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प्राचीन पृथ्वी का एक महादेश यूरोप से ग्रीन लैंड तक फैला था

  • हीरों की तलाश में मिले इसके प्रमाण

  • ग्रीनलैंड के बाफना द्वीप में हुआ शोध

  • उत्तरी अमेरिका में भी ऐसे ही पत्थर

  • हीरे के नमूनों के साथ मिट्टी के नमूने मिले

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः प्राचीन पृथ्वी की संरचना पर हो रहे शोध में नये नये तथ्य सामने आ रहे हैं।

पहली बार हीरे के नमूनों के पास मिली मिट्टी से इस बात की पुष्टि हुई है कि एक और

महादेश भी था जो आकार में बहुत बड़ा था। दरअसल एक ही किस्म के पत्थर पाये जाने

की वजह से वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि आज जो अलग अलग महाद्वीप हैं, वे

प्राचीन पृथ्वी में एक ही थे। बाद में वे एक दूसरे से अलग हो गये। दूसरी तरफ एक और

महाद्वीप इसी उथल पुथल के बीच दो महाद्वीपों के बीच दबकर नीचे चला गया।

बाफिन द्वीप पर मिले हीरे के टुकड़ों के साथ ही खनन कार्य से जुड़े लोगों ने इन नमूनों

को एकत्रित किया है। इन नमूनों के वैज्ञानिक विश्लेषण से इस बात की जानकारी मिली

है कि वे करीब 2.7 बिलियन वर्ष पूर्व प्राचीन पृथ्वी के एक ही हिस्से थे। शोध से इस

महाद्वीप का पता चलने के बाद वैज्ञानिकों ने अपनी परिकल्पना में संशोधन करते हुए

यह कहा है कि यह इलाका शायद पूर्व के अनुमान से करीब दस प्रतिशत ज्यादा बड़ा

था। कनाडा के वैज्ञानिकों ने जब हीरों से भरे इलाके की और खोज की तो प्राचीन पृथ्वी

के अन्य रहस्य भी खुलते चले गये। यह माना जा रहा है कि इस दौर के बाद ही प्राचीन

पृथ्वी की संरचना में बदलाव प्रारंभ हुआ और महाद्वीप आंतरिक कारणों से एक दूसरे

से अलग होते चले गये। वर्तमान संरचना जो नजर आती है, कुछ लाख वर्ष पहले भी

उसकी संरचना शायद ऐसी नहीं थी।

प्राचीन पृथ्वी की संरचना में बहुत बदलाव हुए हैं

ग्रीनलैंड के इलाके में हीरों की तलाश करने वाले इस बाफिन द्वीप पर जो पत्थर के

नमूने मिले हैं, वे ग्लेशियरों के नीचे दबे हुए थे। शोधकर्ता मानते हैं कि घने बर्फ के नीचे

होने की वजह से ही उनका रासायनिक तत्व कायम रह गये हैं। इन्हीं की मदद से

प्राचीन पृथ्वी में यह इलाका कहां से जुड़ा हुआ था, उसे समझ पाना संभव हुआ है।

पत्थर के इन्हीं टुकड़ों का विश्लेषण करने के बाद खनिज वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि

दरअसल यह हिस्सा पहले उत्तरी अमेरिका से जुड़ा हुआ था। यानी अमेरिका और ग्रीन

लैंड के उत्तरी छोर के इलाके उस प्राचीन पृथ्वी में एक साथ ही थे। जो बाद में किन्हीं

कारणों से एक दूसरे से अलग हो चुके हैं। वहां मौजूद किंबरलाइट पत्थरों के विश्लेषण

से यह नतीजा निकलकर आया है। आम तौर पर यह किंबरलाइट भी हीरा, रूबी जैसे

बेशकीमती पत्थरों के साथ ही पाया जाता है। पत्थरों से इन टुकड़ों के बनने की प्रक्रिया

भी हीरे के जैसी ही है। इससे पुरानी स्थिति का पता चल जाता है। जो पत्थर यहां पाये

गये हैं, उनके नमूने पहले से ही उत्तरी अमेरिका के इलाकों में मौजूद हैं। एक ही किस्म

के पत्थरों की उपलब्धता की वजह से यह माना जा रहा है कि पहले यह दोनों ही इलाके

एक साथ थे। इसी वजह से से अब अलग अलग होने के बाद भी उनमें किंबरलाइट के

पत्थर एक जैसी ही हैं। यानी इन पत्थरों का प्राकृतिक निर्माण एक साथ काफी पहले

हुआ है।

एक जैसा पत्थर उत्तरी अमेरिका के इलाकों में मौजूद

शोध से जुडी माया कोपिलोवा कहती हैं कि इन पत्थरों से यह भी पता चल जाता है कि

पृथ्वी के किस हिस्से का निर्माण किस अवस्था में और कितना पहले हुआ है। वह पहले

भी उत्तरी अमेरिका में पाये गये इन्हीं पत्थरों से जुड़े एक शोध में शामिल रही हैं। उनका

एक शोध प्रबंध इसी विषय पर ब्रिटिश कोलंबिया की विश्वविद्यालय के बेबसाइट पर

प्रकाशित हो चुका है। जहां से ताजा नमूने एकत्रित किये गये हैं वह बाफना द्वीप के

चिडलीक किंबरलाइट का इलाका है और दक्षिणी भाग में दस किलोमीटर के इलाके में

ऐसे नमूने एकत्रित किये गये हैं। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि जिस महाद्वीप

के आकार पर पहले सोचा गया था, वह दरअसल पूर्वानुमान से दस प्रतिशत ज्यादा बड़ा

रहा होगा। उब उसके कुछ हिस्से टेक्नोनिक प्लेटों की रगड़ की वजह से जमीन के अंदर

भी धंस गये हैं।


 

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