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एक और उल्कापिंड फिर पृथ्वी के काफी करीब से गुजरेगा




  • मात्र 49 हजार मील की दूरी पर होगा यह

  • इस दौरान चांद और पृथ्वी के बीच भी होगा

  • वर्ष 2095 में यह पृथ्वी के और भी करीब आयेगा

  • नासा की चेतावनी दूसरे उल्कापिंड के लिए जारी हुई है


प्रतिनिधि

नईदिल्लीः एक और उल्कापिंड तेजी से पृथ्वी की तरफ बढ़ता चला आ रहा है।

सौर जगत की गतिविधियों पर नजर रखने वाले खगोल वैज्ञानिकों ने इसकी गतिविधियों पर गौर करने के बाद यह चेतावनी जारी की है।

वैज्ञानिक अनुमान के मुताबिक यह उल्कापिंड आगामी 23 सितंबर 2022 को पृथ्वी के करीब होगा।

इस उल्कापिंड का नाम 2010 आरएफ 12 है। इस बार का आकलन है कि यह अपनी धुरी पर आगे बढ़ते हुए पृथ्वी के इतने करीब से गुजरेगा, जिसका पृथ्वी पर असर पड़ सकता है।

वर्तमान आंकड़ों के आधार पर ही अब वैज्ञानिक उल्कापिंडों की गतिविधियों पर नजर रखने की तकनीक को और उन्नत बनाने की मांग कर रहे हैं।

उनका मकसद इन उल्कापिंडों के पृथ्वी की तरफ बढ़ आने की स्थिति में और सटीक तरीके से उनकी दिशा और गति का आकलन करना भर है।

ऐसी मांग इसलिए भी की जा रही है ताकि पृथ्वी की सीध में आने वाले किसी भी उल्कापिंड को

काफी दूरी पर और समय रहते ही किसी अन्य उपाय से नष्ट अथवा दूसरी दिशा में धकेल देने का काम किया जा सके।

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने इस उल्कापिंड पर सबसे पहले गौर किया है।

इसके बाद ही यह अनुमान लगाया गया है कि यह उल्कापिंड पृथ्वी के काफी करीब पहुंचेगी।

पृथ्वी से इसकी सीधी टक्कर होने की कोई संभावना नहीं है। वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक

यह पृथ्वी से करीब 49 हजार मील की ऊंचाई से गुजर जाएगा।

इस दौरान वह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से होकर निकलेगा।

इसी वजह से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि इतने करीब से उसके गुजरने तथा चंद्रमा के बीच आने

की वजह से उसका प्रभाव पृथ्वी पर पड़ सकता है।

एक और उल्कापिंड के आने से पहले विश्लेषण हो चुका है

उल्कापिंड 2010 आरएफ12 का पता चलने के बाद उसका समग्र विश्लेषण भी किया जा रहा है।

अब तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस उल्कापिंड को पहली बार 5 सितंबर 2010 को देखा गया था।

उसी वक्त उसकी धुरी से यह संदेह उत्पन्न हुआ था कि यह पृथ्वी की धुरी के करीब आ सकता है।

तब से इस पर नजर रखी जा रही है। अब बताया जा रहा है कि यह पृथ्वी के सबसे करीब जब होगा

तब यह अंटार्कटिका के ठीक ऊपर से उड़ रहा होगा।

चांद और पृथ्वी के बीच से गुजरते वक्त इसकी दूरी मात्र 49 हजार मील ही होगी।

वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि इस बार उल्कापिंड के पृथ्वी के करीब से सुरक्षित निकल जाने के बाद भी

वर्ष 2095 में क्या होगा, यह कह पाना कठिन है। चूंकि यह उल्कापिंड घूमते हुए लगातार पृथ्वी की धुरी के करीब आ रहा है।

इसलिए अगले चक्कर में यह पृथ्वी के और भी करीब होगा।

उस वक्त दूरी बहुत कम होने की वजह से हो सकता है यह पृथ्वी के वायुमंडल के संपर्क में आने के बाद

पृथ्वी की तरफ ही आ जाए।

लेकिन तब भी यह आशंका 16 में 1 के जितनी ही है।

पृथ्वी पर इनदिनों उल्कापिंडों का आना थोड़ा तेज हो गया है




पृथ्वी पर छोटे मोटे उल्कापिंडों की बारिश होती ही रहती है।

गत 18 दिसंबर को भी एक उल्कापिंड बेरिंग सागर में जा गिरा था।

उस उल्कापिंड के गिरने से भी हिरोशिमा में गिराये गये परमाणु बम से दस गुणा

अधिक ऊर्जा निकली थी लेकिन यह एकांत इलाका होने की वजह से किसी को कुछ पता भी नहीं चला।

2013 में रुस के चेल्याबिंस्क में भी एक छोटा उल्कापिंड गिरा था।

जिसकी वजह से आसमान से शीशे की बारिश में अनेक लोग घायल हुए थे।

वैसे नासा ने एक और उल्कापिंड के आगामी 3 अक्टूबर 2019 को पृथ्वी के करीब से गुजरने की बात कही है।

वैज्ञानिकों ने इसके विशाल आकार का अनुमान लगाते हुए कहा है कि

भविष्य में यदि यह उल्कापिंड एफटी3 पृथ्वी की तरफ आ गया तो यह तबाही ला देगा।

55 खरब किलो वजन वाले इस उल्कापिंड के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के वक्त

उसकी गति 45 हजार मील प्रति घंटे से अधिक होगी।

करीब 340 मीटर चौड़ा यह उल्कापिंड अगर पृथ्वी पर आ गया तो निश्चित तौर पर तबाही आयेगी।


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