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एंटीबॉडी तैयार करने में इजरायल और नेदरलैंड का सफलता का दावा

  • इजरायल के रक्षा मंत्री का एलान

  • मार्च महीने में ही दिये थे संकेत

  • नेदरलैंड की खोज इंसानी एंटीबॉडी

  • वायरस पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर सकता है

प्रतिनिधि

नईदिल्ली: एंटीबॉडी तैयार करने के बारे में दो देशों से अच्छी खबर आयी है। इजरायल

और नेदरलैंड ने कोरोना वायरस को मारने में सक्षम एंटीबॉडी तैयार करने में सफलता का

दावा किया है। इजरायल के रक्षा मंत्री नाफताली बेनेट ने कहा कि यह वायरस के हमले को

अंदर से समाप्त करता है और वायरस को पूरी तरह खत्म भी कर सकता है। उनके

कार्यालय की तरफ से यह दावा किया गया है कि देश के मुख्य बॉयोलॉजिकल रिसर्च

इंस्टिटियूट में यह काम हुआ है। इसके आगे का काम भी वैज्ञानिक तेजी से पूरा कर रहे हैं।

इस अनुसंधान के पेटेंट के बाद उसके व्यापारिक उत्पादन की भी तैयारियां चल रही हैं। इस

घोषणा से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस एंटीबॉडी का क्लीनिकल ट्रायल भी हो

चुका है। यह भी बताया गया है कि खुद रक्षा मंत्री ने भी उस प्रयोगशाला का दौरा किया था

और वैज्ञानिकों ने अपने स्तर पर पूरी जानकारी हासिल की थी। इस अनुसंधान केंद्र का

काम सीधे प्रधानमंत्री के अधीन होता है। जहां रक्षा मंत्री को इस वायरस को खत्म करने की

ताकत रखने वाले एंटीबॉडी के क्रियाकलापों के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी दी गयी

थी। यह एलान कर दिया गया है कि पेटेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य अंतर्राष्ट्रीय

कंपनियों से भी इस दवा के उत्पादन के लिए संपर्क किया जाएगा ताकि दुनिया में जल्द से

जल्द हर इलाके में यह पहुंचाया जा सके।

एंटीबॉडी से पहले ही तैयार करने की प्रक्रिया जारी थी

उल्लेखनीय है कि पिछले मार्च महीने में भी इस प्रयोगशाला को कोरोना वायरस के शोध

में महत्वपूर्ण उपलब्ध हासिल होने की सूचना सार्वजनिक हुई थी। उसी वक्त यह बता

दिया गया था कि प्रारंभिक चरण सफल होने के बाद अब अगले चरण के काम प्रारंभ किये

जा रहे है । अब इजरायल की अपनी उत्पादन क्षमता पूरी दुनिया के मुकाबले कम होने की

वजह से बड़ी कंपनियों से संपर्क साधा जा रहा है ताकि पूरी दुनिया में इस दवा की

व्यापारिक बिक्री पूरी दुनिया तक हो सके। वैसे इस पूरे घोषणा में अब तक खुलकर यह

नहीं बताया गया है कि इसके लिए इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल हुआ है अथवा नहीं। बिना

इस ट्रायल के किसी भी दवा के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाती है, यह वैश्विक दवा

मापदंड है।

जापान और इटली सहित कई अन्य देशों से वायरस के नमूने एकत्रित किये जाने के बाद

दुनिया भर में इस पर शोध हो रहा है। इसी आधार पर नेदरलैंड के वैज्ञानिकों ने भी इस

काम में सफलता हासिल करने का दावा किया है। वहां के यूट्रेच विश्वविद्यालय के

वैज्ञानिकों की तरफ से यह दावा किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी बनायी है। इसका नाम 47डी11 है। यह सीधे उस स्पाइक प्रोटिन

पर हमला करता है तो कोरोना वायरस के बाहरी आवरण के तौर पर वायरस की रक्षा

करता है। परीक्षण के नतीजों के बारे में यहां के वैज्ञानिक बता रहे हैं कि यह सिर्फ कोरोना

ही नहीं बल्कि उसके जैसे सार्स पर भी एक जैसा हमला करता है। इस सार्स प्रोटिन पर भी

स्पाइक प्रोटिन का आवरण होता है।

स्पाइक प्रोटिन पर नियंत्रण पाना ही निदान के लिए जरूरी

इस हमले की वजह से सार्स कोव 2 के वायरस न तो शरीर में संक्रमण फैला पाते हैं और न

ही उनकी संख्या बढ़ पाती है। शोध के निष्कर्षों के बारे में वैज्ञानिकों ने बताया है कि सार्स

का प्रकोप होने के बाद से ही इस दिशा में काम चल रहा था। याद रहे कि वर्ष 2002-03 में

यह सार्स वायरस पाया गया था। इस शोध दल के नेता और एसोसियेट प्रोफसर बेरेंड जॉन

बॉस कहते हैं कि यह एंटीबॉडी वायरस को बचाने वाले प्रोटिन के कवच को नष्ट करने के

बाद अन्य कोषों के वायरस संक्रमण से ग्रस्त होने से भी रोक देता है। शोध वैज्ञानिकों ने

स्पष्ट कर दिया है कि यह पूरी तरह इंसानी एंटीबॉडी ही है। इसके किसी जानवर से नहीं

तैयार किया गया है। इसलिए पशुओं पर इसके परीक्षण की आवश्यकता भी नहीं है। अब

सिर्फ इंसानों पर क्लीनिक ट्रायल के नतीजों को देखने के बाद इस एंटीबॉडी को मान्यता

मिलना शेष है


 

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