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पूर्वोत्तर में 35 भाजपा नेताओं ने पार्टी छोड़ने का एलान किया

  • 25 भाजपा विधायक पहुंचे मुख्यमंत्री से मिलने
  • कुछ मंत्रियों पर नियंत्रण लगाने की बात कही
  • सोनोवाल ने भाषाई सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन दिया
  • हिंसा फैलाने के पीछे कांग्रेस का हाथ बताया
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः पूर्वोत्तर में नागरिकता संशोधन कानून की आग थमने का

नाम नहीं ले रही है। इस क्षेत्र में अब इंटरनेट सेवा सीमित हाल में

बहाल होने के बाद कई राज्यों के भाजपा नेताओं को इस्तीफे की

सूचनाएं आ रही हैं। कुल मिलाकर करीब 35 भाजपा नेता खुद को पार्टी

से अलग कर चुके हैं। इस बीच आज भाजपा के 25 विधायक असम के

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से मिलने पहुंचे। इनकी मुलाकात का

मुद्दा उत्पन्न परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए कारगर कदम

उठाने के लिए अनुरोध करना ही था। इन बीजेपी विधायकों ने असम

के लोगों की मांग को पूरा करने के लिए सीएम सोनोवाल की मांग की।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ राज्य में अशांति

की स्थिति को देखते हुए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कम से

कम 25 विधायक मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के गुवाहाटी में

ब्रह्मपुत्र हाउस हाउस में पहुँचे थे। भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल

में पद्मा हजारिका, रितुपर्णा बरुआ, भास्कर सरमा, प्रशांत फूकन,

अशोक सिंघल, चक्र गोगोई, रूपक सरमा, सुरेन फूकन शामिल थे।

इससे पहले, प्रतिनिधिमंडल प्रशांत फुकन के निवास पर चल रही

अशांति पर चर्चा के लिए बैठा, जहां से वे सीएम के आवास की ओर

बढ़े। असम समझौते के खंड 6 को तुरंत लागू करने और “असमिया”

भाषा को सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर भाजपा नेताओं ने

सीएम से मुलाकात की।

पूर्वोत्तर में सबसे अधिक असर असम राज्य में

सीएम से मुलाकात के बाद, बीजेपी नेता पद्म हजारिका ने कहा कि

उनके इस प्रतिनिधिमंडल ने असमिया भाषा को संरक्षित करने की

मांग की है, और इसे राज्य भाषा घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने

कहा कि राज्य में स्थिति को देखने के बाद, प्रतिनिधिमंडल ने सीएम

सोनोवाल से राज्य में अशांति को रोकने के लिए तुरंत उपाय करने का

आग्रह किया है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि यद्यपि

असम समझौते के खंड 6 के कार्यान्वयन के लिए एक समिति का

गठन किया गया था, प्रक्रिया सुस्त रही है, और समिति से अपनी

रिपोर्ट संकलित करने की प्रक्रिया को जल्द करने का आग्रह किया।

पद्मा हजारिका ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कुछ मंत्रियों के

लिए राज्य में ऐसी अपमानजनक स्थिति देखी गई है। इस पर तुरंत

अंकुश लगाने की जरूरत है, हज़ारिका पर जोर दिया गया है। दूसरी

ओर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गत दिनों से राज्य

तथा पूरे पूर्वोत्तर में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के पीछे विपक्षी कांग्रेस

और ‘सांप्रदायिक ताकतों’ का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान

तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सोनोवाल ने कहा सब कांग्रेस की साजिश है

सोनोवाल ने कहा कि हिंसा भाजपा नीत असम सरकार के खिलाफ

राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के मूल

निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई।

सोनोवाल ने संवाददाताओं से कहा , ‘कांग्रेस और कुछ सांप्रदायिक

ताकतें पूर्वोत्तर में घटित होने वाली इस  हिंसा के पीछे है. यहां तक कि

कुछ उग्र वामपंथी भी भीड़ में शामिल हैं। यह राजनीतिक साजिश है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी और जो भी

तोड़फोड़ में शामिल होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 के खिलाफ राज्य में बीते तीन

दिन से जारी हिंसा के संबंध में मुख्यमंत्री ने यह बात कही। लोकसभा

और राज्यसभा से पारित होने और राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद

अब यह विधेयक कानून का स्वरूप ले चुका है।

सोनोवाल ने कहा, ‘मैं मूल लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध

हूं और भरोसा देना चाहता हूं कि उनके हितों को नुकसान नहीं

पहुंचेगा।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को अहिंसक लोकतांत्रिक

प्रक्रिया से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में तोड़फोड़ की

घटना करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने लोगों से की शांति बनाये रखने की अपील

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग गलत सूचना पहुंचा कर लोगों को भ्रमित

करने और स्थिति को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं सभी से

अपील करता हूं कि वे ऐसा कुछ नहीं करें जिससे शांति भंग

हो.’सोनोवाल ने राज्य के लोगों से कहा कि वे संशोधित नागरिकता

कानून से चिंतित नहीं हों क्योंकि लोगों की पारंपरिक संस्कृति, भाषा,

राजनीतिक और भूमि अधिकार की रक्षा असम समझौते के खंड-छह

के जरिये की जाएगी। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश विप्लव

शर्मा के नेतृत्व में समिति बनाई गई है जिसे असम के लोगों को

संवैधानिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अनुशंसा करने की जिम्मेदारी

दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है

कि खंड-छह पर गठित समिति की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू

किया जाएगा।

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