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किसानों को परेशान करने आई एक और बीमारी कोरोना के साथ साथ आब केले की फसल में फैला बनाना कोविड

  • केले की खेती के लिए है खतरनाक

नई दिल्ली: किसानों को परेशान करने के लिए अब दूसरी परेशानी आ रही है। देश के

किसान पहले से ही कोरोना लॉक डाउन में परेशान हैं। इस संकट के दौर में फसल और

खेती पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि केले की खेती में

टीआर-4 नाम का फंगस पाया जा रहा है कि जो कि केले के लिए काफी खतरनाक है। यही

नहीं वैज्ञानिकों का दावा है कि जिस तरह से कोरोना वायरस इंसानों के लिए खतरनाक है,

उसी तरह से यह फंगस केले की खेती के लिए उतना ही खतरनाक है। इस फंगस ने केले

की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। बता दें कि भारत केले का सबसे बड़ा उत्पादक

है। ताइवान से फैला ट्रॉपिकल रेस 4 यानि टीआर-4 की सबसे पहले पहचान ताइवान में की

गई थी, जिसके बाद यह एशियाभर में फैला और यहां से यह फंगस मिडिल ईस्ट होते हुए

अफ्रीका और लैटिन अमेरिका पहुंचा। यह फंगस पहले केले के पत्ते को नुकसान पहुंचाता

है, जिससे पत्ते पीले पड़ने लगते हैं और फसल आने से पहले ही खराब होने लगती है।

अभी तक इस फंगस का कोई इलाज सामने नहीं आ सका है। नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर

बनाना की डायरेक्टर एस उमा का कहना है कि आप इसे पौधों की दुनिया का कोरोना कह

सकते हैं। इसके हॉटस्पॉट बिहार और उत्तर प्रदेश में पाए गए हैं, जिसे हमे कंटेन करने की

कोशिश कर रहे हैं।

किसानों की परेशानी केले की खेती में नुकसानदायक

कोरोना जितना खतरनाक, नहीं है इलाज युनाइटेड नेसंश की फूड एंड एग्रीकल्चर

ऑगेर्नाइजेशन का कहना है कि टीआर-4 पौधों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक फंगस में

से एक है। जैसे कोविड-19 का कोई इलाज नहीं है, वैसे ही अभी तक इसका भी कोई इलाज

नहीं है। लिहाजा वैज्ञानिकों ने राय दी है कि पौधों को भी क्वारेंटीन किया जाए ताकि इसके

संक्रमण को रोका जा सके। इस फंगस की वजह से अभी तक दुनिया भर में 26 बिलियन

डॉलर की केले की फसल बर्बाद हो चुकी है। केला के चिप्स को स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स माना

जाता है और इसे पूरी दुनिया में निर्यात किया जाता है। ऐसे में इस वायरस की वजह से

केले के किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है।


 

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