fbpx Press "Enter" to skip to content

कोरोना संकट के बीच मौसम का वायु प्रदूषण यानी दोहरा खतरा

कोरोना संकट के बीच उसके दोबारा बढ़ने की आशंका पर पहले ही जारी की जा चुकी

हैं। दरअसल लोगों को भी राहत मिलने की राह नजर आते ही यह सारी गड़बड़ी हुई है।

कोरोना संकट से बचाव के लिए जो प्रावधान सुझाये गये थे, उनका सही तरीके से पालन

नहीं हो रहा है। खासकर उत्तर भारत इन दिनों वायु गुणवत्ता के मामले में मुश्किल

हालात से गुजर रहा है। इसका 60 करोड़ लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस

समस्या का समाधान करना नीति निर्माताओं के लिए पूरी तरह संभव है। डाक्टरों ने पहले

ही वायु प्रदूषण के साथ कोरोना संकट के बढने की आशंका बता दी थी। इससे कोरोना

संक्रमण हवा के माध्यम से भी फैलता है। इसलिए इस परेशानी से निजात पाने का एक

प्रमुख तरीका हवा में धूल की मात्रा को कम करना है। लेकिन हमारे देश में इसके बारे में

पर्याप्त वैज्ञानिक आंकड़े भी नहीं हैं कि हम तुरंत इस पर कोई नीति तैयार कर सके। इसके

पुख्ता सबूत हैं कि पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाने के पीछे वर्ष 2009 में जल संरक्षण

के इरादे से बनाए गए कानूनों की बड़ी भूमिका है। इन राज्यों में पराली जलाने की

घटनाओं में तेजी 2009 के बाद ही आई है। लिहाजा दोनों ही राज्यों को अपने ये कानून

निरस्त करने की जरूरत है। उत्तर में हिमालय और दक्षिण में दक्खन के पठार के बीच

उत्तर भारत के गंगा के मैदान एक कटोरे की तरह हैं। मॉनसून का असर कम होने के बाद

हल्की हवा एवं बारिश ही रह जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि हवा में धूल बढ़ती

जाती है और वहां देर तक रहती है।

कोरोना संकट के बीच प्रदूषण का कारण इंसान ही है

बीते दशक में इंसानी क्रियाकलापों की वजह से हवा में धूल की मात्रा पहले की तुलना में

बढ़ी है और आज एक स्वास्थ्य आपदा बन चुकी है। दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित पांच

शहरों में से चार सिंधु-गंगा के मैदान में ही स्थित हैं। वायु गुणवत्ता का खराब होना केवल

सांस की तकलीफों के ही लिए समस्या नहीं है, यह इंसानी सेहत के लिए दूसरी तरह की

समस्याएं भी पैदा करता है जिनमें बुजुर्गों की गिरती सेहत भी शामिल है। सिंधु एवं गंगा

नदी के मैदानी इलाकों में करीब 60 करोड़ की आबादी रहती है और पिछले दशक में हवा

की गुणवत्ता खराब होने से इतने लोगों की सेहत के लिए एक बड़ा संकट पैदा हुआ है।

भारत में स्वास्थ्य नीति की एक अहम प्राथमिकता यह है कि वायु गुणवत्ता को 15 साल

पहले के स्तर पर ले जाया जाए। हम हवा एवं बारिश को तो नहीं बदल सकते हैं, हमारे हाथ

में केवल इतना ही है कि हवा में धूल फैलाने वाले क्रियाकलापों पर लगाम लगाई जाए।

चीन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने को लेकर बदनाम हुआ करता था लेकिन उसने

इस दिशा में प्रगति की है। मसलन, दिल्ली में पिछले दिनों पीएम 2.5 मानक का स्तर 158

से लेकर 565 तक रहा जबकि इसी अवधि में पेइचिंग में इसका स्तर 109 से 184 तक ही

रहा। सतत स्रोत विभाजन के लिए सांख्यिकीय ढांचे की स्थापना चीन को वायु गुणवत्ता

के मोर्चे पर बेहतर मुकाम हासिल करने में अहम घटक बनकर उभरी है। यह तथ्य

महत्वपूर्ण है कि सिर्फ 15 साल पहले ही उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता काफी बेहतर हुआ

करती थी और इस अवधि में ही कुछ ऐसा हुआ है जिसने वायु गुणवत्ता संकट पैदा किया

है।

ऑफिस में बैठकर नहीं खेत पर किसानों का कष्ट समझना होगा

किसानों ने यह दलील दी है कि राज्य सरकारों के नीतिगत कदमों की वजह से खरीफ एवं

रबी फसलों के बीच के दिनों में कमी आई है और इसके चलते खेतों को जल्दी से साफ

करने के लिए किसानों में पराली को जलाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। शोधकर्ताओं का कहना है

कि इन कानूनों के आने से पराली जलाने की प्रवृत्ति में जबरदस्त तेजी देखी गई है।

इसकी वजह से पराली जलाने का वक्त भी 24 अक्टूबर से लेकर 4 नवंबर हो गया जब

तापमान कम होता है और हवा की रफ्तार भी कम होती है। इसकी वजह से वायु गुणवत्ता

में 29 फीसदी की गिरावट आई। जल संरक्षण के कई दूसरे तरीके भी हो सकते हैं और कृषि

विशेषज्ञ इनके बारे में पता कर सकते हैं। हमें खास तरह की आर्थिक गतिविधियां शुरू

करने के बारे में किसानों को आदेश देने की राज्य की बाध्यकारी शक्ति वाले नजरिये के

बजाय निश्चित रूप से नरम रुख वाले दखल की जरूरत है। कानून बने हुए 11 साल हो

चुके हैं और इस दौरान उत्तर भारत में साफ हवा होना तो बड़ी तेजी से बीतों दिनों की याद

बनती जा रही है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

3 Comments

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: