए पहुंचे माल्या ने कहा कि

उसने मंत्री से मुलाकात की थी और बैंकों के साथ मामले का निपटारा करने की पेशकश की थी।

अरुण जेटली ने फेसबुक पर इस संबंध में सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।

मैंने 2014 से अब तक उन्हें मिलने का टाइम नहीं दिया।

वह राज्यसभा सदस्य थे और कभी-कभी सदन में आया करते थे।

मैं सदन से निकलकर अपने कमरे में जा रहा था, इसी दौरान वह साथ हो लिए।

उन्होंने समझौते की पेशकश की थी, जिस पर मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि

मेरे साथ बात करने का कोई फायदा नहीं, यह प्रस्ताव बैंकों के साथ करें।’

कानूनी सफाई नहीं चुप्पी की वजह भी बतायें जेटली

हो सकता है अरुण जेटली को कुछ कह रहे हैं वह सही है लेकिन इतने दिनों तक

चुप्पी साधे रहने की वजह भी उन्हें बताना चाहिए।

जब विजय माल्या के देश से भाग जाने की चर्चा हो रही थी उसी वक्त अगर अरुण जेटली

अपनी तरफ से यह बात स्पष्ट कर देते तो आज उनपर ऊंगली नहीं उठती।

इतने दिनों तक चुप्पी साधे रहने की वजह से ही वह आम जनता की नजर में संदिग्ध हो गये हैं।

घटनाक्रम भी कुछ ऐसे रहे हैं कि अब भी विजय माल्या के देश छोड़कर भाग जाने में किसी अदृश्य शक्ति के सक्रिय होने की जानकारी सभी की जेहन में है।

एयरपोर्ट पर माल्या को रोक दिया गया था।

फिर सिर्फ इतनी जानकारी बाहर आयी कि किसी फोन की वजह से वहां तैनात अधिकारियों ने विजय माल्या को देश छोड़कर भागने दिया।

यह फोन किसका था, उस बारे में अब तक कोई सफाई नहीं आयी है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने माल्या के बयान के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली का इस्तीफा मांगा है। उ

न्होंने ट्वीट कर कहा कि माल्या की ओर से लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और पीएम को तत्काल इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

राहुल ने कहा कि जांच पूरी होने तक अरुण जेटली को वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा देना चाहिए।

इन तमाम मुद्दों के बीच यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अरुण जेटली ने समय पर सच्चाई नहीं बतायी है।

वह अब भले इसे एक अनौचारिक मुलाकात अथवा उनके द्वारा प्रस्ताव नकारे जाने की बात कहें

लेकिन यही बात अगर उन्होंन माल्या के देश छोड़कर भागते ही जनता को बतायी होती

तो उन्हें संदेह के बाहर रखा जा सकता था।

अब चुनावी तैयारियों के बीच अरुण जेटली की इस किस्म की कानूनी सफाई से जनता कहीं पार्टी की लुटिया न डूबो दे।



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