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आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से बदलेगी परिवहन उद्योग की चाल और ढाल







  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी ए आइ का उपयोग गाड़ियों में
  • ऑटोमोबाइल उद्योग का चेहरा बदलेगा शीघ्र
  • इसका नया बाजार भी तेजी से विकसित होगा
  • अधिक सुरक्षित और सटीक संचालन है वजह
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस पूरी दुनिया में बदलाव लाता नजर आ रहा है।

अब यह बात भी सामने आ रही है कि परिवहन उद्योग का चेहरा बदलने जा रहा है।

वैसे वर्तमान में भारत की बात करें तो भारत में परिवहन उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है।

ऑटोमोबाइल की बिक्री में जबरदस्त कमी आयी है।

दूसरी तरफ अब बड़े माल ढोने वाले वाहन भी अपेक्षाकृत कम बिक रहे हैं।

ऐसे में दुनिया में जो नया संकेत उभर रहा है, वह नये किस्म की गाड़ियों का है।

वैज्ञानिक इसके लिए काम कर रहे हैं।

इन गाड़ियों में ए आइ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोड़ा जा रहा है।

इससे परिवहन उद्योग को कई किस्म का फायदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इससे होने वाले फायदों का विश्लेषण के लिए वैज्ञानिकों ने वर्तमान परिवेश और आर्थिक ढांचे का भी विश्लेषण किया है।

दरअसल परिवहन उद्योग शुद्ध तौर पर आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े होने की वजह से वैज्ञानिकों का ध्यान सबसे पहले इसी तरफ गया था।

इस उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानव श्रम को कम करने के साथ साथ

दुर्घटनाओं की आशंकाओं को भी काफी हद तक कम कर देगा।

वर्तमान में भी कई स्थानों पर कंप्यूटर के निर्देश पर संचालित होने वाले वाहनों का उपयोग

हो रहा है जो कुछ हद तक इस आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से लैश भी हैं।

इसकी तरफ ध्यान दिया जाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गाड़ी चलाने के झंझट से मुक्ति

पाने के लिए भी अनेक लोग या तो अपनी गाड़ियों को बेच रहे हैं अथवा यातायात

की समस्या में तनाव मुक्त रहने के लिए अपने वाहनों का उपयोग बंद कर चुके हैं।

एक सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका में करीब ढाई लाख ऐसे लोग पाये गये हैं

जिन्होंने पिछले दो वर्षों में अपनी गाड़ी से तौबा कर ली है।

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से वर्तमान परेशानियों से विकल्प पर विचार

इनलोगों ने परिवहन के लिए अन्य माध्यमों को आजमाना प्रारंभ कर दिया है।

दूसरी तरफ नईदिल्ली जैसे शहर में जाम की समस्या से मुक्ति पाने के लिए भी

अनेक लोग अब मेट्रो जैसे परिवहन का इस्तेमाल करने लगे हैं।

इस वजह से यहां भी गाड़ियों का उपयोग उनके घरों मे सिर्फ छुट्टी के दिनों ही घूमने में होता है।

ऐसे में इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी कि कोई ऐसा वाहन भी उपलब्ध हो,

जो अपने आप ही सामान्य निर्णय ले सके। इससे वाहनों के संचालन में भी तेजी आयेगी।

प्रारंभिक अवस्था में इस तकनीक को लाने में होने वाले खर्च पर भी कई लोग सवाल उठा चुके हैं।

लेकिन वैज्ञानिक यह मानते हैं कि इस आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के माध्यम से

कमसे कम गाड़ियों के चालक का वेतन की भी बचत होगी।

यह कोई कम रकम नहीं होती। साथ ही सामान्य यातायात नियंत्रण के तनाव

से भी लोगों का बचाव हो सकेगा।

इसकी सफलता को लेकर वैज्ञानिक इस वजह से भी उत्साहित हैं

क्योंकि गूगल के मुख्यालय में इस किस्म के स्वचालित वाहनों का प्रयोग

प्रारंभ होने के बाद यह तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है।

इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त वाहनों का बाजार भी

अब तेजी से विकसित होता जाएगा।

इस वैज्ञानिक विकास के आर्थिक पहलु पर गौर करने वाले मानते हैं कि धीरे धीरे

यह बाजार ऊपर उठकर वर्ष 2026 तक 550 बिलियन डॉलर से अधिक को होने जा रहा है।

वाहन निर्माता अनेक कंपनियां लगी हैं तैयारी में

वाहन निर्माण से जुड़ी कुछ कंपनियों ने इस पर काम प्रारंभ किया है।

लेकिन जिन कंपनियों ने अब तक काम प्रारंभ नहीं किया है,

वे भी इस दिशा में होने वाले बदलाव और शोध की नियमित जानकारी ले रहे हैं।

इसलिए यह तय माना जाना चाहिए कि आने वाले दिनों में सभी नियमित वाहन निर्माताओं को

अलावा कुछ नई कंपनियां भी आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस युक्त वाहन लेकर दुनिया के बाजार में

आने वाली हैं।

इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तकनीक से लैश होने की वजह से ऐसे वाहन सड़कों पर सामान्य के साथ साथ त्वरित फैसले भी ले सकेंगे।

कंप्यूटर आधारित पद्धति होने की वजह से वे सामान्य इंसानों के मुकाबले ज्यादा बेहतर निर्णय लेंगे।



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