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चीन के खिलाफ दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है आक्रोश

  • अनेक देश जानना चाहते हैं कोविड 19 का सच

  • डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही नाराज हैं

  • जानवर से ही वायरस फैला, जांच जरूरी

  • पारदर्शी जांच से सच्चाई का पता चल पायेगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीन के खिलाफ दुनिया भर में एक नाराजगी का माहौल बन चुका है। दरअसल

कोविड 19 के फैलने के बारे में चीन द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचनाओं पर इन नाराज

देशों के वैज्ञानिक संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही चीन के कोरोना वायरस और यूरोपियों

अथवा अमेरिकी महाद्वीप में फैले वायरस के स्वरुप में अंतर होने की वजह से भी चीन के

खिलाफ यह नाराजगी बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे आगे अमेरिका है, जिसके कई प्रमुख

लोग यह सार्वजनिक तौर पर यह आरोप लगा चुके हैं कि चीन इस वायरस के बार में सारा

सच नहीं बता रहा है। इसी वजह से इसके बारे में और अधिक परेशानी उत्पन्न हुई है।

अमेरिका की नाराजगी उसी वक्त जाहिर हो गयी थी जब चीन ने उसके उस प्रस्ताव को

खारिज कर दिया था, जिसमें वुहान के इस प्रयोगशाला की जांच की अनुमति मांगी गयी

थी, जिसे वायरस अनुसंधान केंद्र के तौर पर जाना जाता है। पहले ही इस बारे में सोशल

मीडिया में इस बात की चर्चा होती आयी है कि चीन ने इस वायरस अनुसंधान केंद्र के सारे

लोग मारे गये हैं। लेकिन चीन की तरफ से इस आरोप का खंडन किया गया है।

चीन के खिलाफ सबसे पहले ट्रंप बोले

चर्चा है कि आगामी सोमवार से प्रारंभ होने वाले विश्व स्वास्थ्य एसेंबली में भी इस पर न

सिर्फ चर्चा होगी बल्कि खुले तौर पर कई बातों की चर्चा भी होगी। 73 वीं एसेंबली में सार्स

कोव 2 की चुनौतियों से निपटने के मुद्दे पर ही मुख्य तौर पर चर्चा होगी। इसमें भारत

सहित कुल 62 देशों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर दी है। जाहिर है कि इस

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में भी कोरोना के फैलने के असली कारणों की जांच पर

सदस्य देश चर्चा करेंगे। इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य

संगठन की भूमिका की भी आलोचना की है जबकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस

पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से जांच होने की बात कही है। इससे समझा जा सकता है कि

कोरोना वायरस के मुद्दे पर चीन के खिलाफ माहौल बना है। अब इसी मांग पर यूरोप के

कई देशों के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी मांग की है। पारदर्शी तरीके से पूरे मामले की

जांच की मांग करने वाले देशों में बांग्लादेश, कनाडा, रुस, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका,

तुर्की, ब्रिटेन और जापान जैसे देश है। इनमें से जापान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने सारी

कंपनियों को चीन से अपना कारोबार समेटने का आदेश जारी कर दिया है। दूसरी तरफ

पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीप और अफगानिस्तान जैसे देशों ने इस प्रस्ताव का

समर्थन नहीं किया है। इन सभी देशों में चीन की तरफ से विभिन्न परियोजनाओं पर बहुत

ज्यादा पूंजी निवेश किया गया है।

वुहान शहर की गोपनीयता संदेह बढ़ाने वाला

चीन के खिलाफ ऐसा वैश्विक माहौल होने की एक वजह चीन के वुहान शहर के वायरस का

प्रसार होना है। पहले तो यह कहा गया था कि वहां के समुद्री जीवों के बाजार से यह वायरस

फैला था। लेकिन जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं, चीन के इस दावे पर लोगों का संदेह बढ़ता चला

जा रहा है। दुनिया में अब तक इस बीमारी से साढ़े तीन लाख के करीब लोगों की मौत हो

चुकी है। खुद भारत की बात करें तो संक्रमित मरीजों के मामले में हमारा देश चीन से आगे

निकल चुका है। हर दिन पांच हजार से अधिक लोगों के बीमार होने की सूचना को हल्के में

नहीं लिया जा सकता है। लेकिन इसकी जानकारी सभी के पास है कि इसका सबसे पहले

पता चीन के वुहान शहर के ही हुआ था।

अब चीन के खिलाफ जांच की मांग में शामिल होने वाले देश यह चाहते हैं कि विश्व

स्वास्थ्य संगठन अन्य प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर इस पूरे मामले की

पारदर्शी तरीके से जांच हो। खास तौर पर लोग यह जानना चाहते हैं कि चीन का यह दावा

सही भी है अथवा नहीं कि यह जंगली जानवरों का वायरस है जो इंसानों तक पहुंचा है।

चीन ने सबसे पहले अपेन वैज्ञानिकों की जांच के आधार पर यह कहा था कि पैंगोलीन

नामक जंगली जानवरों को खाने की वजह से ही यह वायरस इंसानों तक पहुंचा है। जैसे

जैसे दिन बीत रहे हैं चीन के दावों के प्रति दुनिया के अन्य वैज्ञानिकों का भरोसा कम होता

जा रहा है। इसी वजह से निष्पक्ष जांच की मांग करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले

देश यह चाहते हैं कि जमीनी हकीकत की तलाश की जाए और इस बात की पुष्टि की जाए

का यह वायरस वाकई जंगली जानवरों की वजह से फैला है।


 

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