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दुनिया का सबसे शक्तिशाली प्राणी है चींटी




  • क्रमिक विकास में मांसपेशियां विकसित हुई

  • प्राचीन काल में चींटियों के पंख हुआ करते थे

  • पांच हजार गुणा अधिक दबाव झेल सकता है

  • पंख हटे तो मजबूत मांसपेशियां विकसित हुई

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुनिया का सबसे शक्तिशाली प्राणी का नाम लेते ही हमारे जेहन में हाथी अथवा

किसी बड़े जानवर की तस्वीर उभरती है। लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि इस

दुनिया का चींटी सबसे शक्तिशाली प्राणी है। अमेरिकी प्रजाति की एक चींटी अपने कुल

वजन से पांच हजार गुणा अधिक दबाव झेल सकती है। दरअसल इन नन्हें आकार के रेंगने

वाले जानवरों पर निरंतर शोध के बाद उनके तमाम गुणों को विश्लेषित कर लेने के बाद

अब शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस वैज्ञानिक शोध का निष्कर्ष है कि अपने आकार

के मुकाबले सबसे अधिक ताकत रखने वाला प्राणी आखिर चींटी ही है। इसके लिए उसके

शरीर के हरेक हिस्से की मांसपेशियों का बारिकी से अध्ययन कर उनके कंप्यूटर मॉडल भी

तैयार किये गये थे। कंप्यूटर में दर्ज आंकड़ों के आधार पर जब विश्लेषण किया गया तो

यह पहली बार पता चला कि अमेरिका की जमीनी चींटी अपनी गरदन पर अपने कुल

वजन से पांच हजार गुणा अधिक दबाव झेल सकता है। इसी वजह से चींटी अपने आकार

से बड़े प्राणियों अथवा भोजन सामग्री को अपनी पीठ पर उठाकर ले जाने की क्षमता रखते

हैं। ऐसी क्षमता दुनिया का कोई दूसरा प्राणी नहीं रखता।

दुनिया का सबसे शक्तिशाली 5000 गुणा दबाव झेल सकता है

इस शोध के जारी रहने के दौरान ही चींटियों के क्रमिक विकास के गुणों और उनमें हुए

बदलावों की भी जानकारी मिली। वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि प्राचीन काल की

चीटियों के पूर्वज दरअसल पंखधारी थे यानी वे उड़ सकते थे। अब जेनेटिक विश्लेषण का

यह काम जारी है, जो यह बतायेगा कि दरअसल चींटी उस लिहाज से जमीनी जानवर हैं

अथवा दरअसल किसी पक्षी के वर्तमान वंशज हैं। चींटियों के शरीर पर होने वाले यह पंख

लाखो वर्ष के बदलाव के दौरान गायब हुए हैं। दरअसल शोध का निष्कर्ष ही है कि इन्हीं

पंखों के गायब होने  के दौरान ही चींटी की शरीर की मांसपेशियां अत्यधिक विकसित हो

गयी हैं। इसी वजह से वे अपने कुल वजन से काफी अधिक वजन उठा भी सकते हैं। यानी

उड़ने की क्षमता गंवाने के बाद भी चींटी अपने वजन के हिसाब से सबसे अधिक

शक्तिशाली प्राणी है।

आम तौर पर अब तक चींटी पर जितने शोध हुए थे वे मुख्य तौर पर उनके सामाजिक

व्यवहार पर ही आधारित थे। उनका सामाजिक जीवन बहुत व्यवस्थित है और वे एक

कठोर अनुशासित जीवन जीते हैं। ओकिनवा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी

ग्रेजुएट विश्वविद्यालय के शोध दल ने पहली बार चीटिंयों के क्रमिक विकास और उसकी

शक्तियों पर यह रिसर्च किया है। इस शोध में पेरिस के सोरबोने विश्वविद्यालय की भी

भूमिका रही है, जहां के शोधकर्ताओं ने उसके मशीनी क्रियाकलापों को दर्ज किया है।

वर्तमान में यह पाया गया है कि आज भी सिर्फ उन चींटियों के पास पंख होते हैं जो बच्चे

पैदा करते हैं। खास तौर पर अंडा देने के मौसम में इन पंखों का इस्तेमाल होता है। लेकिन

आम तौरपर हमारे घरों में कहीं भी नजर आने वाला मजदूर चींटी अब पंखरहित है।

प्राचीन काल के बाद क्रमशः पंख गायब हो गये

यह उल्लेख भी महत्वपूर्ण है कि इस शोध को दरअसल डॉ क्रिस्टियन पीटर्स ने प्रारंभ

किया था। वह फ्रांस के नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एजेंसी के वैज्ञानिक थे। इस काम के

प्रारंभ होने पर एक्स रे इमेजिंग की मदद से चीटियों की शारीरिक संरचना को समझने की

कोशिश की गयी थी। लेकिन जब तक यह शोध पूरा होते डॉ पीटर्स की मौत हो गयी। उनके

सहयोगियों ने इसे बाद में जारी रखा और अब जाकर उसका नतीजा निकला है।

वैज्ञानिक अनुसंधान में यह पाया गया है कि जिन चींटियों के पंख होते हैं, उनके पंख ही

शरीर की मांसपेशियों के पचास प्रतिशत हिस्से को घेर लेते हैं। इस वजह से शरीर की अन्य

मांसपेशियों का विकास नहीं हो पाता है। दूसरी तरफ बिना पंख वाले मजदूर चींटियों की

मांसपेशियां दुनिया में सर्वाधिक विकसित और शक्तिशाली मांसपेशियों में हैं। क्रमिक

विकास के दौर में जब प्राचीन चींटी के पंख चले गये तो उनके स्थान पर इन मांसपेशियों

का विकास हुआ है। इसी वजह से वह आज किसी अन्य प्राणी के मुकाबले तुलनात्मक तौर

पर अधिक बोझ उठा सकता है और अधिक दबाव भी झेल सकता है। इसी गुण की वजह से

अपने अपने घरों यानी कॉलोनियों  तक बहुत अधिक वजन वाला भोजन भी उठाकर ले जा

सकते हैं।  इसके बाद अब इन्हीं चींटियों के दिमाग और अन्य शक्तियों की संरचना का

पता लगाने पर शोध अभी जारी है।

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