fbpx Press "Enter" to skip to content

अमित शाह अब भी नाराज चल रहे हैं रघुवर दास ने

  • पूर्व सीएम के ईर्दगिर्द जांच की घेराबंदी जारी

  • एनआईए की छापामारी के राजनीतिक अर्थ

  • पिछली बार के विजय कुमार ने सुलझाया था

  • नक्सली लेवी की जांच में और नाम भी आयेंगे

संवाददाता

रांचीः अमित शाह यानी वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की

रघुवर दास के प्रति नाराजगी शायद समाप्त नहीं हुई है। शायद इसी वजह से एनआईए

जांच की वह गाड़ी आगे बढ़ने लगी है, जिसे काफी समय से के विजय कुमार की पैरवी से

रोक रखा गया था। जिस तरीके से रघुवर दास के करीबी लोगों के खिलाफ जांच की

घेराबंदी हो रही है, उससे तय है कि आने वाले दिनों में जांच की गाड़ी के आगे बढ़ने पर

उनके कई निकटस्थ इसकी चपेट में निश्चित तौर पर आ जाएंगे। इनलोगों ने रघुवर राज

ने अनेक ऐसे काम किये हैं, जिनके साक्ष्य सरकारी दस्तावेजों में मौजूद हैं। खबर है कि

रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के यहां छापा पड़ने के बाद कई लोगों ने अपने अपने घरों से

दस्तावेज हटाये हैं। इन दस्तावेजों को अन्यत्र भेजे जाने की पुष्ट सूचना भी है।

अमित शाह का पंगा चतरा में आदित्य साहू के नाम से शुरु

मामले की छान बीन में यह स्पष्ट हुआ है कि दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान ही

चतरा सीट पर आदित्य साहू का नाम आगे करने की वजह से रघुवर दास खुद ही अमित

शाह के निशाने पर आ गये थे। वहां से सुनील सिंह भाजपा आलाकमान की पसंद थे।

लेकिन अपनी तरफ से अपने करीबी आदित्य साहू का नाम रघुवर दास ने ही आगे बढ़ाया

था। इससे जो गुत्थी उलझी वह बाद के घटनाक्रमों से और भी उलझती चली गयी। अमित

शाह की नाराजगी को मानने वाले यह बताते हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस

तरीके से तेज होने का सीधा अर्थ केंद्र से हरी झंडी मिलना होता है। वरना इससे पहले जब

टंडवा के नक्सली लेवी का मामला एनआईए की पकड़ में आ गया था तो कुछ लोगों से

पूछताछ का मन बनाये एक आइपीएस को आनन फानन में एनआईए से हटाया गया था।

सूत्रों के मुताबिक यह काम सीआरपी के पूर्व महानिदेशक और राष्ट्रीय सलाहकार के

विजय कुमार ने किया था। लेकिन अब के बदले समीकरणों में के विजय कुमार भी इन

मुद्दों पर हाथ नहीं डाल रहे हैं। दूसरी तरफ एमवी राव के फिर से झारखंड में डीजीपी होने

की वजह से पूर्व डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी अनुराग गुप्ता जाहिर तौर पर निशाने पर

हैं। यह दोनों भी रघुवर दास के प्रियपात्रों में से हैं। इनमें से अनुराग गुप्ता पर तो राज्य

सभा चुनाव में रघुवर दास के पक्ष में काम करने का वीडियो भी सार्वजनिक हो चुका है।

जांच आगे बढ़ी तो कई अन्य भी फंसेंगे

रघुवर सरकार में किचन कैबिनेट में शामिल रहे लोगों के अलावा कई अन्य लोगों पर भी

जांच का कहर टूट सकता है क्योंकि नक्सली लेवी के मामले में जांच की गाड़ी आगे बढ़ने

पर पैसे का बंटवारा जिन लोगों तक हुआ है, उनके नाम भी धीरे धीरे सामने आ जाएंगे।

लेकिन राजनीति के जानकार यही मान रहे हैं कि दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

की सहमति के बिना रघुवर दास के करीबी लोगों के खिलाफ जांच की कार्रवाई हो नही

सकती थी। इसलिए यह समझा जा रहा है कि आदित्य साहू प्रकरण से उपजी अमित शाह

की नाराजगी अब तक कम नहीं हुई है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from रांचीMore posts in रांची »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

One Comment

Leave a Reply