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प्राचीन मछलियों के अवशेषों में हाथ की ऊंगलियां मिली

  • पानी से जमीन पर ऐसा आया जीवन

  • कनाडा के क्यूबेक में मिली फॉसिल

  • इस अवशेष के हाथ नजर आते हैं

  • जीवन के क्रमिक विकास की कड़ी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः प्राचीन मछलियों से अब जीवन के क्रमिक विकास पर नई रोशनी पड़ी है।

इस बारे में कुछ अवशेष मिलने की वजह से ऐसा माना जा रहा है कि पानी से धरती पर

जीवन के विकास का क्रम यही से शायद प्रारंभ हुआ था। हम पहले से ही इस बात को

वैज्ञानिक तौर पर जानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन का विकास सबसे पहले पानी में ही हुआ

था। उस दौरान पूरी पृथ्वी की सतह पर जल ही जल था। उल्कापिंड के गिरने और पृथ्वी

के अंदर की उथल पुथल की वजह से जमीन का टुकड़ा जब बाहर निकला तो पानी का

जीवन जमीन पर भी आ गया। लेकिन यह कैसे हुआ इस बारे में इससे पहले कोई पक्की

जानकारी नहीं मिल पायी थी। करीब 380 मिलियन वर्ष पहले के प्राचीन मछलियों के

फॉसिल्स से इस पर रोशनी पड़ी है। क्यूबेक के मिगुआशा नेशनल पार्क में खुदाई के

दौरान यह अवशेष मिले हैं।

जिस प्राचीन मछलियों की प्रजाति का यह अवशेष है, उसे वैज्ञानिक भाषा में

एलिपिस्टोसेज वाटसोनी (Elpistostege watsoni) कहा जाता है। अवशेष को देखकर

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह मछली आकार में करीब 1.6 मीटर लंबी थी।

उसके अवशेष यह बताते हैं कि यह जलज जीवन में ऊंगलियों के विकास की पहली कड़ी

है। जो अवशेष मिले है, उसमें यह मौजूद है। यानी पानी के जीवन में हाथ और ऊंगलियों

के विकास की कड़ी तब प्रारंभ हो चुकी थी।

प्राचीन मछलियों के अवशेष क्यूबेक के पास पाये गये

क्यूबेक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और प्रोफसर रिचर्ड क्लाउटियर कहते हैं कि जीव

विज्ञान में यह महत्वपूर्ण जानकारी है। इससे कमसे कम यह तो फिर से प्रमाणित हो

रहा है कि पानी से ही जीवन का क्रमिक विकास आगे बढ़ता हुआ जमीन पर आया था।

वर्तमान प्रजाति की मछलियों में जो पंख (फिन) पाये जाते हैं, प्राचीन काल में इसी पंख

के बदला हुआ स्वरुप हाथ था। वैसे पहले ही इस बात के प्रमाण भी मिल चुके हैं कि अति

प्राचीन काल में इस धरती पर मौजूद सांपों के भी पैर हुआ करते थे। रिचर्ड के साथ इस

शोध में मिशेल हाचै और फिलिप डुरानलिउ गांगोन भी शामिल थे। इनलोगों ने मिलकर

इस फॉसिल के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है।

इस खोज से यह स्पष्ट हो जाता है कि पानी के जीवन यानी प्राचीन मछलियों से चार

पैरों वाले जानवरों का विकास का रिश्ता रहा है। इसी तरह शायद मेढ़क भी विकसित हुए

हैं। जिनकी एक प्रारंभिक प्रजाति टेट्रोपॉड इसी तौर पर है। उनके हाथ की ऊंगलियां और

हाथ भी बिल्कुल मछलियों के पंख जैसे ही हैं। इस प्रजाति का सबसे बड़ा फॉसिल इसी

पार्क के अजायबघर में रखा हुआ है। इसमें फॉसिल का आकार करीब 200 मीटर है।

इसके पहले भी इस प्रजाति के अवशेष दुनिया के अन्य भागों में पाये गये लेकिन उनमें

से कोई भी पूरा सुरक्षित नहीं था। इस वजह से वैज्ञानिकों को इस शारीरिक संरचना को

समझने का मौका पहले नहीं मिल पाया था। अजायबघर में रखा दो सौ मीटर लंबा

फॉसिल भी पत्थरों के बीच 22 टुकड़ों में मिला था। जिनमें से कई हिस्से गायब भी थे।

प्राचीन मछलियों का एक विशाल फॉसिल म्युजियम में हैप्राचीन मछलियों

इस नये अवशेष के मिलने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पृथ्वी के जलज

और मिट्टी के प्राणियों में कुछ संरचना अब भी समान है। मसलन सभी की रीढ़ लगभग

एक जैसी है। लेकिन शोधकर्ता मानते हैं कि रीढ़ का भी क्रमिक विकास हुआ है और

उनकी संरचना भी धीरे धीरे बदलती चली गयी है। फिर भी मूल स्वरुप में वह एक जैसा

ही है। लेकिन हाथ के विकास के बारे में यह जानकारी मिलने के बाद शोधकर्ता इन्हीं

तथ्यों के आधार पर आगे की कड़ियों को जोड़ने का काम कर सकते हैं। इससे स्पष्ट हो

जाता है कि जमीन पकड़कर आगे बढ़ने के काम में यही हिस्सा कारगर होता था जो

जरूरत के लिहाज से बाद में विकसित होता चला गया। इस क्रमिक विकास के दौर में

मछली भी गहरे पानी से धीरे धीरे कम गहराई वाले पानी के इलाकों में आयी और वहां

से जैसे जैसे हाथों का विकास हुआ वह जमीन पर जाती चली गयी। आज भी भारतवर्ष

में मछलियों की कई प्रजातियां ऐसी हैं, जो अपने पंख की मदद से पेड़ों तक पर चढ़

जाया करती हैं। इसी वजह से उन्हें अब बिना पानी के काफी दिनों तक जिंदा रहने की

आदत भी हो चुकी है। इस बारे में वैज्ञानिक मानते हैं कि जमीन से मिट्टी पर आने के

दौरान यह जीवन पहले घिसटता रहा। उसके बाद उसके पंख हाथ और पैर में तब्दील

होते चले गये और वह धीरे धीरे जमीन के सतह पर रहने वाले अलग प्रजाति के प्राणी के

तौर पर विकसित हुए और पानी और जमीन का जीवन अलग अलग हो गया। कुछ इसी

तरह जिसमें यह माना जाता है कि विशालकाय ह्वेल भी पहले जमीन पर रहा करती थी

लेकिन बाद में उसने खुद में बदलाव कर खुद को पानी में रहने वाला प्राणी बना लिया।


 

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