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मौसम में बदलाव से अंटार्कटिका का बर्फ हरा हो गया

  • वैज्ञानिक मानते हैं कि यह शैवाल का बढ़ना है

  • अंतरिक्ष से भी हरा नजर आ रहा है पूरा इलाका

  • बदलाव की इस दशा को देखकर वैज्ञानिक चिंतित

  • ऐसा अचानक क्यों हुआ, इसका उत्तर नहीं मिला

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः मौसम में बदलाव के संकेत तो पहले से ही मिल रहे थे। बीच में कोरोना लॉक

डाउन की वजह से बहुत कुछ और बदल गया था। अब नई जानकारी अंटार्कटिका के बारे में

मिल रही है। वहां का बर्फ तेजी से हरा होता चला जा रहा है। इस स्थिति को देखकर

वैज्ञानिक चिंतित हैं और उसके कारणों को तलाशने की कोशिश रहे हैं। दूसरी तरफ

इंटरनेट पर अदृश्य शक्ति, एलियंस जैसे विषयों पर लगातार कुतर्क देने वालों की एक

फौज इसे दुनिया के अंत की निशानी बताने से भी परहेज नहीं कर रहा है। लेकिन असली

मुद्दा बर्फ के हरा होने का है, जिसके कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। यूं भी

मौसम में बदलाव की वजह से बेमौसम बारिश, तापमान में अचानक से उतार-चढ़ाव और

प्राकृतिक आपदाओं की प्रकोप का स्तर बढ़ जाना जैसे विषय पहले से ही नजर में है। अब

इस हरे रंग का बर्फ देखकर लोगों को काफी पहले बनी एक साइंस फिक्शन फिल्म 2012

बनी थी। यह फिल्म भी कुछ इसी तरह की आशंकाओं को दर्शाती है। अब अंटार्कटिका में

बर्फ का हरा रंग नजर आने के बाद फिर से इसकी चर्चा भी चल पड़ी है। लेकिन यह भी सच

है कि मौसम में बदलाव का असर दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में अलग अलग तरीके

से नजर आ रहा है।

नेट पर अत्यधिक सक्रिय रहने वाले एक वर्ग ने इस दुनिया के अंत की शुरुआत बताकर

प्रचार अभियान भी तेज कर दिया है। दूसरी तरफ अब कुछ लोग इसे कोरोना वायरस का

दुनिया पर पड़ रहे प्रभाव से जोड़कर देखने की दलील दे रहे हैं। वैसे सारी घटनाओं को

जोड़कर यह निष्कर्ष अभी निकाला जा सकता है कि यह वर्ष पृथ्वी के लिए बिल्कुल भी

अच्छा नहीं जा रहा है।

मौसम में बदलाव के साथ साथ बहुत कुछ उल्टा हो रहा

अंटार्कटिका की कुछ ताजा तस्वीरें सामने आने के बाद वहां के बार में चर्चा जोर पकड़ रही

है। इन तस्वीरों में वहां का बर्फ अब सफेद नहीं हरा नजर आने लगा है। पहले तो लोगों को

इन तस्वीरों पर यकीन ही नहीं हुआ था। प्रारंभिक दौर में इन्हें फोटोशॉप के जरिए की गयी

गड़बड़ी माना गया था। लेकिन बाद में प्रामाणिक तथ्यों के साथ कई वैज्ञानिक संस्थानों ने

वहां के बर्फ के हरा होने की पुष्टि कर दी। उसके बाद से मौसम में बदलाव के साथ इसे

जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रारंभिक जांच के तहत कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और ब्रिटिश अंटार्कटिक सोसायटी ने

कहा है कि यह चिंता जैसी कोई स्थिति नहीं है। दरअसल वहां अचानक एक खास किस्म

का शैवाल तेजी से पनपने लगा है। इस शैवाल का रंग हरा होने की वजह से ही सारा का

सारा इलाका अब हरा दिख रहा है। बर्फ के ऊपर इसी शैवाल की एक पर्त पड़ी है। लेकिन

इन वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अचानक इस शैवाल की आबादी इतनी तेजी

से क्यों बढ़ी है। वे इस बारे में अभी और शोध कर रहे हैं। इसके लिए ताजा आंकड़े और

नमूने भी जुटाये जा रहे हैं।

वैसे इस तरफ दुनिया का ध्यान आकृष्ट होने के बाद अंतरिक्ष से पृथ्वी पर नजर रखने

वाले सैटेलाइटों से भी इस इलाके को देखा गया है। अंतरिक्ष से भी यह इलाका पूरी तरह

हरा ही नजर आ रहा है।

शायद नये किस्म के जीवन का नया जन्म हो रहा है

इस शोध से जुड़े दल के नेता मैट डेव ने कहा है कि यह शायद नये इको सिस्टम के तैयार

होने की शुरुआत है। शायद शैवाल के माध्यम से जीवन का यहां नये सिरे से जन्म हो रहा

है। याद रहे कि इस पृथ्वी पर जीवन का पहले चरण के तौर पर एमिवा और बाद में

प्रोटोजोया ही आया था। वे भी इसी शैवाल प्रजाति के ही हैं। शायद दुनिया के कुछ अन्य

अनजाने हिस्सों में भी यही व्यवस्था बन रही होगी, जिसके बारे में अब तक वैज्ञानिकों को

जानकारी नहीं मिल पायी है। नेट पर लगातार मौत का कुतर्क प्रसारित करने वालों को

अगर दरकिनार भी कर दें तो विज्ञान आधारित तथ्यों के आधार पर इस बदलाव को

सामान्य घटना नहीं माना जा सकता है। खास तौर पर मौसम में बदलाव को पूरी दुनिया

के लिए हमेशा से ही महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। वैसे बर्फ के हरा होने की बात प्रचारित

होने के बाद यूरोपिय स्पेस एजेंसी के सैटेलाइनट सेंटीनेल 2 के आंकड़ों को नये सिरे से

खंगाला गया है। जिसमें यह पाया गया है कि वहां बर्फ पर ऐसे शैवाल पहले भी होते थे।

लेकिन यह पहला मौका है जब वे इतनी अधिक तादाद में बढ़े है और पूरा इलाका ही अब

हरा नजर आने लगा है


 

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