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कोरिया के नकली सूरज प्रयोग ने पहली सफलता अर्जित की




  • एक सौ मिलियन डिग्री तक का तापमान बीस सेकंड तक

  • एटोमिक फ्यूजन की दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि

  • विज्ञान और चिकित्सा में भी हो सकता है बदलाव

  • अणु विज्ञान के सकारात्मक प्रयोग की पहल है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कोरिया के नकली सूरज का पहली प्रयोग सफल रहा है। इसके तहत लगातार बीस

सेकंड तक यह करीब एक सौ मिलियन डिग्री तक का तापमान पैदा करने में कामयाब हुआ

है। पूरी दुनिया में प्लाज्मा आधारित इस अनुसंधान में तापमान का यह नया विश्व रिकार्ड

भी है। कोरिया के सुपर कंडक्टिंग टोकोमाक एडवांस्ड रिसर्च के तहत फ्यूजन विधि से यह

काम किया गया है। इसमें बीस सेकंड तक एक अणु के इतना अधिक गर्म होने का आंकड़ा

वैज्ञानिक उपकरणों में दर्ज किया गाय है। कोरिया इंस्टिट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी

(केएफइएफइ) के  केंद्र में यह प्रयोग किया गया था। सिओल नेशनल यूनिवर्सिटी

और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के संयुक्त प्रयास से इस प्रयोग को आगे बढ़ाया गया था।

जिसमें यह सफलता हासिल हुई है। आणविक विस्फोट पर हो रहे अनुसंधान के तहत इस

उपलब्धि को भविष्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पृथ्वी के अंदर सूर्य

के जितनी गर्मी पैदा करने का यह शोध कई नये वैज्ञानिक अनुसंधान के आयाम खोलने

वाला है। सामान्य वैज्ञानिक तकनीक के आधार पर फिलहाल इतना अधिक तापमान

उत्पन्न करने तथा तापमान उत्पन्न होने की स्थिति में उससे होने वाले नुकसान और

विकिरण को नियंत्रित करने की सामान्य विधि विकसित नहीं हुई है। इसीलिए नकली

सूरज के जैसा तापमान पैदा करने का यह काम फ्यूजन तकनीक के आधार पर किया गया

था। इसके पहले भी इस पर काम हुए थे लेकिन कोई भी प्रयोग दस सेकंड से अधिक समय

तक तापमान को बनाये रखने में कामयाब नहीं हो पाया था। कोरिया का यह प्रयोग सफल

होने के बाद ऐसा माना जा सकता है कि प्लाज्मा आधारित अनुसंधान की दिशा में अब

और प्रगति होगी और अधिक समय तक तापमान को इस विधि से बनाये रखने में

कामयाबी मिलने के कई दूसरे फायदे भी होंगे।

कोरिया के नकली सूरज के शोध का खास मकसद है

इस अनुसंधान केंद्र के निदेशक सी वू यून ने इस बारे में बाद में जानकारी दी है। उन्होंने

इस पूरे प्रयोग की तकनीक और अपनायी गयी सावधानियों के बारे में भी बताया है।

आणविक प्रतिक्रियाओँ के लिहाज से यह अच्छी उपलब्धि है और ऐसी उम्मीद की जा रही

है कि इसके आधार पर दुनिया मे परमाणु विज्ञान के सकारात्मक इस्तेमाल की दिशा में

अब नये अनुसंधान भी होंगे। अब तक आणविक संरचना पर अधिकांश काम सिर्फ और

सिर्फ अधिकाधिक मारक क्षमता वाले परमाणु हथियार बनाने की दिशा में होता रहा है।

इस प्रयोग के सफल होने के बाद दोनों ही विश्वविद्यालयों के प्रोफसरों ने भी परिणामों पर

संतोष व्यक्त किया है। वे मानते हैं कि अब आगे का रास्ता शायद ज्यादा सरल हो

जाएगा।

पिछले अगस्त माह से इस प्रयोग की तैयारियां प्रारंभ कर दी गयी थी। गत 10 दिसंबर को

इसका सारा काम पूरा किया गया था। इसके लिए कुल 110 प्लाज्मा प्रयोग क्रमवार तरीके

से निर्धारित किये गये थे। इसमें हर मुद्दे का अलग अलग अध्ययन करना भी शामिल था।

इन प्रयोगों में से एक सौ मिलियन डिग्री तापमान पैदा करने की अवधि को शोधकर्ता और

आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनका वर्तमान लक्ष्य इसकी समय सीमा को बढ़ाकर तीन सौ सेकंड

तक ले जाना है। शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि क्रमवार तरीके से इस विधि में सुधार

करते हुए वे वर्ष 2025 तक तीन सौ सेकंड तक एक सौ मिलियन डिग्री तापमान को बनाये

रखने में कामयाब हो जाएंगे। वैसे समझा जाता है कि आगामी मई महीने में आयोजित

होने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इस उपलब्धि पर और गहन चर्चा के बाद शोध के

आयामों में कुछ और सुधार का काम गति पकड़ लेगा।

मानव कल्याण के लिए है यह परमाणु कार्यक्रम

वैसे शोध से जुड़े वैज्ञानिक इस बात से भी संतुष्ट हैं कि यह सारा प्रयोग मानव जाति के

कल्याण के लिए हो रहा है। उसकी सफलता पर संभव है कि चिकित्सा जगत को भी इसका

अभूतपूर्व लाभ मिले और कई अन्य तकनीकी विज्ञान की परिकल्पनाएं भी नई उपलब्धि

की वजह से बदल जाए।



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