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प्राचीन इलाके वीरान क्यों पड़ गये विषय पर शोध का एक नतीजा यह भी

  • इंसानों की बस्ती पहले भी तबाह होती रही है इंसानी गलतियों से

  • उस काल का प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था

  • भारतीय व्यापार पानी के रास्ते यहां हुआ करता था

  • मौसम बदला तो सारे जलस्रोत अपने आप सूख गये

राष्ट्रीय खबर

रांचीः प्राचीन इलाके में अनेक ऐसे इलाके हैं, जिनकी खुदाई से यह पता चल जाता है कि

वहां पहले इंसान रहा करते थे। जब शोधकर्ताओँ ने इन इलाकों की जांच की तो वहां से

प्राचीन उपकरण और बरतनों से वहां इंसानों की आबादी होने की पुष्टि हो गयी। आखिर

लोगों ने इस इलाके को अचानक छोड़ क्यों दिया था, यह सवाल पहले से ही वैज्ञानिकों को

हैरान करता रहा है। कई बार वहां आयी भीषण प्राकृतिक आपदाओँ की वजह से प्राचीन

इलाके  की इंसानों की बस्ती पूरी तरह नष्ट होने के प्रमाण मिले हैं। इसके दायरे में पंपोई

जैसे शहर आते हैं, जो प्राचीन काल में ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से लावा के अंदर पूरी

तरह दब गये थे। लेकिन इसके अलावा भी अनेक ऐसे इलाके थे, जो किसी ऐसे हादसे का

प्रमाण नहीं देते थे। इसी वजह से इस बात पर लगातार शोध दल रहा था कि आखिर सब

कुछ ठीक होने के बाद भी इंसानों ने उन प्राचीन इलाके को छोड़ने का फैसला क्यों किया

था। अब इजिप्ट के एक शहर का पता चला है। करीब 21 सौ वर्ष पूर्व यह इलाके का सबसे

बेहतर व्यापारिक केंद्र था। उस काल का यह बंदरगाह होने की वजह से व्यापार का सबसे

बड़ा केंद्र था। फिर भी यह अचानक से वीरान क्यों हो गया, उस पर हुए शोध का नतीजा है

कि वहां किसी ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भीषण अकाल पड़ गया था। इसके साथ

ही इंसानों की आबादी बढ़ने के साथ साथ प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की हमारी बुरी

आदतों ने उस इलाके को पूरी तरह तबाह कर दिया था। वहां का जलस्रोत अचानक सूख

जाने के बाद इलाका छोड़कर चले जाने के अलावा उस दौर के लोगों के पास कोई और चारा

नहीं बचा था।

प्राचीन इलाके में टिके रहना लोगों के लिए असंभव हो गया था

मिस्र के फराह के शासनकाल में यह शहर शायद 275 बीसी में बसाया गया था। यह उस

दौर का सबसे व्यस्त और वैभवपूर्ण शहर हुआ करता था। लेकिन वहां आबादी बसने के

बाद 209 बीसी में अचानक ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था। इससे जो गैस और राख

निकली, उसके पूरे इलाके के मौसम और पर्यावरण को ही बदलकर रख दिया। लगातार

कई सालों तक सूखा पड़ने के बीच लोगों की बुरी आदतों की वजह से वहां जल संरक्षण का

कोई इंतजाम नहीं किया गया था। अब हुए खोज में यह पता चला है कि उस शहर की

जलापूर्ति का मुख्य स्रोत ही सूखता चला गया। जब यह पूरी तरह सूख गया तो वहां रहने

वालों के लिए पीने के पानी तक का कोई इंतजाम नहीं होने क वजह से ही आबादी को वहां

से हट जाना पड़ा। कई सौ वर्षों तक इसी अवस्था में होने की वजह से यह इलाका धीरे धीरे

खंडहर बना और बाद में रेत के अंदर धंसता चला गया। जिस पुराने शहर की खोज हुई है

उसे बेरेनिका कहते हैं। इसका पता चल जाने के बाद इस वेरेनिका शहर और आस पास के

इलाकों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी हुआ है। चूंकि वहां की खुदाई में बरतन और अन्य

सामान मिले हैं, उससे साफ है कि किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से यह शहर तबाह नहीं

हुआ था क्योंकि सारे बरतन और अन्य सामान यथावत ही हैं। मिस्र के पश्चिमी छोर पर

रेड सी के करीब बसाया गया यह शहर उस दौर के उन्नत किस्म की जलापूर्ति की

व्यवस्था पर निर्भर था। इतिहासकारों का अनुमान है कि उस काल के मैकडोनियन फराओ

2 ने अपनी माता वेरेनिस के नाम पर यह शहर बसाया था।

पानी खत्म होने के लिए भी इंसानी आदत जिम्मेदार रही

अनुसंधान आगे बढ़ा तो यह पता चला कि ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से वहां का

मौसम चक्र भी थम सा गया था। बारिश नहीं होने की वजह से नील नदी के जल का प्रवाह

थम जाने की वजह से इस शहर के जलापूर्ति के स्रोत भी खत्म हो गये। यह नील नदी आज

भी मिस्र सहित कई देशों की कृषि का मूल आधार है। इतिहास बताता है कि यह बंदरगाह

वाला शहर उस वक्त भारत के साथ व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र था और उस दौर में पूरी

दुनिया में भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही मजबूत अवस्था की थी। सूखा और अकाल पड़ने

की वजह से वहां विद्रोह भी हुए। अब खुदाई से जब वहां के जलस्रोतों का पता चला तो देखा

गया कि जहां जल भंडारण होता था, उसकी दीवारों पर चूना का लेप लगाया जाता था।

इससे पानी साफ करने की विधि उस काल में ही होने की पुष्टि हो जाती है। व्यापार केंद्र के

तौर पर तेजी से विकसित होने की वजह से उस वक्त इस प्राचीन इलाके के शहर की

आबादी भी तेजी से बढ़ती चली गयी जबकि जल की आपूर्ति उस अनुपात में नहीं बढ़ी।

इसलिए जब संकट आया तो सभी पर इसका एक जैसा असर पड़ा। इस शोध के आधार पर

वैज्ञानिकों ने इस बात के लिए आगाह किया है कि वर्तमान दौर में भी आधुनिक और अति

विकसित शहरों के साथ यही स्थिति है, जहां पर्यावरण और जल संरक्षण पर लोग ध्यान

हीं देते हैं। लेकिन वेरेनिका शहर का इतिहास यह बताता है कि नदियों को ठीक रखने के

साथ साथ जल संरक्षण किये बिना इंसान कभी भी अपने बसे बसाये इलाके को छोड़ने पर

मजबूर हो सकता है।

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