fbpx Press "Enter" to skip to content

ऑस्ट्रेलिया में अजीब किस्म के जानवर की सुरक्षित फॉसिल मिली




  • भालू के आकार का है प्राचीन विलुप्त प्राणी

  • 25 मिलियन वर्ष पहले समाप्त हुआ

  • आकार में काफी विशालकाय

  • बनावट में वोमवैट के जैसा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ऑस्ट्रेलिया में अजीब किस्म का प्राणी की फॉसिल नजर आने के बाद जीव

विज्ञानिकों का ध्यान उसकी तरफ आकृष्ट हुआ है। भालू के आकार का यह प्राणी अभी

धरती पर मौजूद वोमवैट के जैसा दिखता है लेकिन दोनों के आकार में बहुत अंतर है।

इसलिए यह कहा जा सकता है कि संरचना के मामले में यह वोमवैट का पूर्वज भी हो

सकता है। जो अब दुनिया से विलुप्त हो चुका है। लेकिन वोमवैट के आकार से यह प्राणी

करीब चार गुणा अधिक बड़ा है। खोजकर्ताओं ने इस प्राणी को ऑस्ट्रेलिया में एक नमक के

सूख हुए तालाब जैसे इलाके में खुदाई के दौरान यह अवशेष पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में

पाया गया है। इस संरचना के आधार पर ही शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह प्राणी

वजन में करीब सौ किलो से अधिक का था। इस वजह और संरचना में बदलाव की वजह से

उसे वोमवैट नहीं माना जा सकता है। कुछ लोग कहते हैं कि आकार प्रकार को देखने से यह

वोमपैट और कुआला के बीच का जानवर लगता है। लेकिन आकार की वजह से इन दो

प्राणियों के समानता रखने वाला यह प्राणी दोनों से ही आकार में काफी बड़ा था। विश्लेषण

से उसकी शारीरिक संरचना में कुछ और बदलाव भी प्रकट हुए हैं। मसलन उसके दांत पूर्व

में उल्लेखित दोनों जानवरों से मिल नहीं खाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में मुकुरपिरना यानी बड़ी हड्डियों वाला

वैज्ञानिकों ने इस अजीब से जानवर का नाम फिलहाल मुकुपिरना रखा है। स्थानीय स्तर

पर इसका अर्थ बड़ी हड्डियों वाला ही होता है। इस बारे में एक वैज्ञानिक शोध प्रबंध

वैज्ञानिक पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित की गयी है। शरीर के ढांचे को देखकर

वैज्ञानिक उसके बारे में आकलन तैयार करने में जुटे हुए हैं। इस जानवर को हाथ और पंजे

बहुत मजबूत थे और इसी वजह से वह अपनी हाथों से गड्डे भी खोद सकता था। उसके

जैसा दिखने वाला वोमबैट और कुआला अब भी वहां मौजूद हैं लेकिन दोनों के आकार

इससे बहुत छोटे हैं। पृथ्वी पर मौजूद इन दो जीवित प्राणियों की शारीरिक ताकत भी उस

नये जानवर से कम ही है। ऑस्ट्रेलिया में पाय गये अजीब किस्म के जानवर के ढांचे को

देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह भी स्वभाव से आक्रामक प्राणी रहा होगा

और अब दुनिया से विलपप्त हो चुका है। इस शोध से जुड़े क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के

वैज्ञानिक गिलबर्ट प्राइस ने कहा कि लगातार अनुसंधान का यह भी निष्कर्ष है कि यह

प्राणी शायद इस दुनिया से 25 मिलियन वर्ष पूर्व ही विलुप्त हो चुका था। उस काल में

जमीन पर चलने वाले, रेंगने वाले और पानी मे तैरने वाली सभी प्राणियों का औसत

आकार भी आज की प्रजाति के मुकाबले बहुत अधिक हुआ करता था।

शायद मौसम में बदलाव को नहीं झेल पाये ऐसे प्राणी

हो सकता है कि मौसम में बदलाव अथवा किसी अन्य कारण से यह प्रजाति भी अपने आप

ही दुनिया से समाप्त हो गयी हो। उनके मुताबिक आकार में विशाल होने के बाद भी उस

दौर के अधिकांश जानवर मौसम और पारिस्थितिकी में बदलाव के मुताबिक खुद को नहीं

ढाल पाये और इसी वजह से ऐसी प्रजातियां धीरे धीरे समाप्त होती चली गयी है। वैसे

ऑस्ट्रेलिया में इस खोज को इस वजह से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह वहां

पाया जाने वाला सबसे प्राचीन फॉसिल है और पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में होने की वजह

से ही उसके बारे में अधिकाधिक जानकारी मिल पायी है।

[subscribe2]



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from विज्ञानMore posts in विज्ञान »
More from विश्वMore posts in विश्व »

2 Comments

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: