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पुरातत्व विभाग ने तीन ब्लॉकों में टीलों की खुदाई रोक दी

हमीरपुरः पुरातत्व विभाग ने उत्तर प्रदेश में हमीरपुर जिले के तीन ब्लाकों के 32 गांव में

सर्वे करने के बाद दस हजार पुरानी सभ्यता के कई अवशेष मिलने के बाद 37 गांवों के

मिट्टी के टीलों को खोदने पर रोक लगाने के आदेश दिये है। पुरातत्व विभाग के

क्षेत्राधिकारी ने हमीरपुर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि क्षेत्र के इन टीलों पर

पुरातात्विक धरोहरे मौजूद है तथा जिसे निकालकर वृहद स्तर पर शोध कार्य किया

जायेगा। बुन्देलखंड के क्षेत्रीय पुरातात्विक अधिकारी एस के दुबे ने बताया कि पिछले 25

दिनो तक गोहांड, सरीला, राठ ब्लाक में पुरातत्व की पांच सदस्यीय टीम ने सर्वे कर

चिकासी, बरौली खरका, चंदवारीडांडा, घुरौली, विलगांव,मंगरौठ, जिंगनी, पवई,

अलकछवा, बड़ा खरका, गड़हर, अमरपुरा, दंगवा, नहदौरा, अमगाव, सरसई, रावतपुरा,

त्यौतना, इटैलियाबाजा, सिकरौधा, खरका, रिहुटा, चिल्ली, औता, टोंलारावत, टीकुर,

तुलसीपुरा, जमरा, बागीपुरा, महजौली, खरेहटा, सिंगरावन, आदि गावों के सर्वे में हजारो

साल पहले के पक्के बर्तन पत्थर का बना एक उपकरण प्राप्त हुआ है। इसे काला एवं लाल

प्रकार का मृदभांड कहते है। जो अवशेष मिले है उन्हे झांसी संग्रहालय में जमा करा

जायेगा।

पुरातत्व विभाग ने वहां साक्ष्य मिलने के बाद यह फैसला लिया

श्री दुबे ने बताया कि क्षेत्र के जंगलों में ग्रामीण इन टीलों की मिट्टी को अपने निजी काम के

लिये खोद कर ले जा रहे है जबकि इन टीलों पर पुरानी मानव सभ्यता के महत्वपूर्ण

अवशेष मिलने की उम्मीद है। श्री दुवे कल हमीरपुर जिलाधिकारी डा. ज्ञानेश्वर तिवारी को

पत्र लिखकर कहा है कि सरीला ब्लाक के अतरौली, बाबूराम का डेरा,बंधौली, बंगरा,

बसरिया, बेदा, विरहट, चंडौत डाडा आदि दस गांवो में जो मिट्टी के टीले है उनकी खुदायी

पर तत्काल रोक लगा दी जाये ताकि महत्वपूर्ण अवशेषो की खोज की जा सके। इसी प्रकार

राठ क्षेत्र में अटगांव इकटौरा, भदवारा, गुरसारा, चकबेहटा झिन्नाबीरा, दादौ,

टोलाखंगारन, सरगाव, इकटौर, छिवौली, इंदपुरा जलालपुर, जमरेही डाडा, करियारी,

क्योटरा, खंडौत, मंगरौठ, निवली बसेला, पहरा, परछा, रिरुवा बुजुर्ग, तुरना समेत 27 गांवों

को मिट्टी के टीलों को खोंदने पर रोक लगा दी गयी है। पुरातत्व विभाग का मानना है कि

इन गांवो के टीलों की खुदायी करने के बाद हजारो साल पुराने पाषाण युग के उपकरण

मिल सकते है। यह इलाका उत्तर मध्यकाल का इतिहास समेटे हुये है। चंदेलकालीन की

धरोहरे मिलेगी। जो इतिहास में पढ़ा जाता था वह अवशेष बुन्देलखंड की धरती हमीरपुर में

प्राप्त हो रहे है। इसे शोध कर आने वाली जनरेशन के लिये महत्वपूर्ण विषय होगा। यह

पहला मौका है जब पुरातत्व विभाग जिले में हजारो साल पुराने धरोहरों व अवशेषों की

खोज करने में जुटा है।


 

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