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म्यांमार की सेना अराकान की लड़ाई में आतंकी मुन्ना बरुवा ढेर

  • उल्फा प्रमुख परेश बरुवा ने कहा ठिकाने से गायब है

  • आराकान आर्मी नामक संगठन पर किया था हमला

  • इस आतंकवादी संगठन को चीन से मिलती है मदद

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: म्यांमार की सेना द्वारा अराकान आतंकवादियों के खिलाफ की गयी कार्रवाई में

उल्फा का एक आतंकवादी भी मारा गया है, ऐसी चर्चा है। म्यांमार की  सेना की रिपोर्ट के

अनुसार, म्यांमार की भूमि, वायु और नौसेना बलों के तीनों विंग ने आतंकवादी समूह के

खिलाफ समन्वित कार्रवाई की थी। कथित तौर पर, म्यांमार की सेना (तमदव) और

अराकान सेना (एए) के बीच पिछले सप्ताह अक्टूबर के महीने में राख़ीन राज्य के रथडांग

बस्ती में ताजा झड़पें हुई थीं, जिसमें दोनों पक्षों को भारी हताहतों का सामना करना पड़ा

था। भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि उल्फा के प्रमुख परेश बरुवा भतीजे मुन्ना

बरुआ उर्फ रूपक एक्सोम म्यांमार के इस संघर्ष में मारे गए। लेकिन उल्फा के प्रमुख परेश

बरुवा यह मानने के लिए तैयार नहीं है । भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि उल्फा के

प्रमुख परेश बरुवा भतीजे मुन्ना सहित उत्तर पूर्व की विद्रोही संगठन एनएससीएन-

आईएम के बहुत सारे नेता कर्मी इस संघर्ष में निधन हुआ है । रिपोर्ट के अनुसार,किसी भी

तरह की बातचीत के विरोधी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) ने चीन को अपना

नया ठिकाना बनाया है। केंद्र सरकार ने गुवाहटी के ट्राइब्यूनल को हलफनामा सौंपा है,

जिसके अनुसार संगठन ने अपने ठिकाने को म्यांमार से हटा लिया है।

म्यांमार की सेना के भय से नया ठिकाना अब चीन में 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उल्फा (I) चीफ परेश बरुआ ने म्यांमार की सीमा से सटे

दक्षिणी चीन के रुइली में नया ठिकाना बनाया है। उग्रवादी संगठन का ऑपरेशनल बेस

और ट्रेनिंग कैंप म्यांमार के सागैंग सब-डिवीजन में है। एक अलग हलफनामे में असम

सरकार ने बताया है कि टाका में इन उग्रवादियों के कैंप पर म्यांमार सेना के ऐक्शन के

बाद जनवरी 2019 में कैंप तबाह हो गया था। कई सारे कैडरों ने भी संगठन का साथ छोड़

दिया। सागैंग सब-डिवीजन में उल्फा ने नागा संगठन नागालैंड का सबसे सशस्त्र विद्रोही

समूह एनएससीएन-आईएम की मदद से 8 ऑपरेशनल कैंप तैयार किए थे, जिनकी सूची

राज्य सरकार ने सौंपी है।हाल ही में जानकारी मिली है कि उल्फा (आई) नेता मुन्ना बरुआ

उर्फ रूपक एक्सोम म्यांमार में अपने ठिकानों से गायब हो गया है। इसी जानकारी खुद

संगठन के सी-इन, परेश बरुआ ने दी है। बरुआ ने एक असमिया समाचार चैनल को फोन

किया और कहा कि उसका भतीजा मुन्ना म्यांमार के गहरे जंगल से लापता हो गया है।

उल्फा (आई) प्रमुख ने 24 वर्षीय मुन्ना की मौत के संबंध में मीडिया रिपोर्टों को भी रगड़ा

था। म्यांमार के घने जंगल में 29 अक्टूबर से लापता है। बरूआ ने बताया कि मुन्ना

अनिद्रा से पीड़ित था। हम पिछले सात दिनों से उसकी तलाश कर रहे हैं। उल्फा के प्रमुख

बरुआ का बयान मीडिया रिपोर्ट आया है कि मुन्ना म्यांमार के घने जंगल में मारा गया।

मुन्ना वर्ष 2018 में इस आतंकी संगठन से जुड़ा था

जानकारी के लिए बता दें कि मुन्ना नवंबर, 2018 में एक अन्य युवा के साथ म्यांमार में

स्थित उग्रवादी संगठन उल्फा में शामिल हुआ था। मुन्ना एक जूनियर इंजीनियर के रूप

में सेवारत था और संगठन में शामिल होने से पहले डिगबोई रिफाइनरी में अपनी प्रशिक्षुता

कर रहा था।

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