fbpx Press "Enter" to skip to content

एंजेली मर्केल का चरित्र भारतीय परिस्थिति के संदर्भ में




एंजेली मर्केल जिन्हें एंजेलिका मर्केल भी कहा जाता है अगले सितंबर को जर्मनी के

चांसलर का पद छोड़ देंगी। उन्होंने लगातार 18 सालों तक जर्मनी की सत्ता को अपने

नियंत्रण में रखा है। देश में चल रहे किसान आंदोलन के संदर्भ में इस महिला का उल्लेख

प्रासंगिक है। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन प्लेटफार्म के मालिक अभिव्यक्ति की

स्वतंत्रता को तय नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि विचारों का स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है

और इसे किसी भी कीमत पर बाधित नहीं किया जाना चाहिए। इसे कानून के माध्यम से

और विधायिका के परिभाषित ढांचे के भीतर की कम या बंद किया जा सकता है। यह वह

महिला कह रही हैं जिन्होंने अपनी राजनीति साधने के लिए विरोधियों पर कोई आरोप भी

नहीं लगाये हैं। यह जान लेना भी प्रासंगिक है कि जर्मनी जैसे कर्मप्रधान देश में भी इस

महिला के सम्मान में पूरा देश छह मिनट तक तालियां बजाता रहा है। हमलोगों ने भी

कोरोना संकट के दौरान तालियां और थालियां बजायी थी। जर्मनी की आठ करोड़ जनता

को उन्होंने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच एक मजबूत अर्थव्यवस्था, बेहतर जीवन

और सामाजिक सुरक्षा का आवरण प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन अठ्ठारह

वर्षों में उनके खिलाफ एक भी अनैतिक काम का आरोप तक नहीं लगा है। उनके खिलाफ

अपने स्वजनों को लाभ पहुंचाने का भी कोई आरोप नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने

इन तमाम उपलब्धियों के लिए अपने लिए कोई श्रेय भी नहीं लिया है। उनके पक्ष में या

खिलाफ कोई जुलूस नहीं निकला है। साइबर मोर्चे पर उनके खिलाफ लगातार प्रचार

चलता तो रहा है लेकिन जर्मनी के बहुमत ने इनपर कोई ध्यान नहीं दिया है।

एंजेली मर्केल ने सत्ता हथियाने की कोई साजिश नहीं रची

अपनी सत्ता बनाये रखने के लिए एंजेली मर्केल ने कोई अनैतिक हथकंडा नहीं अपनाया

है। विरोध के बाद भी अपने विरोधियों पर सरकारी एजेंसी अथवा गुंडे नहीं लगाये गये हैं।

जर्मनी जैसे गंभीर विचारों वाले देश ने कभी उनकी जुबान से कोई बेवकूफों जैसी बात नहीं

सुनी। उन्होंने कभी कोई झूठा आश्वासन नहीं दिया। देश की तरक्की का श्रेय लेने के लिए

गलत आंकड़े भी पेश नहीं किये। देश में अपने और अपनी पार्टी के प्रचार के लिए कोई

तस्वीर भी नहीं जारी किया था। साथ ही अपने विरोधियों के खिलाफ अनर्गल आरोप भी

नहीं लगाये थे। इसी महिला ने एकछत्र शासन के बाद चुपचाप राजनीति से खुद ही हट

जाने का फैसला लिया। उनकी घोषणा से पूरा देश स्तब्ध तो हुआ है क्योंकि राजनीति में

उनके विकल्प की कभी चर्चा तक नहीं हुई थी। इसी वजह से उनके फैसले के प्रति सम्मान

देने के लिए पूरा देश छह मिनट तक तालियां बजाता रहा है। हर कोई अपने अपने स्थान

पर खड़े होकर यह सम्मान प्रदर्शित कर एक नई पहचान का प्रदर्शन करने में सफल रहा

है। उनकी तारीफ में किसी कवि ने कोई कविता नहीं लिखी है, किसी ने ने उनकी तस्वीरों

में महिमा मंडन नहीं किया है। इसके बाद भी अपने तमाम अंतर्विरोधों के दरकिनार कर

पूरा देश उनके सम्मान में तालियां बजाता रहा है। इस बात का उल्लेख भारत में चल रहे

किसान आंदोलन के संदर्भ में अधिक प्रासंगिक है क्योंकि कई बार हमें जबरन किसी को

अच्छा समझने का ज्ञान बांटा जाता है। यह पूर्व की जर्मनी के नाजी शासन की

कारगुजारियों के इतिहास की याद दिला जाता है। पूर्वी जर्मनी की निवासी एंजेली मर्केल

हमेशा ही साधारण जीवन में रहने की अभ्यस्त रही हैं।

वाकई साधारण जीवन जीती रही लगातार

उन्हें एक सामान्य किस्म के सूट पहले देख किसी पत्रकार ने उनसे पूछ लिया था कि क्या

उनके पास दूसरा सूट नहीं है क्या। इसके उत्तर में एंजेली मर्केल ने कहा था कि वह

राजनीति करती हैं. किसी मॉडलिंग के पेशे में नहीं हैं। उनके जीवन में उनकी अपनी एक

सामान्य सी गाड़ी है। औसत मध्यवित्त परिवार की हैसियत की एक अपार्टमेंट में रहती

हैं। राजनीति में आने के पहले और अब तक उनके जीवन में कोई बदलाव नहीं देखा जा

सका है। घर का सारा काम काज वह अपने पति के साथ मिलकर करती रही हैं। इस

महिला ने राजनीति में पिछले दरवाजे से जनता को प्रभावित करने की साजिशों पर साफ

साफ कहा है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मालिक यह तय नहीं करेंगे कि किस

देश की राजनीति कैसी हो। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस में एंजेली मर्केल के

इस बयान की गंभीरता को समझा जा सकता है। एंजेला मर्केल ने कहा कि विचारों की

स्वतंत्रता प्राथमिक महत्व का एक मौलिक अधिकार है, और इस मौलिक अधिकार के

साथ हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। भारत में जारी किसान आंदोलन और उसके संदर्भ

में प्रचार और कुप्रचार के बीच एंजेली मर्केल एक सही उदाहरण हमारे सामने हैं। जिन्होंने

बेदाग रहते हुए अपने दम पर राजनीति की और बिना कोई आरोप लगे ही अब सक्रिय

राजनीति से विदा हो रही हैं।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »

Be First to Comment

... ... ...
%d bloggers like this: