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कृत्रिम त्वचा से इंसानों की मदद पहुंचाने पर अनुसंधान अभी जारी है

  • इलेक्ट्रॉनिक चमड़ी के बहुआयामी उपयोग किये जा सकेंगे

  • चिकित्सा जगत की अगली पीढ़ी में होगी मददगार

  • लचीला होने के बाद भी अधिक दबाव झेल पायेगा

  • खुद भी कई चीजों का विश्लेषण करने में सक्षम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कृत्रिम त्वचा के इलेक्ट्रॉनक त्वचा से बदलने का प्रयोग पहले ही सफल साबित हो

चुका है। इस किस्म की कृत्रिम चमड़ी प्राकृतिक त्वचा के अनुरुप ही काम करती है। अब

इसके माध्यम से शरीर के अंदर की गतिविधियों को बाहर से जानने का नया रास्ता भी

खुल गया है। लेकिन अब इस काम से जुड़े वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इसका आगे भी बेहतर

इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके तहत लोगों को उनकी आवश्यकता के मुताबिक दवा

देने, कृत्रिम अंग बनाने अथवा हल्के किस्म के रोबोट जैसे काम करने के लिए भी उनका

इस्तेमाल होगा। साथ ही इसके और विकसित होने की स्थिति में यह अपनी कृत्रिम

बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदौलत भी इंसानों की मदद कर पायेगा।

वर्तमान में जो कृत्रिम इंसानी त्वचा बनायी गयी है, वह कई किस्म का काम और

चिकित्सीय भूमिका निभाने में सक्षम है। आने वाले दिनों में नई पीढ़ी की चिकित्सा जगत

में उसका उपयोग और भी व्यापक होने जा रहा है। इसी शोध को विकसित करते हुए हाल

के दिनों में ऐसी चमड़ी पर थ्री डी प्रिंटिंग का प्रयोग भी सफल हो चुका है। सऊदी अरब के

किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे

हैं। दरअसल इस कृत्रिम त्वचा को पहले ही असली चमड़े के जैसा ही लचीला और खिंचाव

सहने करने योग्य बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक को शामिल किये जाने की स्थिति में

उनके काम करने के अलावा खुद ही निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास होगा। इससे

जिस इंसान के शरीर में यह कृत्रिम त्वचा लगी है, उसे कई किस्म का फायदा मिलेगा।

कृत्रिम त्वचा को बनाने में काफी सावधानी बरती गयी

कृत्रिम त्वचा को बनाने में भी वैज्ञानिकों ने काफी सावधानी से काम किया है। दरअसल

इन्हें तैयार करते वक्त इनपर नैनो पदार्थ का आवरण लगाया गया है। इस परत से वह

सेंसर का भी काम कर सकता है। अपनी संरचना की वजह से वह इंसान की वास्तविक

त्वचा के साथ चिपक जाता है। लेकिन इस परत पर अभी एक दूसरे से संपर्क का विकास

करना शेष है क्योंकि प्रयोग के दौरान कई बार ऐसा पाया गया है कि उनका आपस का

संपर्क जल्द ही टूट जाता है। इसी वजह से उनकी गुणवत्ता और काम करने की क्षमता में

कमी आ जाती है। वर्तमान में इस चुनौती से पार पाने की कवायद चल रही है। प्रयोग के

दौरान यह भी देखा गया है कि अगर इस कृत्रिम त्वचा की परत को कठोर बनाया जाता है

तो उसकी वह लचीलापन चला जाता है, जो किसी आम इंसान की त्वचा में होता है।

अधिक कठोर होने की वजह से उसके जल्द ही टूटने अथवा दरार आने का खतरा बढ़ जाता

है। दरार आने अथवा टूट जाने से भी इसके आपसी संपर्क खत्म हो जाते हैं क्योंकि यह

सर्किट टूट जाता है।

इसी चुनौती से पार पाने के लिए अब 2 डी तकनीक से आगे का काम चल रहा है। इसके

लिए आणविक तौर पर बहुत छोटे लेकिन मजबूत पदार्थों के नैनो पदार्थों की परत बनाने

पर प्रयोग हो रहा है। इसके लिए अभी सिलिका नैनोपार्टिकल्स को 2 डी टाइटेनियम

कार्बाइड एमएक्सएन को जोड़ा गया है। इसके लिए हाइड्रोजेन का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें कि ऐसे हाइड्रोजेल दरअसल सत्तर प्रतिशत जल ही होते हैं। इससे लचीलापन बना

रहता है।

हाइड्रोजेल का जुड़ाव इसे लचीला बनाये रखता है

हाइड्रोजेल से जुड़े होने की वजह से यह परत भी खिंचाव सहन करते हुए अपना लचीलापन

बनाये रखने में भी सक्षम है। इस कृत्रिम त्वचा के बीच के हिस्सों को अत्यंत सुक्ष्म नैनो

तारों से जोड़ा गया है। प्रारंभिक जांच में प्रयोगशाला मे तैयार यह पदार्थ अपने आकार से

28 गुणा अधिक तक खिंचा जा सका है और उस दौरान उसकी गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं

आया है। इसके लिए जो प्रोटोटाइप अभी बनाया गया है, वह खुद से 20 सेंटीमीटर की दूरी

पर किसी पदार्थ के होने का संकेत पकड़ सकता है। इस किस्म का कोई संकेत मिलते ही

वह एक सेकंड के दसवें हिस्से में खुद को सक्रिय कर लेता है। इंसान की प्राकृतिक त्वचा

किसी चीज का स्पर्श होने पर इसका संकेत दिमाग तक भेजती है। दिमाग में इस संकेत

का विश्लेषण होने के बाद संबंधित अंग को इसके लिए खास निर्देश भेजे जाते हैं। इस

लिहाज यह माना जा रहा है कि कृत्रिम चमड़ी वास्तविक चमड़ी से अधिक बुद्धिमान होगी

क्योंकि वह खुद भी अनेक चीजों का विश्लेषण कर लेगी। प्रयोग के दौरान उसे अनेक

किस्म के मोड़ा गया था लेकिन अब तक करीब पांच हजार किस्म के मोड़े जाने के बाद भी

एक सेकंड के चौथाई हिस्से में वह स्वाभाविक अवस्था मे लौट आती है। वैज्ञानिक मानते

हैं कि चिकित्सा जगत में उसके बेहतर इस्तेमाल के अलावा हवाईजहाज अथवा अन्य

उपकरणों में भी भविष्य में इसके इस्तेमाल के अनेक फायदे होंगे।

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