अमरीश पुरी ने बालीवुड में खलनायकी को नये तरीके से स्थापित किया

बालीवुड में खलनायकी को नये तरीके से स्थापित किया अमरीश पुरी ने
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(पुण्यतिथि 12 जनवरी के अवसर पर)

मुंबई: अमरीश पुरी को एक ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपनी कड़क आवाज, रौबदार भाव-भंगिमाओं और दमदार अभिनय के बल पर खलनायकी को एक नयी पहचान दी।

रंगमंच से फिल्मों के रूपहले पर्दे तक पहुंचे अमरीश पुरी ने करीब तीन दशक में लगभग 250 फिल्मों में अभिनय का जौहर दिखाया।

आज के दौर में जब कलाकार किसी अभिनय प्रशिक्षण संस्था से प्रशिक्षण लेकर अभिनय जीवन की शुरूआत करते हैं, अमरीश पुरी खुद एक चलते फिरते अभिनय प्रशिक्षण संस्था थे।

पंजाब के नौशेरां गांव में 22 जून 1932 में जन्में अमरीश पुरी ने अपने करियर की शुरूआत श्रम मंत्रालय में नौकरी से की और उसके साथ ही सत्यदेव दुबे के नाटकों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया।

पृथ्वी थियेटर के कलाकार से प्रारंभ हुई कला यात्रा

बाद में वह पृथ्वी राज कपूर के ‘पृथ्वी थियेटर’ में बतौर कलाकार अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।

पचास के दशक में अमरीश पुरी ने हिमाचल प्रदेश के शिमला से बीए पास करने के बाद मुंबई का रुख किया।

उस समय उनके बड़े भाई मदन पुरी हिन्दी फिल्म में बतौर खलनायक अपनी पहचान बना चुके थे।

वर्ष 1954 में अपने पहले फिल्मी स्क्रीन टेस्ट में अमरीश पुरी सफल नहीं हुये।

अमरीश पुरी ने अपने जीवन के 40वें वसंत से अपने फिल्मी जीवन की शुरूआत की थी।

वर्ष 1971 में बतौर खलनायक उन्होंने फिल्म रेशमा और शेरा से अपने कैरियर की शुरूआत की लेकिन इस फिल्म से दर्शकों के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके।

उस जमाने के मशहूर बैनर बाम्बे टॉकीज में कदम रखने बाद उन्हें बड़े-बड़े बैनर की फिल्में मिलनी शुरू हो गयी।

उन्होंने खलनायकी को ही अपने कैरियर का आधार बनाया।

इन फिल्मों में निंशात, मंथन, भूमिका, कलयुग और मंडी जैसी सुपरहिट फिल्में भी शामिल हैं।

इस दौरान यदि अमरीश पुरी की पसंद के किरदार की बात करें

तो उन्होंने सबसे पहले अपना मनपसंद और न कभी नहीं भुलाया जा सकने वाला किरदार

गोविन्द निहलानी की वर्ष 1983 में प्रदर्शित कलात्मक फिल्म अर्द्धसत्य में निभाया।

इस फिल्म में उनके सामने कला फिल्मों के अजेय योद्धा ओमपुरी थे।

इसी बीच हरमेश मल्होत्रा की वर्ष 1986 मे प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म नगीना में उन्होंने एक सपेरे की भूमिका निभायी जो लोगो को बहुत भायी।

इच्छाधारी नाग को केन्द्र में रख कर बनी इस फिल्म में श्रीदेवी और उनका टकराव देखने लायक था।

वर्ष 1987 में उनके कैरियर में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ।

अमरीश पुरी ने मोगैंबो नाम को अपने साथ जोड़ने में कामयाबी पायी

वर्ष 1987 में अपनी पिछली फिल्म ‘मासूम’ की सफलता से उत्साहित शेखर कपूर बच्चों पर केन्द्रित एक और फिल्म बनाना चाहते थे जो ‘इनविजबल मैन’ के उपर आधारित थी।

इस फिल्म में नायक के रूप में अनिल कपूर का चयन हो चुका था

जबकि कहानी की मांग को देखते हुये खलनायक के रूप में ऐसे कलाकार की मांग थी

जो फिल्मी पर्दे पर बहुत ही बुरा लगे।

इस किरदार के लिये निर्देशक ने अमरीश पुरी का चुनाव किया जो फिल्म की सफलता के बाद सही साबित हुआ।

इस फिल्म में अमरीश पुरी द्वारा निभाये गये किरदार का नाम था ‘मोगैम्बो’ और यही नाम इस फिल्म के बाद उनकी पहचान बन गया ।

जहां भारतीय मूल के कलाकार को विदेशी फिल्मों में काम करने की जगह नहीं मिल पाती है

वही अमरीश पुरी ने स्टीवन स्पीलबर्ग की मशहूर फिल्म ‘इंडियाना जोंस एंड द टेंपल आफ डूम’ में

खलनायक के रूप में काली के भक्त का किरदार निभाया।

इसके लिये उन्हें अंतराष्ट्रीय ख्याति भी प्राप्त हुयी ।

इस फिल्म के पश्चात उन्हें हालीवुड से कई प्रस्ताव मिले जिन्हे

उन्होनें स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनका मानना था कि हालीवुड में

भारतीय मूल के कलाकारों को नीचा दिखाया जाता है।

लगभग चार दशक तक अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में

अपनी खास पहचान बनाने वाले अमरीश पुरी ने 12 जनवरी 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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