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तीन तरफ से घेरकर नक्सलियों ने पुलिस दल पर हमला किया था

  • हमला का नेतत्व नक्सली कमांडर हिड़मा कर रहा था

  • नक्सली अपने साथ मारे गये लोगों के शव ले गये हैं

  • इतनी भीषण गोलीबारी कि हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया

  • सुकमा में नक्सल विरोधी अभियान दल ही जाल में फंसा

विशेष प्रतिनिधि

रायपुरः तीन तरफ से घेरकर नक्सलियों ने वहां गये नक्सल विरोधी अभियान दल के

जवानों पर हमला किया था। सुकमा में नक्सल विरोधी अभियान में शामिल दल ही

नक्सली हमले का शिकार हो गया। इस हमले के बारे में अब जो सूचनाएं यहां पहुंची हैं,

उसके मुताबिक जिस तरह पर सुरक्षाबलों को घेरा गया था, वहां पहले से ही नक्सली

घेराबंदी किये बैठे थे। सुरक्षा बलों के वाहन जब वहां से गुजरने लगे तो तीन तरफ से

उनपर हमला हो गया। घायल जवानों के मुताबिक वहां शायद चार सौ की संख्या में

नक्सली जंगल में घात लगाये हुए थे। इस नक्सली हमले में कई जवान गंभीर रुप से

घायल हुए हैं, जिन्हें आनन फानन में रायपुर लाया गया था। वैसे नक्सलियो के इस हमले

में एक जवान अब भी लापता बताया जाता है। बिजापुर और सुकमा की सीमा पर

नक्सलियो के जमा होने की सूचना पर ही सुकमा में नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़े

पुलिस दल को रवाना किया गया था। लेकिन पुलिस के पास इस नक्सली गतिविधि की

पूरी जानकारी नहीं थी। मिली जानकारी के मुताबिक सुकमा के इलाके में छत्तीसगढ़

पुलिस ने अपने बस्तरिया बटालियन को भी काम में लगाया है। घटना के बाद आस पास

के इलाके में तलाशी का अभियान चलाया जा रहा है।

तीन तरफ से हुए हमला पर पुलिस औपचारिक तौर पर चुप

इस घटना के बारे में पुलिस की तरफ से अनौपचारिक जानकारी दी जा रही है। इसके तहत

सुकमा में नक्सल के इस बड़े दल का नेतृत्व वहां हिडमा नाम का नक्सली कमांडर कर रहा

था। उसके बारे में पुलिस के खाते में यह दर्ज है कि वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी के

एक नंबर बटालियन का प्रमुख है। वैसे जिस तरीके से यह हमला तीन तरफा हुआ है उससे

साफ है कि इस हमले की रणनीति बनाने में अनुभवी नक्सलियों का दिमाग लगा था और

शायद वे भी इस हमले में शामिल थे।

सुकमा में पुलिस को काफी सोच समझ कर घेरा गया

इस मुठभेड़ के बार में अनुमान है कि दस से बारह नक्सली भी मारे गये हैं। लेकिन उनके

शव को हमला करने वाले नक्सली अपने साथ ले भागे हैं। इसी वजह से आस पास के

इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मुठभेड़ प्रारंभ होने के बाद ही मदद के लिए

वहां हेलीकॉप्टर भेजे गये थे लेकिन नीचे इतनी भीषण गोलीबारी हो रही थी कि वहां

हेलीकॉप्टर उतारने की स्थिति शाम पांच बजे बन पायी। उसके बाद ही घायलों को वहां से

उठाया जा सका।

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