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नरसंहार की शाम पार्टी बना रहे थे म्यामांर के सैनिक जनरल

  • सरकारी टेलीविजनय पर पार्टी का प्रसारण भी हुआ

  • अनुमान है कि फायरिंग में 144 लोग मारे गये हैं

  • एक फरवरी को विद्रोह के बाद सत्ता पर कब्जा

राष्ट्रीय खबर

अगरतलाः नरसंहार में एक सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी। म्यांमार में

सैनिक शासकों की तरफ से आंदोलन को दबाने के क्रम में यह अब तक का सबसे बड़ा

नरसंहार माना गया है। पूरी दुनिया में इस कार्रवाई की जबर्दस्त निंदा हो रही थी। इसके

बीच ही वहां के सैन्य शासक शाम को एक बड़ी पार्टी में शामिल हो रहे थे। यह सूचना बाहर

आने के बाद पूरी दुनिया में इसकी निंदा हो रही है। नरसंहार के बार में फिर से बता दें कि

देश में लोकतंत्र स्थापित करने की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सेना

ने गोलियां चलायी। इसी गोलीचालन में एक सौ से अधिक लोग मारे गये हैं। इस घटना की

शाम ही वहां के सैन्य शासक एक पार्टी में भाग लेते नजर आये हैं। इससे पूरी दुनिया

आश्चर्यचकित है। वैसे इस घटना में भारत की भी आलोचना हो रही है। भारत ने भी वहां

दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की सेना के खिलाफ वर्मा (अब म्यांमार) की सेना की जीत के

76वें समारोह में भाग लिया है। वैसे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नरसंहार की शाम

आयोजित पार्टी में भी भारतीय सेनाधिकारियों का कोई दल शामिल हुआ था अथवा नहीं।

वहां की निर्वाचित सरकार को हटाने के बाद सेना ने देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले

लिया है। सेना की तरफ से यह चेतावनी जारी की गयी थी कि किसी भीकिस्म का विरोध

प्रदर्शन ना किया जाए। इस सैन्य निर्देश की अवहेलना करते हुए आम जनता फिर से

सड़कों पर निकली। लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के

बीच ही सेना ने गोलियां चलायी। इससे एक सौ से अधिक लोग मारे गये हैं।

नरसंहार की वजह से अनेक पुलिस वाले भारत भाग आये हैं

बताते चलें कि सेना के इस आतंक और बार बार आम जनता के खिलाफ इस तरीके से

गोली चालन से इंकार करने के बाद वहां के अनेक पुलिस वाले भागकर भारतीय सीमा में

चले आये हैं। वैसे यह सभी पुलिस वाले बिना हथियार के ही शरण ले चुके हैं। उनके लिए

अस्थायी शिविर भी स्थापित किये गये हैं। शनिवार के इस नरसंहार के बारे अब बताया जा

रहा है कि सेना की फायरिंग में 144 लोग मारे गये हैं। लेकिन उससे अधिक हैरानी

नरसंहार की शाम ही पार्टी के आयोजन को लेकर है। इस पार्टी में वहां के सैन्य सरकार के

प्रमुख अन हाईंग के साथ साथ अन्य वरिष्ठ सेना जनरल शामिल थे। इस पार्टी का वहां के

सरकारी टेलीविजन पर भी प्रसारण किया गया है। बताते चलें कि पिछले नवंबर महीने में

प्रधानमंत्री आन सान सू दोबारा जब सत्ता में लौटी तभी सेना ने चुनाव में गड़बड़ी की बात

कही थी। इसके बाद गत 1 फरवरी को सेना ने एक विद्रोह की बदौलत सत्ता पर कब्जा कर

लिया है। उसके बाद से ही देश में लगातार विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है।

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