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चीटियों की दुनिया इंसानों से अधिक जटिल और निष्ठुर है

  • कई प्रजातियों के डंक इंसानों को कष्ट देते हैं

  • अब तक सोलह हजार प्रजातियों की पहचान हुई

  • कई प्रजातियों में अब जेनेटिक बदलाव भी नजर आये

  • चीटीं मजदूरों का विद्रोह तख्ता भी पलट करता जा रहा है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः चीटियों की दुनिया पर इंसानों ने बहुत अधिक गौर नहीं किया है। इंसानों को अपने

अनुभव से कुछ खास प्रजातियों के बारे में जानकारी होती है। जिन चीटियों का डंक अधिक

कष्टदायक होता है, उनके बारे में सुनकर अथवा व्यक्तिगत अनुभव पाकर हम अधिक

सावधानी बरतते हैं। लेकिन यह दुनिया इंसानों की दुनिया के कहीं अधिक जटिल और

निष्ठुर भी है। यहां नकारा जीवन के लिए कोई हमदर्दी नहीं होती। शोधकर्ता मानते हैं कि

इस प्रजाति को जिंदा रहने के लिए उनके अपने कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है,

जो हम इंसानों की नजरों में अत्यंत निष्ठुर आचरण लगता है। जन्म लेने के पहले ही कुछ

खास किस्म के अंडों से शिशु बनते प्राणियों का खात्मा उनकी ही प्रजाति कर देती है।

दरअसल वैज्ञानिक शोध में यह देखा गया है कि अंडों से जब एक खास किस्म का गंध

निकलता है तो यह पता चल जाता है कि अंडों के अंदर क्या है। तब जाकर इस किस्म का

सामूहिक संहार भी किया जाता है। इसका मकसद प्रजाति के अस्तित्व और एक साथ

मिलकर काम करने की क्षमता को बरकरार रखना है। कई बार तो खास प्रजाति की

चीटियों में पुरुषों का काम वंशवृद्धि तक सीमित होता है। इनकी मातृसत्तात्मक संरचना

होती है। यहां पुरुष चीटियों की उपयोगिता सिर्फ बच्चे पैदा करने की है। उसके बाद वे

स्वतः ही मर जाते हैं और अपनी ही प्रजाति अथवा किसी दूसरे कीट पतंग के भोजन बनते

हैं। म्युनिख के लुडविग मैक्समिलान विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ सूसाने फोइटजिक ने

अपने अनुभवों के आधार पर इसी जीवन पद्धति पर एक पुस्तक भी लिखी है। इसमें

चीटियों की दुनिया में हुए जेनेटिक बदलाव के प्रभावों के बारे में भी बतलाया गया है।

सुनने में बड़ा अजीब लगेगा लेकिन वहां अब विद्रोह हो रहे हैं। मजदूरो ने शासकों को

मारकर सत्ता हथियाना प्रारंभ कर दिया है।

चीटियों की दुनिया के बारे में हम बहुत ज्यादा नहीं जानते

आम तौर पर हमें अब तक चीटियों के बारे में यह जानते हैं कि चीटियों की रानी होती है,

जो अंडे देते हैं। उसके ईर्दगिर्द सैनिक होते हैं तो किसी भी बाहरी हमले से उनकी आबादी

को बचाते हैं। इसी आबादी में सबसे अधिक तादाद मजदूरों की होती है, जो काम करते हैं,

भावी पीढी की देखभाल करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर जान जोखिम में डालकर

हमला भी विफल करते हैं। अब नई जानकारी यह सामने आयी है कि टेमनोथोरॉक्स

लॉंगिसपिनोस प्रजाति की चीटियों में ऐसे होता हुआ देखा जा रहा है। उनका अध्ययन

करने वाले वैज्ञानिक दल ने यह पाया है कि उनकी बस्ती में पल रहे अंडों पर यह हमला

मजदूर चीटियों द्वारा ही किया जाता है। यह देखा गया है कि जिन अंडों की नियमित

देखभाल मजदूर चींटी करते हैं, एक खास अवधि के बाद अचानक इन अंडों से कुछ को यह

मजदूर ही मार डालते हैं। इस बात पर नजर जाने के बाद वैज्ञानिकों को यह बात बड़ी

अजीब लगी थी। तब जाकर इस पर और अधिक गहन शोध किया गया। शोध से पता चला

कि प्रारंभिक अवस्था में उनके अंडे एक जैसे ही होते हैं। इसलिए मजदूर वर्ग हरेक की एक

समान देखभाल करता रहता है। एक खास समय के बाद उनके अंदर से खास किस्म का

गंध निकलने से मजदूर चींटी समझ जाते हैं कि उस अंडे के अंदर शासन करने वाली

प्रजाति का अंडा पल रहा है। इसका पता चलते ही अंडों पर हमला होता है। इस अवस्था में

अंडों के अंदर पल रहे शिशु कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं होता। उन्हें मार डाला जाता है

और बस्ती से बाहर फेंक दिया जाता है।

शासक वर्ग की भ्रूण हत्या अब जेनेटिक बदलाव है

एक पीढ़ी में ऐसे शासकों के समाप्त होने के बाद संख्या बल के आधार पर अपने आप ही

तख्ता पलट हो जाता है जबकि शासक वर्ग की सारी चीटियों का खात्मा हो जाता है। यह

हाल के दिनों के जेनेटिक बदलाव का असर है।

हमलोगों में से अधिकांश यह भी नहीं जानते हैं कि इस दुनिया में अब तक सोलह हजार से

अधिक प्रजाति की चीटियों की खोज अब तक हो चुकी है। घने जंगलों के बीच रहने वाले

कुछ प्रजातियों का शायद अब तक पता भी नहीं चल पाया हो। इनमें से कुछ प्रजातियां तो

अत्यंत आक्रामक होती हैं और लाखों करोड़ों की संख्या में एक साथ किसी जानवर पर

हमला करती हैं। वैज्ञानिक परीक्षण में यह पाया गया है कि भारत महासागर के क्रिसमस

द्वीप पर बसने वाले खास किस्म के केकड़ों पर भी चीटियों ने हमला कर उन्हें विलुप्त

होने के कगार पर पहुंचा दिया है। अपनी आबादी के करीब आने वाले किसी भी कीट पतंग

पर भी वे हमला कर देते हैं। अजीब स्थिति यह भी है कि पेरु और ब्राजिल के जंगलों में एक

प्रजाति ऐसी भी हैं तो अपने काम आने वाली एक प्रजाति के पौधों के अलावा शेष पौधों को

मार डालती है।

कुछ प्रजातियो की हमले की ताकत हैरान करने वाली है

वैज्ञानिकों ने झूंड बनाकर किसी बड़े प्राणी को चंद मिनटों में अपना भोजन बनाने वाली

प्रजाति की चीटियों का भी अध्ययन किया है। इस शोध में यह भी पाया गया है कि

ओडोनटोमाचूस बाउरी प्रजाति की चीटियां एक सेंकड के 130वें भाग में 143 मील प्रति घंटे

की रफ्तार से हमला करती है। एक साथ लाखों चीटियों के ऐसे हमले से किसी शिकार का

बचना नामुमकिन होता है।

कुल मिलाकर शोध करने वालों का मानना है कि चीटियों की बस्ती इंसानों से ज्यादा

व्यवस्थित हैं, जहां हर किसी को अपनी जिम्मेदारी का पता होता है और वह अपने काम में

बेइमानी नहीं करता। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसे पता है कि उसकी चूक का नतीजा खुद

उसे और उसके पूरे गांव को भोगना पड़ सकता है।

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