भारत का ही प्राचीन हिस्सा है यह इलाका और आस्ट्रेलिया

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  • अंटार्कटिका के नीचे दबा हुआ है एक पूरा महाद्वीप

  • बदलाव की वजह से अलग हो गया

  • वैज्ञानिक शोध से एक होने की हुई पुष्टि

  • बर्फ के नीचे भी एक जैसी जमीन

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः भारत का ही हिस्सा था अंटार्कटिका। यह बाद में पृथ्वी पर होने वाले बदलावों की वजह से अलग हो गया।

वैज्ञानिकों के मुताबिक करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व यह सारे इलाके आपस में जुड़े हुए थे।

वीडियो में देखें कैसे जुड़ी थी पृथ्वी और कैसे अलग हुए

बाद में सतह के भीतर टेक्नोनिक प्लेटों के जगह बदलने और आपसी टकराव की वजह से इलाके कटते चले गये।

बीच में कई बार बड़े उल्कापिंडों के टकराने की वजह से भी पृथ्वी पर न सिर्फ तबाही मची बल्कि भारी बदलाव भी हुए।

अब आधुनिक यंत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से वैज्ञानिक इस क्षेत्र में होने वाले बदलावों का नियमित अध्ययन कर रहे हैं

ताकि यहां की बर्फ के पिघलने और समुद्री जलस्तर के बढ़ने के खतरों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

अब आधुनिक तकनीक से हुए शोध से इसके साथ ही पता चला है कि

दरअसल इस पूरे वर्फीले अंटार्कटिका की विशाल पहाड़ियों और गहरे समुद्र के नीचे एक पूरा महाद्वीर ही दबा हुआ है।

जर्मनी और ब्रिटिश वैज्ञानिक इस इलाके के नीचे दबे पूरी महाद्वीप कैसी थी, इसका आकार तैयार करने का काम कर रहे हैं।

इसके लिए लगातार शोध चल रहा है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बल को नापने के लिए प्रारंभ हुए

एक अनुसंधान के दौरान यह तथ्य सामने आया है।

यूरोपिय वैज्ञानिकों का यह दल वर्ष 2009 से इस पर काम कर रहा है।

हर स्तर से प्राप्त आंकड़े तथा भूगर्भीय आंकड़ों के मदद से अभी जो त्रि आयामी मॉडल तैयार हुआ है,

वह भी इसके नीचे एक महाद्वीप के दबे होने का संकेत दे रहा है।

भारत की मिट्टी पूर्वी छोर के अंटार्कटिका से मेल खाती है

उस इलाके में गहराई तक खनन कर मिट्टी के नमूने एकत्रित करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यहां की प्राचीन मिट्टी भी समुद्री तट पर पायी जाने वाली मिट्टी के जैसी ही है।

इन्हें प्राचीन पृथ्वी का वह हिस्सा माना जाता है, जब निरंतर वर्षा के बाद मिट्टी तैयार होने लगी थी।

इसी नमूने के आधार पर यह बताया गया है कि दरअसल अंटार्कटिका और आस्ट्रेलिया भारत के ही हिस्से हैं।

जो बाद में अलग अलग होकर एक दूसरे से दूर चले गये हैं।

दूसरी तरफ अंटार्कटिका के पश्चिमी छोर की गहराई में पायी गयी मिट्टी, इन नमूनों से मेल नहीं खाती।

जिसके आधार पर यह समझा जा रहा है कि वर्तमान अंटार्कटिका का यह हिस्सा पृथ्वी के किसी दूसरे हिस्से के टूटने के बाद यहां आ जुड़ा है।

वैज्ञानिकों ने जो मॉडल बनाया है उसके मुताबिक दो करोड़ वर्ष पूर्व दरअसल पूरी पृथ्वी ही एक थी।

इस एकीकृत पृथ्वी को पानेजिया कहा गया है। बाद में यह टुकड़ों में बंटता चला गया है।

जिसकी वजह से अलग अलग इलाके अलग अलग महाद्वीप के तौर पर पहचाने गये।

वैज्ञानिक यह भी संभावना व्यक्त करते हैं कि पृथ्वी की गहराई में टेक्नोनिक प्लेटों के इधर उधर खिसकने की वजह से

भविष्य में भी इन तमाम वर्तमान महाद्वीपों का स्वरुप बदल सकता है।

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