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म्यांमार में सैनिक विद्रोह के बाद से हालात अब तक बिगड़े हुए

म्यांमार में सैनिक विद्रोह के बाद से हालात अब तक बिगड़े हुए

देश में अब भी सैनिकों का आपातकाल लागू

आने वालों में एक मुख्यमंत्री 24 सांसदों शामिल

देश में अब तक दस हजार से अधिक लोगों की मौत

उन्नीस हजार से अधिक शरणार्थी मिजोरम पहुंचे है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: म्यांमार में सैनिक विद्रोह से जारी संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव

एंटोनियो गुटारेस की विशेष दूत क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से

समय रहते म्यांमार में जरूरी कार्रवाई की अपील की है। म्यांमार के मसले पर बुलाई गई

एक बैठक के दौरान उन्हों ने वहां के हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्ते की और चेतावनी भी

दी कि कहीं इसमें देर न हो जाए।उनके मुताबिक म्यांनमार में लोगों को बेहद कष्ट भरे

माहौल का हर रोज सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा परिषद की बंद दरवाजे में हुई बैठक के

बाद उन्हों ने इसकी जानकारी प्रेस कांफ्रेंस में साझा की। उन्होंने कहा कि म्यांरमार में 1

फरवरी 2021 को सेना द्वारा तख्तापलट की कार्रवाई हुई थी। तब से लेकर अब तक देश

में 10,000 लोगों की मौत हो चुकी है और सेना और सुरक्षा बलों ने 20,000 हजार से अधिक

लोगों को गिरफ्तार किया है। म्यामांर में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां के नागरिक भारत

में आकर शरण ले रहे हैं।

हर रोज भागकर भारत आ रहे हैं वहां के शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक करीब 15 हजार लोग अब भी हिरासत में हैं। करीब 5000 लोगों

के बारे में उनके परिवार को कोई जानकारी ही नहीं है। करीब बीस हजार शरणार्थी अब तक

भारत समेत अन्य पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। प्रेस कांफ्रेंस को जानकारी देते हुए

क्रिस्टिना ने कहा कि उन्होंेने सुरक्षा परिषद को इस संबंध में जल्द़ कार्रवाई की अपील

की है, जो बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर हालात बेकाबू होते जा रहे

हैं। बैठक में उन्हों ने म्यांमार की सैन्य सरकार से अपील की कि वो तत्काल सभी

राजनीतिक बंदियों की रिहाई सुनिश्चित करे। नागरिकों में एक मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

म्यांमार में सैनिक विद्रोह के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की अपील

चिन प्रांत के मुख्यमंत्री सलाई लियान लुआइ समेत 19 हजार 247 लोगों ने मिजोरम में

शरण ली है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘चिन प्रांत के मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय

सीमा पार करके सोमवार रात को चंफाई शहर में पहुंचे। उन्होंने कहा कि लुआई समेत

आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के 24 सांसदों म्यांमार में

स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह से चरमरा गई है और खाद्य सुरक्षा को भी गंभीर खतरा है।

हजारों की संख्या में लोगों के के भुखमरी की कगार पर पहुंचने का खतरा है। मौजूदा

महामारी की वजह हालात और खराब हो सकते हैं। सुरक्षा परिषद ने भी मिजोरम के

अलग-अलग हिस्सों में शरण ली है। सीमावर्ती राज्य में शरण लेने वालों में से अधिकांश

चिन के हैं, इन्हें ‘जो’ समुदाय के रूप में जाना जाता है। इस वंश के लोग मिजोरम के मिजो

के समान वंश, जातीयता और संस्कृति को साझा करते हैं।

दस जिलों में आये शरणार्थियों का आंकड़ा सरकार के पास

मिजोरम पुलिस के अपराध जांच शाखा की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक, राज्य के दस

जिलों में म्यांमार के कम से कम 9 हजार 247 लोग ठहरे हुए हैं और उनमें से सबसे अधिक

4156 चंफाई में हैं। वहीं असम राइफल्स के सूत्रों ने बताया कि कई मौकों पर म्यांमार के

नागरिकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की कोशिश लगातार की जाती है। हालांकि

सीमाओं पर से कई नागरिकों को वापस भेज दिया जाता है, लेकिन कुछ लोग दूसरे रास्ते

से भारत के अन्य हिस्सों में घुस जाते हैं। हालांकि सीमा सुरक्षाबलों की ओर से नजर

रखी जाती है, फिर भी लोग भारत में प्रवेश कर जाते हैं। गौरतलब है कि 1 फरवरी को सेना

द्वारा राष्ट्रपति यू विन मिंट और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की को हिरासत में लिए

जाने के बाद म्यांमार में एक साल के लिए आपातकाल लागू कर दिया गया है। इसके बाद

सत्ता वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलिंग को देश की कमान सौंप दी गई है।

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