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मणिपुर की राजधानी इंफाल में फिर से  बम धमाका







  • जनजातीय समूहों में टकराव बढ़ रहा है
  • अब भी उग्रवाद का गढ़ बना है मणिपुर
  • हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : मणिपुर  की राजधानी इम्फाल से एक बम विस्फोट  की सूचना मिली है। बता दें कि यह बम धमाका मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले के लामलोंग बाजार में हुआ। विस्फोट में किसी के हताहत होने या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, एक दुकान, जिसे मेडिकल स्टोर बताया जा रहा है, विस्फोट में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। विस्फोट के बाद लगी आग पर काबू पाने के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।

इस बीच, पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी आतंकवादी समूह ने बम विस्फोट  की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस सुरक्षा की दृष्टि से घटनास्थल के आस-पास का क्षेत्र खाली करा चुकी है। इसके अलावा पुलिस ने इस बम धमाके के पीछे छिपे हमलावरों की तलाश भी शुरू कर दी है।मणिपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस  हमले से एक बात स्पष्ट हो गया है कि मणिपुर अब भी उग्रवाद का गढ़ बना हुआ है।

पूर्वोत्तर भारत में विद्रोह की घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, मणिपुर अभी भी उग्रवाद का गढ़ बना हुआ है। क्षेत्रीय-जमीनी संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश, पहचान बचाने की जद्दोजहद और सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) का क्रियान्वयन राज्य में हिंसा की मुख्य वजह है।मणिपुर में मैती, नगा, कुकी, जोमी और ह्मार आदि जनजातीय समूहों से जुड़े कई संगठन सक्रिय हैं। नगा, कुकी और मैती जनजाति का क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर आपस में संघर्ष चल रहा है। दरअसल, मैती समुदाय राज्य में ज्यादा प्रभावी है।

मणिपुर की राजधानी में अलग अलग समूह सक्रिय

नगा समुदाय की मांग है कि उसके कुछ हिस्से ग्रेटर नगालिम होमलैंड में शामिल किए जाएं।गृह मंत्रालय ने 2017 में संसद को बताया था कि मणिपुर में 35 मैती, नगा और कुकी समूह सक्रिय हैं। इनमें से 23 समूह दो संगठनों-यूनाइटेड प्रोग्रेसिव फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (केएनओ) के तहत काम करते हैं।

यूपीएफ और केएनओ अगस्त 2008 से सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौते का पालन कर रहे हैं।अगस्त 2021 तक गृह मंत्रालय ने मणिपुर में सक्रिय आठ विद्रोही समूहों को सूचीबद्ध किया था। इनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अलावा इसका राजनीतिक मोर्चा रिवोल्युशनरी पीपुल्स फ्रंट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट और सशस्त्र मोर्चे मणिपुर पीपुल्स आर्मी, पीपुल्स रिवोल्युशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपक, कांगलीपक कम्युनिस्ट पार्टी, कांगली याओल लांबा लुप, कोऑर्डिनेशन कमेटी, अलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलीपक और मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट शामिल हैं।

चूराचंद्रपुर में सुरक्षाबलों पर हुए हमले को लेकर कहा जा रहा है कि यह म्यांमार सीमा पर दूसरी कारोबारी चौकी स्थापित करने के खिलाफ दी गई चेतावनी है। दरअसल, विद्रोही समूह म्यांमार को अपनी सुरक्षित पनाहगाह समझते हैं। उन्हें लगता है कि क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियां बढ़ने से म्यांमार तक उनकी पहुंच मुश्किल हो जाएगी।



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