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किसानों को धमकाने वाले अमित शाह को भी अब फोन करना पड़ गया




वार्ता सही रही तो आंदोलन भी समाप्त करेंगे- मोर्चा
पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया
सभी मुद्दों पर सरकार से सीधी चर्चा होगी
मोर्चा की अगली बैठक 7 दिसंब को होगी
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसानों को अब सुलह का तेवर बनाना पड़ सकता है दरअसल आज किसानों के चालीस संगठनो की बैठक में आज पहली बार नरमी के सुर दिखे। सिंघु बॉर्डर पर चालीस किसान संगठनों की आज की बैठक में यह राय निकलकर आयी कि अगर केंद्र सरकार के साथ उनकी वार्ता सही रही तो वे निश्चित तौर पर अपना आंदोलन समाप्त कर देंगे।




वैसे इसके बीच से ही यह सूचना भी बाहर निकली कि पहली बार में किसानों को बुलाकर धमकाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद किसान नेताओं को फोन किया था। कल रात उनके टेलीफोन के बाद इस गतिरोध के समाप्त होने का रास्ता खुलता नजर आने लगा है।

श्री साह ने किसान नेताओं से उनकी सभी मांगों पर वार्ता की बात कही है। केंद्रीय गृह मंत्री की इस पहल के बाद किसानों ने भी अपनी तरफ से पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है, जो सरकार से अपनी मांगों के मुद्दों पर बात करेगी।

आज की बैठक में अन्य मुद्दों के अलावा कल रात केंद्रीय गृहमंत्री के फोन की सूचनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। श्री शाह ने किसान नेताओं से यह कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी हो चुकी है और सरकार उनकी अन्य मांगों पर खुले मन से विचार करने के लिए भी तैयार है।

दरअसल तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बाद एमएसपी और शहीद किसानों के मुआवजा पर आंदोलनकारी किसान अड़े हुए हैं जबकि मांग में इस एक साल के आंदोलन के दौरान विभिन्न समय में किसानों पर दर्ज हुए मुकदमों की वापसी भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री ने किसानों को वह कमेटी देने को कहा था, जिससे सरकार इन तमाम मुद्दों पर बात करेगी।

किसानों को बताया गया कि रात को फोन आया था

किसान संगठनो की बैठक के बाद किसान नेता युद्धवीर सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कमेटी का सदस्यों का नाम अंतिम हो चुका है। इसलिए ऐसा हो सकता है कि केंद्र सरकार और किसानों के पांच प्रतिनिधियों के बीच आगामी 7 दिसंबर को बात-चीत हो। अगर इस बात चीत से सुलह का कोई रास्ता निकल आया तो आंदोलन समाप्त भी किया जा सकता है।




केंद्र सरकार की तरफ से इस पहल की असली वजह भी उत्तरप्रदेश में होने वाले चुनाव की मजबूरी है, ऐसा साफ होता जा रहा है। चुनाव प्रचार प्रारंभ होने के बाद भी भाजपा को अनेक इलाकों में अब भी किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

खास तौर पर पश्चिमी उत्तरप्रदेश के उन इलाकों में भाजपा को भारी परेशानी है जहां उन्हें थोक में वोट मिलते रहे हैं। इस खतरे को भांपते हुए ही मजबूरी में कृषि कानूनों को वापस लेने जैसा फैसला लेना पड़ा है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी की घटना से भी भाजपा की चुनावी सेहत बिगड़ गयी है।

इस बैठक की समाप्ति के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि पांच सदस्यीय कमेटी में बलवीर सिंह राजेवार, शिव कुमार कक्का, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, युद्धवीर सिंह और अशोक ढावले शामिल है।

यह लोग कमेटी के सदस्य के तौर पर केंद्र सरकार से सभी मुद्दों पर बात चीत करेंगे। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा की अगली बैठक आगामी 7 दिसंबर को होगी।

किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन चल रही है उसके बारे में स्पष्ट फैसला नहीं होने तक किसान आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। वैसे सरकार की तरफ से वार्ता के लिए औपचारिक आमंत्रण प्राप्त होने के बाद ही आगे कुछ फैसला किया जाएगा।



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